बहुत कम ऐसा होता है कि कोई फिल्मी गीत किसी नायिका के नाम के साथ चस्पां हो जाए । ऐसा ही हुआ आज से पच्चीस साल पहले रिलीज एक फिल्म बेटा की नायिका माधुरी दीक्षित के साथ । उस फिल्म के एक गाने के बोल धक धक करने लगा से माधुरी दीक्षित को एक नया नाम मिला था धक धक गर्ल । समीर के लिखे इस गीत को माधुरी दीक्षित ने अपनी नृत्यकला से अमर कर दिया । उनकी सेंसुअस अदा को जिस तरह से फिल्माया गया है वो दर्शकों के दिलो दिमाग पर छा जाता है । गाने के दौरान लाइटिंग का बेहतरीन इस्तेमाल पूरे माहौल को मादक बना देता है । माधुरी दीक्षित के स्टेप्स और उनके मूवमेंट इस गाने को मादकता की उस ऊंचाई पर ले जाते हैं जहां उनके चेहरे पर आने वाले भाव गाने के बोल के साथ मिलकर एक नए किस्म की प्रभावोदत्पकता पैदा करते हैं । लता मंगेशकर ने एक बार कहा था कि माधुरी दीक्षित की नृत्यकला को देखकर उनको वहीदा रहमान की याद आती है क्योंकि माधुरी उनकी ही तरह की समर्थ नृत्यांगना हैं । सिर्फ लता मंगेशकर ने ही नहीं बल्कि शबाना आजामी ने भी कुछ दिनों पहले ट्वीट करके कहा था कि एक बार फिर से धक-धक देखा । माधुरी की सेंसुअस अदा बगैर फूहड़ हुए मन मोह लेती है । दरअसल इस गाने में माधुरी ने जिस तरह नृत्य के दौरान मादकता को संभाला है और उसको जुगुप्साजनक होने से बचाया है यह उनकी बेहतरीन ट्रेनिंग का ही कमाल है ।

फिल्म बेटा के इस गाने के बनने की भी दिलचस्प कहानी है । धक धक करने लगा, हो मोरा जीयरा डरने लगा/ सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियां तोड़ ना ये इस गीत का मुखड़ा है । इसके पहले जिस तरह से गायिका अनुराधा पौडवाल अंग्रेजी के शब्द आउच बोलती हैं और उसके बाद गहरी सांस का साउंड इफेक्ट डाला जाता है और उसपर माधुरी का बॉडी मूवमेंट इस गाने को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है । जब ये गीत लिखा गया था तब इसकी शुरुआत आउच से नहीं होती थी लेकिन जब इसको कंपोज किया जा रहा था तो अचानक से गायिका अनुराधा पौडवाल ने संगीतकार आनंद-मिलिंद को ये सुझाव दिया जिसे रिकार्ड करने के बाद मान लिया गया और समीर ने भी इसपर कोई आपत्ति नहीं जताई । इस आउच से श्रोताओं को शुरुआत से ही ये गाना बांध लेता है ।

किसी भी गाने की सफलता के पीछे उसके बोल और नायिका की अदा तो रहती ही है लेकिन इनके बराबर अहमियत होती है उसके धुनों की । बेटा फिल्म के इस गाने की धुन मशहूर संगीत चित्रगुप्त के बेटों आनंद और मिलिंद ने बनाई थी । ये आनंद मिलिंद वही हैं जिन्होंने मंसूर खान की सुपरहिट फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के सुपरहिट गीत ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’ का संगीत दिया था । इस दौर में आनंद मिलिंद ने कई प्रयोग किए थे । ‘कयामत से कयामत तक’ के एक गाने ‘काहे सताए, काहे को रुलाए, राम करे तुझको नींद ना आए में’ स्वरलहरी और ताल का ऐसा संगम पेश किया था जो उस वक्त के शोर शराबे वाली धुनों के बीच एकदम ताजा हवा के झौंके की तरह आया था । इसके बाद जब ‘बेटा’ फिल्म के गानों को उन्होंने अपने धुनों से सहेजा तो उनकी गिनती चोटी के संगीतकार में होने लगी । आनंद मिलिंद की सबसे बड़ी खूबी ये थी वो इस समय तक अपनी स्वरलहरी को बरकरार रखने में कामयाब रहे थे । बाद में वो जब डेविड धवन की फिल्मों में धुन बनाने लगे तो स्वरलहरी का सिरा उनके हाथ से छूटता चला गया । हलांकि बाद की एकाध फिल्मों जैसे अमोल पालेकर की ‘दायरा’ में बेहतर संगीत दिया लेकिन तबतक उनपर से ध्यान हट चुका था ।


‘बेटा’ फिल्म के निर्देशक इंदर कुमार चाहते थे कि इस फिल्म में एक ऐसा सेंसुअस गाना हो जो कि चार पांच साल पहले आई श्रीदेवी अनिल कपूर की फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के गाने ‘काटे नहीं कटते ये रात दिन’ जैसा हो और इस गाने की वजह से दर्शक सिनेमा हॉल तक खिंचे चले आएं । इंदर कुमार ने अपनी इच्छा से सिर्फ गीतकार समीर को ही अवगत नहीं करवाया बल्कि उन्होंने इसके बीट्स कैसे हों इस बारे में आनंद मिलिंद से भी लंबी चर्चा की । आनंद मिलिंद के साथ बैठकर कई बीट्स सुने और इंदर कुमार ने उनको लोकधुनों समेत दक्षिण की कई फिल्मों के बीट्स सुनाए और कहा कि ऐसी धुन बनाओ जिसमें मेलोडी को कायम रखते हुए बीट्स और झंकार श्रोताओ को झंकृत कर सकें । इंदर कुमार की इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए समीर ने गीत लिखा, आनंद मिलिंद ने धुन बनाई और जब तैयारी हो गई तो फिर अनुराधा पौडवाल और उदित नारायण ने इसको अपनी आवाज दे दी । यह सब होने के बावजूद एक बड़ी समस्या आकर खड़ी हो गई जब ये पता चला कि ना तो फिल्म के नायक अनिल कपूर के पास डेट्स है और ना ही माधुरी के पास । निर्देशक इंदर कुमार ने परेशानी में दोनों को फोन कर ये आग्रह किया कि एक बार गाना सुन लें । अनिल कपूर और माधुरी ने जब गाना सुना तो दोनों इसको फिल्माने के लिए तैयार हो गए । रात में इस गाने को शूट किया गया और रिलीज के चंद दिनों पहले इसको फिल्म में जोड़ा गया । इंदर कुमार ने जब ये जोखिम उठाया था तब उनको भी शायद ही इस बात का अंदाज रहा होगा कि ये गाना इतना हिट होगा । अंदाजा तो माधुरी दीक्षित को भी नहीं रहा होगा कि जिस गाने के लिए उसके पास वक्त नहीं था वही गाना उनकी पहचान बन जाएगा । नया नाम दे जाएगा । अब भी माधुरी किसी शो में जाती हैं तो उनसे इस गाने की फरमाइश जरूर की जाती है । सही कहा गया है कि इतिहास बताकर नहीं बनता वो अनायस ही बन जाता है । ‘धक-धक करने लगा’ इस बात की तस्दीक करता है ।

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