अस्पताल में सर्वधर्म प्रार्थना कक्ष था,प्रार्थना कक्ष की दीवारों पर बड़े -बड़े जीवंत पोस्टर थे,दुःखी रोमी प्रभु यीशु के क्रॉस के सम्मुख गया और आंखे बंद कर उनकी उपस्थिति को महसूस कर मन ही मन बोला हे प्रभु मेरे पास शब्द नही की मैं आपको धन्यवाद दूँ आज मैं नेकी की राह हूँ तो आपका ही आशीर्वाद है,

मैंने जिंदगी में बहुत बुरे कर्म किये, जब मैं गलत रास्ते पर था,और बदनाम गलियों में मेरा जाना आना था वही मुझे ये नाबालिक लड़की बाला मिली,मेरे बहुत कहने पर डरते और सकुचाती हुई मेरे पास आकर बैठी ,मैंने उससे दोस्ती का हाथ बढ़ाया हम सारी रात बातें करते रहे उसी दौरान उसने बताया कि उसके सौतेले भाई-भाभी ने उसे 10 साल की उम्र में इन दरिदों को बेच दिया था,तभी से अत्याचार सह रही हूँ,उसकी बातें सुन मेरा ज़मीर जगा, उसे बहन कह उसकी रक्षा की कसम खाई, एक दिन उसे वहाँ से आज़ाद करने में सफल हुआ, मैंने भी सच्चाई की राह थाम ली अब मैं मेहनत मजदूरी कर अपनी बहन का पालन पोषण कर रहा था पर उन दरिदों से मिली बीमारी ने उसे मौत के मुँह में ला कर खड़ा दिया है आप मेरे प्राण ले लो पर मेरी बहन बाला पर अपनी कृपा करो. तभी उसको डॉक्टर साहब ने उसे बुला कर कहा-तुमने बाला को इलाज के लिए लाने में बहुत देर कर दी..हाथ जोड़ माफी मांग कर कहा- हम बचा नही पाए तुम्हारी बहन को..वही निढाल हो रोमी निर्जीव सा बैठ गया ।

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