स्त्री जागरण

एक जवान सुंदर स्त्री निर्वस्त्र खड़ी है |उसके घने काले केशों ने उसका चेहरा ढँक रखा है |चेहरे के भाव छिप गए हैं |एक जल्लाद रह-रहकर उसकी पीठ पर कोडा फटकारता है -एक.....दो....तीन |सड़...सड़....सड़ |हर चोट के साथ उसके स्तन थोड़ा ढलते हैं .....थोड़ा और ....और ...फिर उसके घुटनों से आ लगते हैं |अंतत:वह बेजान होकर गिर पड़ती है |

एक चीख के साथ मेरी नींद खुल जाती है ....|मैं जग जाती हूँ |सामने मेज पर पेपरवेट से दबा एक पन्ना फड़फड़ा रहा है |स्त्री जागरण पर लेख लिखते हुए ही मुझे नींद आ गयी थी |

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