मुरझाई एक सांझ के तले ,

कुछ अंधियारे से उजियारों में ।


भीगी सी, डबडबायी आँखों से

देख रही इन चाबी तालों को ।


अतीत की उन कड़वी यादो को

तुम्हारे किये उन झूठे वादों को ।


मासूम दिल को मिले घावों को ,

उन सारे दर्द भरे अहसासों को ।


सुना था कभी इस दिल ने ,

दिल के हर जख्म पर ,

समय एक मरहम होता है ।


क्षणों का नही वर्षो का फासला,

गुजर जाएंगी यूँही सदिया कभी

रक्त यूँही बहता रहेगा नैनो से

जब तक बहती ये गंगा रही।


कभी तुमने मेरे संग

दिल की एक डोर बाँधी थी ।

कुछ किये थे वादे झूठे

कुछ दी दर्द की निशानी थी ।


कभी हम मिले थे यही

एक सुरमयी शाम के समय ,

इस नीले अम्बर के नीचे

तुमने मैंने ताला चाबी बाँधी थी ।

भरोसा तुम पर था प्रियतम

प्राणों से भी ज्यादा

सौप दी थी तुमको उस पल

मैंने अपने दिल की चाबी थी ।


मुस्कुराकर तुम बोले थे मुझसे

तुम मेरी चाबी हो प्रियतमा ,

मैं ताला बन गया हूँ तुम्हारा।

एक दूजे के लिए बने हम ,

अधूरा दूजे बिन अस्तित्व हमारा ।


शर्मायी थी मैं कुछ उस रोज

सोचती क्यों आँखे शर्म से नीची की ??

न देख सकी उस सच्चाई को

जो तेरी आँखों की शरारत कहती थी ।

भूल गयी थी मैं उस पल में

तालों की चाबियां और भी होती हैं ।

डुप्लीकेट चाबियां तालो को

असली से ज्यादा अजीज होती है ।


खामोश रही मैं यही सोचकर

हर असली चाबी की किस्मत में,

एक डुप्लीकेट भी होती है ।

समाज ने बन्धन में बाँधा था

हमको जैसे ताला चाबी ।

आज खोल दिया मैंने ये बन्धन

चाबी को ताले से मिली आजादी ।


जानती हूँ तुम ताले हो

चाबी फिर कोई,

असली मिल जायेगी ।

समाज की यही परंपरा

ताले से जो छूटी चाबी ,

धूल में कहीं खो जायेगी ।


अस्तित्व का खोना मंजूर मुझे ,

डुप्लीकेट चाबियों के संग ।

किंतु क्या तब भी मैं अपना

अस्तित्व बचा पाऊंगी?


आत्मा अपनी अब और

न इस ताला चाबी के ,

पिंजरे में रहने दूंगी ।

तोडूंगी इस रिश्ते को ,

खुली हवा में साँसे लुंगी ।


तुम ताले हो होंगी लाख,

डुप्लीकेट चाबियां

चाबी ये तुम्हारी ,

रहेगी सिर्फ तुम्हारी चाबी ।

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.