किसका दोष?


सेंट्रल मॉल की लिफ्ट में --

"कौन थी वो ? किसे फँसा रही थी ?"

"तुमसे कोई मतलब है? ... हाथ छोडो मेरा .. बहुत पछताओगे..!!"

"माँगा था तुमसे तुमने दिया नहीं... अब आप समझना ही नहीं चाहती है की सही क्या है और गलत क्या"

"नितिन मैं चिल्ला दूंगी... जब लोगों के दो चार हाथ पड़ेंगे तुम्हारी अक्कल तब ठिकाने आएगी ..."

"इतनी अकड़ किसको दिखा रही है बे.. क्या समझती है तू... पागल हूँ मैं? आवारा हूँ क्या मैं? प्यार किया है मैंने तुझे और तुने मुझे, इतनी आसानी से नहीं जाने देंगे। "

"मैंने नहीं किया और न कभी कर पाऊँगी ।" रूचि ने रोते हुए कहा।


लिफ्ट खुलते ही नितिन ने रूचि का हाथ छोड़ दिया और भीड़ में गायब हो गया। रूचि के लिए यह आम बात हो गई थी। जब भी वह कोचिंग क्लास से वापिस आती या किसी दोस्त से मिलकर लौटती नितिन उसका रास्ता जरूर रोकता। उसके साथ जबरदस्ती करता धमकिया दे कर भाग जाता।


बात कुछ महीने पहले की ही है। नितिन रूचि के कोचिंग क्लास में पढता था। एक दिन जब लेट हो गया तो नितिन ने रूचि को लिफ्ट दिया। और तब से उनका साथ में आना जाना शुरू हो गया। नितिन और रूचि दोनों एक सामान्य परिवार से आते थे लेकिन दोनों की सोच में जमीन आसमान का अंतर था। साथ में आने-जाने तक की ही दोनों की दोस्ती थी।

रूचि खुले ख़यालात वाली थी। उसको जरा भी पसंद नहीं था की कोई उसे शंका की नजरों से देखे या उसके चरित्र पर सवाल उठाए। रूचि की परवरिश भी वैसे ही हुई थी। जब की नितिन पसेसिव ख़यालात वाला था। रूचि कहाँ जाती है, क्या करती है, किससे मिलती है - यह सब वो पूछता रहता, जो रूचि को बिलकुल भी पसंद न था। नितिन की बातों में कभी कभी ऐसे शब्द भी आ जाते की - 'लड़कियों को ऐसे ही रहना चाहिए ' - जिससे रूचि को नितिन की सोच से नफरत होने लगी।

कभी कभी नितिन के लाख कहने पर रूचि दोस्ती के नाते उसके साथ रविवार के दिन फिल्म देखने चली जाती, कभी पानी-पूड़ी खा लेती। लेकिन कभी उन दोनों के बीच में रिश्ते और प्यार की बातें नहीं हुई। नितिन ने एकबार अपने मन की बात रूचि के सामने रखने का प्रयत्न किया तो रूचि ने साफ़ साफ़ मना कर दिया। रूचि ने नितिन को यही बताया की हम दोनों पूर्व - पश्चिम है, हमारे ख़यालात इतने अलग है की हम कभी साथ में खुश नहीं रहेंगे। और उस दिन के बाद रूचि ने नितिन से वादा लिया की अगर नितिन को उसके लिए मोहोब्बत है तो हमारी दोस्ती को हमें ब्रेक देना चाहिए - जो सबसे बेहतर होगा। लेकिन तब तक नितिन का एक तरफ़ा प्यार उसके दिलों - दिमाग में जकड बना चूका था। वो रूचि को खो देने के डर से अपने जज़्बात कभी सामने नहीं आने देता।इन सब के बीच रूचि को उसका पुराना प्रेमी उमंग अक्सर याद आ जाता। वो घंटो तक उसको याद करके रोती।


दिन बीतते गए। क्लास ख़तम होने का समय आ गया। दो साल की पढाई ख़तम हो रही थी। सब दोस्त बिछड़ने का गम मना रहे थे। रूचि को इन सबसे इतना फर्क नहीं पड़ रहा था। लेकिन नितिन पागल हो चूका था। अब रूचि को वो कैसे मिल पाएगा की चिंता उसे काटे खाती थी.


उस रात कोचिंग क्लास के बच्चों ने फेरवेल पार्टी रखी थी। रूचि और नितिन दोनों उसमे शामिल हुए। उमंग की यादों में खोई हुई रूचि अपना ड्रिंक का गिलास लेकर बाहर बरामदे में आ गई, जहाँ शोर बकर कम था। नितिन रूचि को ढूंढते ढूंढते उसके पीछे चला आया। वो वहां उसके पास आकर बैठ गया। परीक्षाओं की कड़ी मेहनत के दिन ख़तम हो गए थे। आज रूचि का जी भर कर ड्रिंक करने का मन था। और फिर कल से कुछ दिनों के लिए वह हॉस्टेल से घर चली जाएगी इसलिए वो उस रात कुछ पल अपने लिए जी लेना चाहती थी। धीरे धीरे उसे ड्रिंक का असर होने लगा और पास में बैठे नितिन के कंधो पर उसने अपना सर रख दिया। नितिन ने उसके बालो को सहलाया और फिर नशे में बेजान रूचि को उसने कस कर चुम्बन किया। रूचि ने मुंह फेर लिया और वहां से ऑटो लेकर हॉस्टल वापिस आ गई। उस रात नितिन ने उसको १०० से ज्यादा बार कॉल किए। रूचि ने थक कर फोन स्विच ऑफ कर दिया।


घर पर कुछ वक्त बीता कर उसको अच्छा लगा। वो नितिन के बारे में सब कुछ भूल जाना चाहती थी। नितिन ने उसका भरोसा तोडा था। उसी वक्त उसके पुराने प्रेमी उमंग ने उसको व्हाट्सएप्प पर मेसेज किया। रूचि की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। वो समझती थी की उमंग उसकी जिंदगी से जा चूका है हमेशा के लिए लेकिन ऐसा न था। उमंग वापिस आया था दोस्त बनकर लेकिन देखते ही देखते दोनों के बीच में अनगिनत बातों का दौर शुरू हो गया। मिलना- घूमना, देर रात तक बातें करना। रूचि की जिंदगी में एक अलग बाहर आयी थी। वो खुदको इतना खुश-नसीब पहले कभी नहीं समझी थी। उमंग और रूचि के बीच में रिश्ता आगे बढ़ने लगा - प्यार का। इस बीच रूचि नितिन के ५० मेसेज में से कभी कभी एक का जवाब दे देती।


यहाँ नितिन पागल हो गया था, उससे यह दुरी बिलकुल भी नहीं सही गई। वो रूचि के शहर आकर रहने लगा। रूचि को पता न चले वैसे उसका पीछा करने लगा। उसने रूचि को एकबार मिलकर अपने बर्ताव के लिए माफ़ी भी मांगी। रूचि ने सबकुछ भूल कर उसको माफ़ कर दिया। लेकिन नितिन के दिमाग में अभी भी हकीकत का स्वीकार नहीं हुआ था। एकबार उसने रूचि को मिलकर सारी बातें बताई और बोला की रूचि की मदद के बिना वह यह कीचड़ से नहीं निकल सकता। रूचि अपने आप को कोसने लगी। उसकी वजह से एक भला लड़का आज यह जिंदगी जी रहा था। उसने खुद से जो हो पायेगा वो सब मदद करेगी का वादा किया। वह नितिन का खयाल रखती, अब उसके मेसेज का अच्छे से जवाब देती, नितिन के जज्बातों की कदर करती। लेकिन नितिन ने यह सब गलत मायनों में लिया। वो दोस्ती से ज्यादा की अपेक्षा रखने लगा। और उसने यह एक-तरफ़ा प्यार रूचि के ऊपर थोपना शुरू कर दिया।


रूचि जब भी उमंग से मिलती नितिन उसको बहुत टॉर्चर करता। रूचि को मानसिक और शारीरिक त्रास पहुँचाने लगा। रूचि अपने हर गलत कदम पर अफ़सोस कर रही है लेकिन अब देर हो चुकी है। नितिन की वजह से उमंग ने भी रूचि के साथ मिलना बैठना कम कर दिया है। रूचि अपने बिछड़े हुए प्यार को फिर से गवा देना नहीं चाहती है। लेकिन वो अंदर से तूट चुकी है। नितिन कैसा भी क्यूँ न है, उसका दोस्त था और उसकी वजह से नितिन की यह हालत है।


हाँ, मैं ही हैं रूचि। मैं पूरी कोशिश कर चुकी हूँ हालात को सुधारने की। लेकिन अब हालत मेरे क़ाबू से बाहर है। मैं उमंग को खोना हरगिज नहीं चाहती हूँ। क्या करूँ मैं। आप नितिन को गलत मत समझिए, वो प्यार में हारा हुआ है वह कभी भी ऐसा नहीं था। किसका दोष?


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