मन के तार

बारिश की बूंदो ने आज मन के तार छेङे है आ जाओ साजन मेरे हम तो यहाँ अकेले है सावन के मौसम में बादल छाये घनेरे है आ जाओ साजन मेरे हम तो यहाँ अकेले है मदमस्त करती हवायें ये महकाती फिजाऐं ये धङकन बढाके दिल की सपने दिखाती तेरे है आ जाओं साजन मेरे हम तो यहाँ अकेले है बहुत हो चुका अब यूं रहना बैरी सावन का क्या कहना कांपती सी इस रुहं की तङपन दिल को घेरे है आ जाओ साजन मेरे हम तो यहाँ अकेले है ।

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