मन के कोने सजे प्यार को
कब तक पढ़ पाओगे तुम।

प्रेम संवेदनाओ को समझोगे
या मन में घुटते रह जाओगे तुम।

दर्द की नदियां बहती अंदर
कब तलक बाँध बनाओगे तुम।

याद के खंडहर बिखरे मन में
उन से कब बाहर आओगे तुम।

इंतजार में युग बीत चुका है
कब मन से अपनाओगे तुम ।

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