युग्म तारा

युग्म तारा

इस साल मौसम कैसा रहेगा धान की खेती करें, या न करें, कैसे पता चलेगा? अरे यार, आप भी रहे बुदधू राम. चलो रामू के घर ,उसके घर पर एक रेडियो जैसी मशीन है, २००-३०० साल पुरानी वो मौसम का हाल बताती है.

पाठक आप सोच रहे होंगे आज से करीब २००-३०० साल पहले रेडियो का आविष्कार भी नहीं था, तो इस कहानी में ऐसी बातें क्यों हो रही है.

ये एक मार्मिक प्रेम कहानी है .

आज से करीब ३०० साल पहले इनके घर में रवि का जन्म हुआ था, उसे बचपन से ही खुले आसमान के तारों को निहारने का शौक था .

जैसे जैसे वो बड़ा हुआ उसका ये लगाव बढ़ता चला गया. शाम होते ही वो अपने आँगन में बैठ जाता और तारों को अपलक घंटो निहारता रहता. घर वाले सोचने लगे कि ये कहीं विक्षिप्त तो नहीं हो गया है. कोई कुछ भी नहीं बोलता था उस से.

रवि अब १६ साल का हो गया था, घर वाले उसकी शादी की बात करने लगे. पर उस ने शादी के विषय पर अपनी कोई रूचि नहीं दिखाई, घर वाले आश्चर्य चकित थे आखिर क्या बात है ?

वैद्य हकीम के पास ले गए . वैद्य ने शक्तिवर्धक दवाइयां दी . ओझा गुणी के पास ले गए. उस ने कहा इस पर किसी प्रेत का साया. झाड़ फूंक करनी होगी, तदोपरांत ठीक हो जायेगा.

दवाइयां चलने लगी.

प्रेत निवारक पूजा हुई.

परिणाम शून्य

घरवाले परेशान, हैरान.

एक सुबह घरवालों की नींद खुली तो रवि गायब था. घर वालों को काटो तो खून नहीं.

जितनी मुंह उतनी हीं बातें.

खोज बीन चलती रही. कोई सुराग नहीं मिला.

कोई कहता साधू बन गया, कोई कहता भरथरी बन गया वो आएगा सारंगी बजाते हुए और भिक्षा ले जाएगा अपनी मां से. ऐसा कुछ नहीं हुआ. कुछ महीने बीत गए. उसकी कोई खबर कहीं से नहीं आयी. माँ की आँखों से आंसू सुखाने का नाम नहीं ले रहे थे. जीवन तो चलता रहा है. रवि एक पहेली बन गए थे जिसको सुलझाना हर कोई चाहते थे पर इसके किसी भी ओर छोर का कोई पता नहीं चल रहा था.

माँ की आँखे तो आंसूओं का समन्दर होती है जो सूखती ही नहीं. माँ अब रोते रोते अपनी दृष्टि खो चुकी थी पर रवि अब भी कोई अता पता न था.

धरती से लाखों प्रकाश वर्ष दूर

देवताओं ने एक सभा बुलायी थी वहाँ चर्चा का विषय था . देव लोक में मानव का अतिक्रमण.

देवता अपनी संस्कृति सभ्यता को लेकर अति सजग थे. उनके विचार से मानव एक तुच्छ प्राणी है जो उनके टुकड़ों पर पलता है और मानव देवताओं को खुश करने के लिए यज्ञ करता है.

अस्तु, देवता और मानव के बीच किसी भी प्रकार का रक्त संबंध, पारिवारिक संबंध इत्यादि स्थापित नहीं होना चाहिए.

देव लोक के मुखिया को अपने गुप्तचरों से पता चला था कि धरती से कुछ रेडियो सन्देश आ रहे है देवलोक के लिए .

विशेषज्ञ बुलाये गए, उन रेडियो सन्देश को पढने के लिए , पर वो रेडियो सन्देश को समझ नहीं पाए, क्योंकि वो सन्देश कूट भाषा में थी.

रवि निकल चुके थे अनंत यात्रा पर जैसे जैसे वो लक्ष्य के पास पहुँच रहे थे उनकी खुशी बढ़ते जा रही थी. उनके दिल की धड़कन बढ़ते ही जा रही थी. कई वर्षों से ये यात्रा जो चल रही थी.

किसी अदृश्य अनहोनी की आशंका के कारण देव लोक में एक सभा बुलायी गयी थी. गुप्तचरों से ज्ञात हुआ था कि कोई अज्ञात प्राणी और पिंड देवलोक की तरफ तीव्र वेग से आ रहा है.

सब को चौकस रहने की हिदायत दी गयी थी और ये बात देवलोक के प्रजा को पता नहीं चलनी चाहिए थी ऐसा भी आदेश था.

अचानक एक दिन देवलोक के राजा के घर में क्रंदन की आवाज सुनायी दी और ये देवलोक के राजकुमारी के माता की आवाज थी. देवलोक के राजा ने इस बात को दवा दी. देवलोक के राजा के प्रांगण में कुछ हुआ ही नहीं ऐसा सब को लगा.

रानी अपनी बेटी के गायब होने के कारण रो रही थी, पर अबला की आवाज को कौन सुनता है शायद उसे अपनी बेटी के गायब होने पर रोने का भी हक नहीं है.

सब कुछ सामान्य था देव लोक में , अब कोई रेडियो सन्देश नहीं आ रहे थे, अब रक्त शुद्धि की कोई चिंता नहीं थी.

देव लोक के गुप्तचरों को समानित किया गया था.

आसमान में दो नए तारों का जनम हो चुका था. धरती के ऋषि सातवान जी ने रवि के माता को बताया इन दो नए तारों में एक आप का बेटा भी है .

उनकी माता और गांववासी समझ नहीं पाए तो ऋषि सातवान जी ने विस्तार से बताया.

आप के पुत्र रवि को , देवलोक के राजा की पुत्री, राजकुमारी उर्वाली से प्रेम हो गया था.

उर्वाली भी उनसे बेपनाह मुहब्बत करती थी. एक दिन उर्वाली ने रेडियो सन्देश भेजा के रवि तुम आ जाओ देव लोक में हम परिणय सूत्र में बंध जायेंगे और एक नए युग की शुरुआत करेंगे.

उर्वाली ने अपना वाहन – विमान भेज दिया आने के लिए. रवि बैठ कर चल दिए देव लोक की और. पल पल की खबर मिल रही थी उर्वाली को रवि को आने की, वो फूली नहीं समां रही थी.

जब ये विमान देवलोक के पास था, तो देवलोक के गुप्तचरों ने रवि को पकड़ लिया और देव लोक के रजा के साथ विचार विमर्श करने के बाद उर्वाली और रवि को शुन्य में फ़ेंक दिया गया जेहान से न वो देवलोक जा सकते थे , ना ही मृत्युलोक,

अब वो आसमान में युग्म तारा बन गए है और देवलोक और मृत्युलोक का चक्कर लगा रहे है.

रवि दूर आसमान में तारा बन कर घूम रहे है और जिस रेडियो यन्त्र से वो उर्वाली को सन्देश भेजते थे उस से आप सब को अनादि काल तक मौसम का हाल भेजते रहेंगे, जिस कुछ तो माँ का कर्ज लौटा पायें.

देवलोक के राजा ने उनको सजा दी थी – क्योंकि उनका पाप अक्षम्य था. एक मृत्युलोक का युवा, देवलोक की राजकुमारी से प्रेम नहीं कर सकता है. वो युग्म तारा बन कर घुमते रहेंगे, जिस से अन्य युवा इस तरह का दुस्साहस न करें.

पर ये क्या..... आज के युवा, इसी युग्म तारे की कशमें खाने लगें है और समाज ऑनर किलिंग करने लगा है.

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