सुदीप उससे किसी शादी मे मिला था बहुत ही चंचल थी वो और पहली नज़र में ही उन दोनों को प्यार हो गया था। आज से एक साल पहले की बात है जब पहली बार सुदीप स्वाती से मिला था और उस पहली मुलाकात में ही सुदीप को स्वाति से प्यार हो गया था पर चूँकि शादी के दूसरे दिन ही स्वाति वापस चली गई थी तो सुदीप की स्वाती से कोई बात नही हो पाई थी इसलिए सुदीप को अपने दिल की बात दिल में ही दबानी पडी । सुदीप अपने घर तो वापस आ गया पर वो स्वाती को नही भूला सका /


इसे किस्मत कहें या बदकिस्मती एक दिन स्वाति के फूफा जोकि सुदीप के भईया (मामा के लड़के ) लगते थे ने सुदीप की शादी स्वाति से करने के लिए सुदीप के माता पिता से बोला। सुदीप को उसके माता पिता ने इस बारे मे कुछ नही बताया ।


ऐसे मे एक दिन अचानक सुदीप के फोन पर उसकी भाभी की मिस कॉल आती है पहले तो सुदीप को अजीब लगता है क्योंकि आज से पहले कभी उनकी मिस कॉल नहीं आई थी फिर भी सुदीप ने सोचा कि हो सकता है भाभी के मोबाइल मे बैलेन्स ना हो और कोई जरूरी बात करनी हो इसलिए सुदीप ने बैक काल किया । उधर से किसी लड़की ने काल उठाया था मगर वो सुदीप की भाभी नहीं थी वो यह अच्छी तरह से समझ गया था और उसने अंदाजा लगाया और बोला,

" तुम नेहा बोल रही हो ना "

उधर से जवाब हाँ ही था। सुदीप थोड़ा खुश हुआ था चलो बात तो हुई। स्वाति का घर का नाम नेहा था। उस दिन सुदीप की नेहा से बहुत ज्यादा बात नही हुई उस दिन । सुदीप ने जब नेहा से पूँछा कि उसने क्यूँ मिस कॉल की तो उसने बहाना बनाया कि वह अपने घर पर काल कर रही थी तो आपका गलती से लग गया। जबकि सुदीप अच्छे से जानता था कि स्वाति ने जानबूझकर काल की है। पर तब भी सुदीप नहीं समझ पाया था की अचानक नेहा उस ऐसे कॉल क्यों किया ? हुआ यूँ था की सुदीप की शादी स्वाति से करने की बात करने के बाद उसके भैया वापस चले गए तो उन दिनों स्वाति भैया के ही घर आई हुई थी तो शायद भैया ने स्वाति से सुदीप के बारे में बात की होगी तभी स्वाति ने सुदीप को कॉल किया / और ये सारी बात सुदीप तब समझ पाया जब वो अपने घर गया /


एक हफ्ते बाद जब सुदीप घर गया तब उसकी माँ ने बताया कि भईया ने स्वाति से उसकी शादी की बात के लिए कह रहे थे । सुदीप ने चुपचाप अपनी हामी भर दी । क्योंकि सुदीप को तो स्वाति पसंद ही थी। पर किसी वजह से स्वाति के घर वाले तैयार नहीं हुए। इस वजह उन दोनों की शादी की बात तो वहीं खत्म हो जाती है । पर स्वाति और सुदीप की कहानी यहाँ खत्म नहीं होती।


दो चार महीने गुजर चुके थे और सुदीप लगभग स्वाति को भूल चुका था कि अचानक एक दिन किसी नये नम्बर से सुदीप के फोन पर मेसेज आना शुरू हो गये । सुदीप ने मेसेज कर के जब पूँछा तो तो उधर से कोई सही उत्तर नहीं मिला बस मेसेज आते रहे । सुदीप ने काल भी की उस नम्बर पर तो या तो काल रिसीव नही हुई और अगर रिसीव हुई तो उधर से कोई आवाज नहीं आई। पूरा एक दिन उस नम्बर से मेसेज और मिस कॉल आती रही पर काल बैक करने पर उधर से कोई आवाज नहीं आती। पर सुदीप को आखिर में पता चल ही गया की उस नये नम्बर से कोई और नही बल्कि नेहा यानिकी स्वाति ही है ।


हुआ यूँ कि उस नम्बर से जो मेसेज आ रहे थे उनमे से किसी एक मेसेज मे नेहा दीदी लिखा हुआ था शायद किसी लड़की मतलब उसकी छोटी बहन ने उसको मेसेज किया था वही नेहा ने हमे भेज दिया था। खैर सुदीप जान चुका था कि वो नेहा ही है बस उसे कबूल करवाना था कि वो नेहा है। सुदीप ने अब बात चीत करना शुरू किया।


सुदीप- हेलो मैं जानता हूँ आप कौन हो ।

नेहा- हेलो हाँ तो कौन हूँ मैं ?

सुदीप- आप नेहा हो ना ।

नेहा- नहीं मैं नेहा नही हूँ आप कौन ?

सुदीप- पहले आप बतायें आप कौन हैं? आप ही मेसेज कर रहे है हमे कल से ।

नेहा- सारी गलती से कर दिया मुझे लगा मेरी किसी दोस्त का नम्बर है। मै नेहा नही हूँ । मै श्वेता हूँ ।

सुदीप- ओके कोई बात नही ।


ऐसे ही काफी देर तक नोंक झोंक चलती रही। सुदीप अगर मेसेज करना बन्द भी कर देता तो उधर से नेहा का मेसेज या मिस कॉल आ जाता । काफी देर तक परेशान करने के बाद नेहा ने मान लिया कि वो ही स्वाति उर्फ नेहा वही है । सुदीप की खुशी का तो ठिकाना नहीं रहा। वो उस दिन बहुत ही ज्यादा खुश था । इतना तो वो समझ गया था कि नेहा के दिल मे सुदीप को लेकर कुछ तो है। आखिरकार सुदीप ने अब आगे बात करनी शुरू की ।


सुदीप ने आखिर नेहा से पूँछ ही लिया कि उन दोनों की शादी को लेकर उसके घर मे क्या बात हुई। नेहा ने बताया कि उसकी शादी कानपुर में ही हो बस यही उसके घर वाले चाहते हैं। सुदीप को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो नेहा से आगे बात करे या ना करे।


सुदीप ने नेहा से फिर पूँछा की उसने उसे काल और मेसेज कर के इतना परेशान क्यों किया। नेहा ने बताया कि उसकी दोस्त का मोबाइल है और वो उसे अपने घर नहीं ले जा सकती है इसलिए उसने मुझे रखने को दिया था तो मैने सोचा चलो किसी को परेशान करते हैं तो मैंने बुआ के मोबाइल से आपका नम्बर निकाला और आपको मेसेज करना शुरू किया।


सुदीप ने फिर पूँछा की मुझे ही क्यों?उसके बाद नेहा ने जो जवाब दिया उसका सुदीप के पास कोई प्रश्न नही बचे पूँछने के लिए ।


नेहा ने बोला कि फिर और किसको करते ।


सुदीप को उसके इस मासूम से जवाब का कोई उत्तर नहीं था ।


सुदीप के मन में बहुत बड़ा अन्तर्द्वन्द चल रहा था दिमाग कह रहा था गलत है और दिल कह रहा था कि सही है। आखिरकार उसने अपनी दिल की सुनी नेहा से बात करना जारी रखा। सुदीप उस प्यार के समंदर मे कूद चुका था जिसका उसे खुद अंदाजा नहीं था कि वो उसमे डूब जायेगा या तैर कर अपनी मंजिल को पा लेगा।


सुदीप और नेहा के बीच अब अक्सर या कहिए जब भी उनको मौका मिलता बात करने लगे। दिन मे फोन पर बात होती तो रात में मेसेज से बात करते थे। सुदीप और नेहा का प्यार अपने परवान पर चढ रहा था। और इस बात की खबर दोनों मे से किसी के भी परिवार को नहीं थी।


सुदीप बेखबर था उस आने वाले तूफान से जो उसकी जिंदगी तबाह कर देने वाला था वो तो नेहा के प्यार में पूरी तरह पागल हो चुका था उसे नेहा के सिवा कुछ न उस समय दिखाई दे रहा था ना सुनाई । उसकी दिन और रात सबकुछ सिर्फ नेहा ही थी।


दो महीने गुजर चुके थे और इन दो महीने मे सुदीप और नेहा ना जाने कितने सपने बुन डाले थे। सुदीप को हमेशा एक डर जरूर सताता था क्योंकि उसे नेहा की तरफ से कभी भी पूरा समर्थन नहीं मिला इस वजह से उसने कई बार नेहा से बात ना करने की कोशिश की पर हर बार वो नेहा के प्यार के आगे हार जाता था।


सुदीप ने सोचा था कि सही समय देख कर भइया से इस बारे मे एक बार बात करेगा । पर कहते है ना किस्मत से ज्यादा और समय से पहले कभी कुछ नहीं मिलता और वो दिन भी आ गया जो सुदीप की जिन्दगी तबाह कर गया।


एक दिन अचानक ही नेहा का फोन बंद हो गया और उसके दो दिन तक उसकी नेहा से कोई बात नही हो पाती सुदीप की हालत तो बिल्कुल पागलो वाली हो गई थी और जिसका डर था वही हुआ। तीसरे दिन जब उसकी नेहा से बात हुई तो उसने जैसे ही सुदीप को बताया कि उसकी शादी तय हो गई है तो सुदीप के पैरों तले जमीन खिसक जाती है वो तो अब पूरी तरह पागल हो चुका था । नेहा दुखी और परेशान जरूर थी पर उसने अपने हाथ पूरी तरह खड़े कर दिए थे। उसने साफ साफ बोल दिया था कि वो अपने परिवार के खिलाफ बिल्कुल नहीं जायेगी चाहे कुछ भी हो जाए सुदीप उसे बार बार अपने प्यार का वास्ता देता और रोता तो नेहा भी तुरन्त रोने लगती थी। सुदीप की तो जैसे दुनिया ही पूरी उजड गई थी।


आखिरकार सुदीप ने बिना नेहा को बताये अपने भईया से सारी बातें बता दी। और वो दिन आखिरी दिन जब उसकी नेहा बात हुई थी। उसके बाद से वो नम्बर हमेशा हमेशा के लिए बन्द हो गया जिस नम्बर से नेहा ने सुदीप से बात करना शुरू किया था। और सुदीप लगभग पागल सा हो गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि नेहा ने ऐसा किया तो क्यूँ किया । कुछ दिन बाद सुदीप के भईया ने बताया कि वह जब उसके घर बात करने गये तो उसने साफ साफ मना कर दिया कि उसने कभी बात नही की।


सुदीप की हालत बिल्कुल काटो तो खून जैसी थी।


सुदीप के मन में बहुत सारे सवाल उठ रहे थे पर जवाब किसी का भी नहीं था। वो सोच रहा था कि आखिर उसकी गलती क्या है? आखिर नेहा ने क्यूँ नहीं स्वीकार किया कि हाँ वो सुदीप से बात करती थी पर उसने सुदीप को बोला था कि वो शादी उसके पापा जहाँ चाहेंगे वहीं करेगी । इतना तो वो कह ही सकती थी। सुदीप आज तक नहीं समझ पाया कि नेहा ने उसके साथ वफा की या बेवफाई ।


वो बेवफा हरगिज ना थी ......

पर वो वफा कर ना सकी.......

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