'अनकही'

डोरबेल की आवाज आई...., शाम के ७ बज रहे थे राजीव के आने का समय हो गया था। कविता भागती हुई दरवाजा खोलने गई तो सामने राजीव खड़ा था, उसके हाथों से बैग लेती हुई वह बोली बहुत थके लग रहें हैं आप....., बैठिए मैं चाय बनाकर लाती हूं। राजीव पेशे से इंजीनियर था और दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी तनख्वाह पे नौकरी कर रहा था।

राजीव और कविता के शादी के ७ साल हो गए थे लेकिन अभी तक उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ था।
राजीव सुस्ता रहा था इतने में कविता उसके लिए चाय बनाकर ले आई, उसने चाय पी और चाय पीते ही उसके दिमाग को काफी हल्का महसूस हुआ, वैसे जब भी वह थका होता था कविता के हाथों की बनी चाय पी लेता था तो उसकी सारी थकान झट से गायब हो जाती थी। लेकिन इतने सालों में वह कविता से इतना भी नहीं बता पाया था, बताता भी कैसे शादी के दिनों से ही दोनों में काफी कम बातें होती थी। फिर भी अनकहे ही दोनों एक-दूसरे का बहुत ख्याल रखते थे।

रात का खाना बना दोनों ने खाया और रोजमर्रा के तरह सो गए। और दंपतियों के तरह न कोई बातचित, और ना ही कोई हंसी-ठिठोली।

सुबह उठकर राजीव फिर अपने दफ्तर जाने की तैयारी में लग गया और कविता उसके नाश्ते और टिफिन की तैयारी में लग गई। वह रोजाना ६ बजे उठ जाया करती थी क्योंकि वो नहीं चाहती थी की राजीव को किसी भी कारण से दफ्तर के लिए निकलने में देर हो। इन ७ सालों में उसका यही रूटीन था और यह सब देखकर राजीव उससे अंदर ही अंदर काफी खुश रहता था। खुश तो ससुराल में सभी लोग थे उससे लेकिन सासु मां को एक पोते या पोती की इच्छा खाये जा रही थी। जब भी गांव से फोन आता था तो एक ही बात पुछती थी और फिर जबाव सुनकर निराश हो जाती।

जिंदगी ऐसे ही कट रही थी तभी अचानक एक दिन ऐसा हुआ जिससे दोनों की दुनियां ही बदल गई।

राजीव दफ्तर में था...., दोपहर के खाने का समय हो चुका था तो वह काम निपटा कर खाने जा ही रहा था कि उसका फोन बज उठा। उसने देखा कविता का फोन है, इस समय कविता का फोन.... थोड़ी हैरानी हुई उसे क्योंकि इतने सालों में उसनेे कभी दफ्तर के समय में फोन नहीं किया था। हां, अगर कभी घर पहुंचने में देर हो जाती थी तब वह फोन करके पुछ लेती थी।
उसने फोन उठाया उधर से कविता की आवाज आई मेरी तबियत ठीक नही लग रही है। राजीव एकदम से घबरा गया क्योंकि वह समझ चुका था कि उसकी हालत गंभीर है और वह तुरंत ही दफ्तर से निकल गया।
घर पहुंचते ही उसने डोरबेल बजाया, कविता को इतना ज्यादा ज्वर था वह उठ नहीं पा रही थी फिर भी जैसे-तैसे कोशिश करके वह उठी और दरवाजा खोली और दरवाजा खोलते ही चक्कर खाकर गिरने लगी तभी राजीव ने उसे अपनी बाहों में जकर लिया। जैसे ही राजीव ने उसे पकड़ा उसे महसूस हुआ कि कविता का तो पूरा बदन तप रहा है। फिर तुरंत ही वह थर्मामीटर लगाया और फिर देखा तो बुखार १०४ डिग्री तक पहुंच चुका था। राजीव का तो दिमाग ही घुम गया, कुछ पल के लिए उसे ऐसा लगा कि कविता के बिना उसका कोई वजूद ही नहीं, वह तुरंत ही गोद में उठाकर गाड़ी में बैठाया और अस्पताल की ओर चल पड़ा।

अस्पताल घर के पास होने के कारण वो १५ मिनट में पहुंच गए। पहुंचते ही नर्स ने बुखार चैक किया और चुंकि बुखार बहुत तेज था तो तुरंत ही उसे भर्ती कर लिया गया। बाहर राजीव बहुत हैरान-परेशान सा बैठा इंतजार करता रहा की उसे होश आ जाए। नर्स ने इंजेक्शन दे दिया और बाहर आ गई। और फिर जैसे ही वह बाहर आई राजीव ने तो सवालों की झड़ी ही लगा दी। सिसटर मेरी पत्नी को कब तक होश आ जाएगा...., क्या हुआ उसे....., वो ठीक तो हो जाएगी......? इतने सारे सवाल सुनकर नर्स थोड़ा झल्ला गई और थोड़े से गुस्से बाली नजरों से देखते हुए बोली..... मैंने ब्लड टेस्ट के लिए सैम्पल भेज दिया है और बुखार उतरने का इंजेक्शन भी दे दिया है शायद.... २-३ घंटे में उसे होश आ जाए और ब्लड टेस्ट का रिपोर्ट रात ८ बजे तक आ जाएगा फिर उसके अनुसार डॉक्टर उनका इलाज शुरू करेंगे। भुखे - प्यासे राजीव उस समय से वही बैठा रहा, इतनी ही देर में उसे अपनी दुनियां उजड़ी-उजडी़ लग रही थी। उसे अब महसूस हो रहा था कि उसे कविता से दूरी बनाकर नहीं रहना चाहिए था। वह कभी उससे अपनी दिल की बात भी नहीं बता पाया कि वो उससे कितना प्यार करता है फिर उसके दिमाग में आया लेकिन कविता ने भी तो आज तक उससे खुलकर बात करने की कोशिश नहीं की लेकिन अगले ही पल उसका मन बोला.... अरे पगले ! वो तो औरत है और औरत कभी अपने मन की बात नहीं बोलती और तेरी पत्नी कविता तो प्यार और त्याग की मूरत है मूरत। अब वह भगवान से मन ही मन प्रार्थना कर रहा था कि हे भगवान मेरी कविता को जल्दी ठीक कर दो अब मैं उससे हमेशा खुलकर प्यार करूंगा, हमेशा उसका ख्याल रखूंगा चाहे कितना भी व्यस्त होऊं और उसे ढ़ेर सारा प्यार दूंगा।

रात के ८ बज चुके थे राजीव ब्लड टेस्ट के रिपोर्ट का इंतजार कर रहा था तभी उसे नर्स दिखाई दी और उसके हाथ में रिपोर्ट भी था शायद रिपोर्ट लेकर वह डॉक्टर के पास जा रही थी। राजीव ने उसके पास जाकर उससे पूछा...... सिस्टर मेरी पत्नी का रिपोर्ट आ गया? नर्स ने बोला हां आ गया कुछ खास नहीं है आपकी पत्नी को इन्फेक्शन लग गया था इस वजह से उनकी ऐसी हालत हो गई। राजीव के मन को शांति मिली..... फिर उसने नर्स से पूछा कब तक रहना होगा मेरी पत्नी को अस्पताल में? नर्स ने बोला २४ घंटे बाद आप उन्हें ले जा सकते हैं। राजीव अंदर गया कविता से मिलने अंदर दाखिल होते ही उसने देखा कि मुरझा सा गया था कविता का सुंदर सा, कोमल सा चेहरा।

शादी के ७ साल बाद भी उसका चेहरा पहले जैसा ही चमकता था। वो काली - घनी कमर तक लंबे बाल, बड़ी - बड़ी आंखें, वो पतली लंबी भौंहें.... उसके गोरे से, कोमल से चेहरे पर चार चांद लगाती थी।

राजीव उसे देख ही रहा था कि वह बोल पड़ी अरे, आप.... बोलते वह उठ बैठी। आपने कुछ खाया या नहीं आपके डिनर का टाईम हो गया है। राजीव ने उसके होंठों पर हाथ रखते हुए बोला बस अब और नहीं कविता कब तक ऐसे अनकहे मेरा ख्याल रखते रहोगी? आज तक तुमने बिना कहे ही मुझे सब कुछ दिया है और मुझसे कभी कोई उम्मीद भी नहीं की.... प्यार की भी नहीं जिसकी ख्वाहिश हर औरत को होती है। तुमने अपने ख्वाहिशों को भी दफन कर दिया। कविता मुस्कुराते हुए बोली आपसे प्यार की उम्मीद क्यों करती भला आप तो मेरे ही थें, हैं और रहेंगे भी, इतना सुनते ही राजीव ने कसकर उसे अपनी बाहों में भर लिया। आज फिर उसे अपनी पत्नी पर फक्र हो रहा था।
२४ घंटे हो गए कविता को डिस्चार्ज कर दिया गया वो घर पे आ गई। अब वह राजीव में काफी बदलाव महसूस कर रही थी। राजीव अब उसका बहुत ख्याल रखने लगा था, उनका प्यार अब और गहरा होते जा रहा था। कुछ ही दिनों बाद कविता ने एक खुशखबरी सुनाई जिससे राजीव का तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। कविता मां बनने बाली थी, राजीव ने खुशी उसे अपनी बाहों में भर लिया और दोनों प्लानिंग करने लगे अपने आने बाले बच्चे के लिए।।



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