आधी रात का नाम आते ही सबके दिमाग में भूतिया विचार घूमने लगते हैं | लोग अन्दर ही अन्दर अरे राम!! हाय!!! अल्ला अरे बाप रे!!!! कह जाते हैं | क्या वास्तव में आधी रात डरावनी होती है कहानियों की तरह , किस्सों की तरह या फिर ये महज़ एक कोरी गप्प उड़ा रखी है लोगों ने समाज ने और समाज के ठेकेदारों ने | ये कहानी रमेश की है जो बहुत कुछ बताती है |

रमेश आज खून से लतपथ हांफता हुआ चला आ रहा था | जल्दी जल्दी में बंगले का दरवाजा बंद करना भूल गया था | लाश घसीटते घसीटते अब हालत ऐसी हो चली थी कि बस कोई भी आये आसमान से या धरती से बस एक गिलास पानी पिलाकर फुर्र हो जाय |

पर ऐसा तो सपनो में ही होता है ये सोचकर वह मन मसोसकर रह गया था , लाश को ठिकाने लगाने के बाद आराम से पानी पिएगा |

लाश इतनी भारी कि पूरा जोर लगाना पड़ रहा था उसे,अब सेठ को लूटा था तो कसरत तो थोड़ी होनी ही थी | जैसे तैसे वह गाड़ी तक खींच कर लाया और इधर उधर देखने लगा कि हॉर्न बजाते हुए एक गाड़ी कोने से सन्न से निकल गयी | पीछे से उसने देखा तो एम्बुलेंस की गाड़ी थी |

उसकी जान में जान आयी | पुलिस की गाड़ी से वह बच गया | वह हल्का सा घबड़ा हुआ था | आनन् फानन में गाड़ी के डिक्की में उसने लाश को चुपके से रख दिया और फ़ौरन आगे की सीट पर आकर बैठ गया | बैठा ही था कि उसे याद आया अरे !! वह तो अपने पैरों के निशान छोड़ आया है और दरवाज़ा भी खुला छूट गया है |

अजीब सी बेचैनी उसे होने लगी थी जेब में हाथ डाला तो एक सिगरेट पड़ी मिल गयी अब मन में यही सोच रहा था कि लाइटर ढूंढें या गाड़ी से उतरकर अपने निशाँ मिटाए और बंगले का दरवाज़ा बंद करे | असल में ये उसका पहला काम था जो उसने अपने बॉस के कह्ने पर किया था अच्छी खासी रकम मिलने की उसे उम्मीद थी | वह पेशेवर नहीं था तो थोड़ी घबराहट होना स्वाभाविक था|

एक सिगरेट का कश मारते ही उसकी जान में जान आयी और एक गन्दा कपडा उठाया और गाड़ी से उतरकर अपने निशान साफ़ किये और बंगलो का दरवाज़ा बाहर से बंद किया |

और झटपट किसी शातिर की नज़रों से बचते हुए गाड़ी में आकर बैठ गया गाड़ी स्टार्ट करते ही उसे लगा कि उसके कन्धों पर दो हाथ पीछेवाली सीट से आ पड़े | लाश बाहर कैसे आ गयी, अब असली डर का खेल शुरु हो चुका था |

पहले सेकंड में दूसरा गियर, तीसरे सेकंड में तीसरा गियर और फिर चौथा , मिनटों में गाड़ी को उड़ा के रख दिया रमेश ने , डर किस बला का नाम है उसे पता चल रहा था पर वह यह नहीं सोच पा रहा था कि लाश जो उसने डिक्की में रखी है ये वही है या कोई और नयी लाश या भूत या फिर कोई जिन्न , पिशाच या कोई ................. चुड़ैल ........ तरह - तरह के विचार उसके दिमाग में आने लगे थे वह घबडाने लगा और उसने याद करना शुरु कर दिया था कि गाड़ी से उतरते समय उसने लाश पीछे डिक्की में रखी थी या गाड़ी के पिछली सीट पर , पर वह याद नहीं कर पा रहा था | उसे डर और घबराहट के मारे कुछ सूझ ही नहीं रहा था |

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