"मै इंतजार कर रही थी, तुम ही ने तो कहा था ना कि आज शाम को dinner बाहर ही करेंगे और तुम शाम को जल्दी आओगे, क्या पर क्यो? अच्छा ठीक है " कहते हुए सीमा ने phone रख दिया और अपने अनवरत बहते आँसू को रोकने की नाकाम कोशिश करने लगी ।


आज पूरे छ साल हो गये थे सीमा की शादी को और जहा तक उसे याद है, शादी की पहली वर्षगांठ के अलावा कोई वर्षगांठ उन्होंने साथ मे मनाई ही नही । आज वह बहुत खुश थी क्योंकि सुमित को न केवल शादी की वर्षगांठ याद थी बल्कि उन्होंने ही यह प्रोग्राम बनाया था । आज कितने दिन बाद उसने लाल सिल्क की जरी वाली साड़ी निकाली थी, जो सुमित ने उसे पहली करवाचौथ पर दी थी । उसके मैचिंग की लाल चूड़ियाँ ।पर वही पागल थी जो इतनी उम्मीद बांध के बैठी थी ,उसने सारा सामान समेट कर अलमारी मे रख दिया क्योंकि सुमित को अचानक office के काम से बाहर जाना पड़ रहा था , और सीमा के भीतर कुछ था जो दरक गया था ।

शाम की छः बज चूकी है, थोड़ी ही देर मे बच्चे ट्यूशन से आते होंगे, अब तो उठना ही होगा , अपने आँसू पोंछ कर सीमा रसोई की तरफ चल पड़ी ।खाना बनाते हुए सीमा सोच रही थी जब बात बच्चो की आती है तो हर गम हर दर्द भूल जाते है हम और शायद यही एक कड़ी थी जो मुझे और सुमित को जोडे हुए थी ।

दो प्यारे से बच्चे है, प्यार करने वाले पति है, दुनिया की नजर मे perfect. उपर से सब खुबसूरत दीखता है, खुशहाल परिवार, पैसो की कोई कमी नही, अपनी मर्जी से जीने की आजादी । मेरी कई सहेलियाँ है जो मेरी किस्मत पर रश्क करती है , कहती है कितना प्यार करता है सुमित तुम्हे ।

प्यार करता है? शायद उसकी नजर मे इसे ही प्यार कहते है ,जो अचानक आ उमड़ता है, दिखावा सा लगता है, लोगो के सामने इतनी care करना पर अकेले मे साथ बैठकर दो मीठे बोल भी सुनने को नही मिलते ।जब उदास मन और थके शरीर को उनके गर्म स्पर्श और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है तो वह कभी मिलता ही नही ।और मेरी रूह हमेशा प्यासी ही रह जाती है ।

हो सकता है ये रोमांटिक किस्म के शख्स नही है , पर कभी-कभी तो साथ बैठ कर एक-दूसरे के सुख-दुख बांटने का मन होता है लेकिन यह आस भी ख्वाब ही बन कर रह गई ।अब तो लगता था कि घर की जिम्मेदारी को चुपचाप निभाते जाना ही मेरी जिंदगी है , कि अचानक मेरा सामना मेरे अतीत से हो गया । हर किसी का अतीत होता है, मेरा भी था पर इस तरह अचानक इतने सालो बाद उससे सामना होगा, सोचा नही था।उस दिन अपनी सहेली के साथ माॅल मे शापिंग करते वक्त उसे देखा, किसी महिला के साथ था । पर मै सामने नही पड़ना चाहती थी इसलिए वहा से चले जाना ही उचित लगा ।

फिर कई दिनो तक वह कही नजर नही आया । माॅल मे तो मै उस से छुप रही थी, सामने नही आना चाहती थी पर अब हर गली और कूचे मे उसे ही तलाश करने लगी थी कि कही से बस एक बार उसका दीदार हो जाये ।

शादी से पहले मै और अनिल कॉलेज मे साथ पढ़ते थे ।हम दोनो की शुरू से ही खुब पटती थी । हम बहुत अच्छे दोस्त थे,पर दोस्ती ने कब प्यार का रूप अख्तियार कर लिया पता ही नही चला ।MA करने के बाद मुझ पर शादी करने का दबाव बढने लगा ।मैंने बड़ी हिम्मत करके अपने घर वालो को बताया, फिर तो जैसे घर मे कोहराम ही मच गया । मेरा घर से निकलना बंद कर दिया गया और मेरे लिए अच्छे रिश्ते की तलाश होने लगी ।फिर एक दिन सुमित का रिश्ता आया, जयपुर मे रहने वाला सुमित न केवल दिखने मे अच्छा था बल्कि एक MNC मे मैनेजर भी था । बस फिर क्या था मम्मा -पापा ने अपनी इज्जत का हवाला देकर मुझसे हाँ करवा ली,कुछ ही महीनों मे मेरी शादी हो गई और मै miss seema से Mrs. Sumit बन गई । यह सब इतना जल्दी मे हुआ कि मुझे कुछ समझने का या समझाने का मौका ही नही मिला ।पर मैने सुमित को अपने अतीत की भनक तक नही लगने दी और अपना सब कुछ सुमित को ही मान लिया । "पहले प्यार की यादो को मिटाना इतना आसान नही होता । पूरानी यादे दलदल की भांति होती है, उनसे बाहर निकलने के लिए हम जितनी कोशिश करते है उतना ही यादो के दलदल मे धंसते चले जाते है । पर फिर भी मैंने कोशिश की पूरी ईमानदारी से अपनी गृहस्थी को बसाने की ।"

शादी के दो-तीन साल तो पंख लगा कर उड़ गए पर धीरे-धीरे मन मे एक खालीपन भरने लगा क्योंकि इनका और मेरा स्वभाव बहुत अलग था । ये पार्टीज और luxury को पसंद करने वाले इंसान और मै साहित्य व पेंटिंग मे रूचि रखने वाली उबाऊ लड़की(सुमित की नजरो मे )।हमारा मन मिलता ही नही था । कभी-कभार साथ बैठकर बात करते तो विचार ही नही मिलते और बात कलह पर आकर खत्म हो जाती ।

रोज -रोज की कलह से बचने के लिए चुप रहना ही बेहतर लगा ।बच्चे छोटे थे तो उन्हे सम्भालने और घर के काम समेटने मे ही वक्त निकल जाता था ।पर बच्चे अब थोड़े बड़े हो गए है और मेरे पास वक्त है, लेकिन उस वक्त को भरने वाला कोई नही, बात करने वाला कोई नही, मेरे मन को समझने वाला कोई नही ।

एक दिन अपनी सहेली के भाई की शादी मे जाना हुआ । सुमित के पास वक्त नही था सो अकेली ही गई ।पर यह क्या आज फिर अनिल से मुलाकात हो गई और इस बार वह ठीक मेरे सामने खड़ा था तो बच के निकलने का कोई रास्ता ही नही बचा था ।

अनिल मेरे पास आया और बोला, "हाय सीमा! कैसी हो? "

मुझे समझ नही आया कैसे react करू? मैंने हाय बोला तो उसने थोड़ी दूर खड़ी अपनी बीवी को बुलाया और मुझसे रूबरू करवाया । कुछ देर तक इधर-उधर की बाते हुई पर मुझे पता नही क्यो असहज लग रहा था तो मै वहा रूक नही पाई और अपने घर आ गई ।

वह बहुत उदास हो गई , कुछ था जो अन्दर ही अन्दर उसे कचोट रहा था, क्या था पता नही? समझ नही आ रहा था की मूझे बूरा क्यों लगा? वह विवाहित है इसलिए? पर वह कब तक मेरे गम मे आंसू बहाता रहता? उसे भी अपनी जिंदगी नए सिरे से जीने का हक है ।

आज न चाहते हुए भी अनिल से यह छोटी सी मुलाकात फिर से उसे उन यादो के समंदर मे डूबने को मजबूर कर रही थी ।आज फिर वही दृश्य उसकी आँखो के सामने चलचित्र की भांति घुमने लगा, "कितना खुबसूरत है यह मौसम ।बारिश की छोटी-छोटी बूंदे, माटी की सौंधी सी खुश्बू और हवा मे यह सरगोशी । कब आएगा अनिल? रोज तो इस वक़्त तक पहुंच जाता है, अब और कितनी देर लगाएगा? "

आज तो बोल ही दूंगी उसे । हमेशा सोचती हू कह दू अपने दिल की बात पर कभी हिम्मत नही कर पाती । जब भी कुछ कहने की कोशिश करती हू दिमाग अनेक सवालो के घोड़े दौड़ाने लगता है ," क्या कर रही हो सीमा? तू लड़की होकर पहल कैसे कर सकती है? "

"अगर उसने मना कर दिया और दोस्ती भी नही बची तो?"पर आज तो कह ही दूंगी अब औरऔर इंतजार नही होता ।उसके दिल का पता नही, पर अपने दिल का हाल तो सुना ही दूंगी ।फिर देखते है क्या अंजाम होता है मेरे इश्क का? "

"अरे सीमा कहा खोई हुई हो? "अनिल ने सीमा के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा ।सीमा आश्चर्य मिश्रित मुस्कुराहट से अनिल को देखने लगी ।

"अरे तुम कब आए?"

"मै तो कब से खड़ा हू तुम्हारे पास, पर पता नही तुम किन ख्यालो मे गुम हो? "अनिल ने शरारती मुस्कान बिखेरते हुए पूछा ।

"अनिल मै कुछ कहना चाहती हू क्या तुम सुनोगे ? "

अनिल, " मैने तो कब से सुन लिया, वह जो तुमने कहा ही नही ।"

सीमा ने अनिल को आश्चर्य से देखा ।अनिल ने धीरे से सीमा का हाथ पकड़ा और कहा, "इश्क की कोई जुबान नही होती है सीमा तुम्हे कुछ कहने की जरूरत नही है क्योंकि जो काम अहसास कर सकता है वह अल्फाज नही कर पाते और जो हाल तुम्हारा है वही हाल मेरा भी है ।"

कितनी समझ थी हम दोनो के रिश्ते मे, ऐसी कितनी ही बाते थी जो मै और अनिल बिन कहे ही समझ जाते थे ।पर सुमित कही हुई बात ही नही समझ पाते तो बिना कहे क्या समझेंगे? सीमा की आँखे नम हो गई ।

कुछ दिनो बाद अनिल ने सीमा को call किया और उससे मिलने की इच्छा जताई ।उसने कहा वह कोई शिकवा शिकायत नही करना चाहता बस अपना दिल हल्का करना चाहता है एक दोस्त की तरह ।

एक बार तो सीमा का मन गुदगुदा गया ,"अनिल मुझसे मिलना चाहता है, मुझसे अपने दिल की बात करना चाहता है? क्या है उसके दिल मे? क्या कहना चाहता है? क्या वह आज भी मुझसे ...?पर वह तो शादीशुदा है, तो क्या वह भी खुश नही है अपने वैवाहिक जीवन से? "सोचते -सोचते सीमा की नजर सामने दीवार पर लगी family photo पर जाकर टिक गई । कितने खुश दीख रहे है हम चारो इस photo मे ।यह शायद आखरी बार ही था जब सुमित हमे नैनीताल लेकर गये थे तभी का photo है। पर समय हमेशा एक सा नही रहता । कभी खुशी तो कभी गम कभी अच्छा तो कभी बुरा ।भले ही शादी मर्जी से नही हुई पर धीरे-धीरे ही सही सुमित ने मेरे दिल मे जगह बना ही ली थी ।पहला ना सही दूसरा प्यार तो था ही सुमित मेरा ।वह शायद ऐसा ही है, उसे शायद और तरीका नही पता प्यार जताने का और प्रोब्लम सुमित मे नही मुझ मे ही है ।अगर आज अनिल की बात मानकर कुछ पल की खुशी पा भी लुंगी तो किस कीमत पर ।एक औरत होकर दूसरी औरत के दर्द का कारण नही बनना मुझे ।

शायद मुझे ही जरूरत है प्यार के इस भंवर से निकलने की ।प्यार का क्या है, यह एक अहसास है या शायद कोरी कल्पना मात्र जो हम स्वयं अपने मन मे करते है ।जरूरी तो नही की हकीकत वैसी ही हो और क्या प्यार के बिना मेरा अपना कोई अस्तित्व नही?

क्या हू मै? Mrs.sumit, या अपने बच्चो की माँ?लेकिन सीमा कौन है? क्या है मेरी अपनी पहचान? क्या प्यार के बीना मै पूरी नही? और प्यार करना ही है तो क्यो न अपनेआप से ही करू ।अपनी धूमिल हो चूकी इचछाओ और सपनो से गर्त की वो चादर हटाऊ , ताकि स्पष्ट हो सके कि जिदंगी को झेलना है या जीना है?

जीना चाहती हू मै ।पंख खोल कर उड़ना चाहती हू मै । बहुत भंवर देख लिए जिदंगी के लेकिन अब एक भंवर से निकलकर दूसरे भंवर फंसना नही चाहती मै तभी सीमा के phone की ring बजी, अनिल का call था लेकिन सीमा ने phone नही उठाया क्योंकि वह अब समझ चूकी थी की प्यार करना है तो खुद से करो, किसी और से उम्मीद मत रखो और अपनी एक पहचान कायम करो ताकि अगर जिंदगी मे कोई भंवर आ भी जाए तो हमारा अस्तित्व खतरे मे न पड़े ।वह उठ खड़ी हुई और अलमारी मे धुल से भरी अपनी पुरानी painting की फाइल को निकाला और उस पर से धूल साफ करने लगी अपनी एक नई पहचान कायम करने के लिए ।

धन्यवाद!

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