रमा अमेरिका से आ रही है। गीता बहुत खुश है।रमा, गीता की मौसी है, जो कई साल पहले अमेरिका जाकर वहां जाकर बस गई थी। मौसी के गले में हार, एक हाथ में घड़ी, ऊपर से चूडिदार..... वाह.....इस चालीस- पैतालीस साल में भी कितनी सुन्दर है।
मौसी रमा ने अपना नाम नहीं बदला। रमावती है। पर सब लोग उन्हें रमा ही बुलाते है।
मम्मी उनके साथ पैदा हुई है ! पर वे बहुत गवांर है। नाम उनका जनार्दनी। पर इस पुराने नाम को गीता ने ही छोटा करके ‘ जानू ’ रख दिया।
जनार्दनी हंसती है। ‘‘ नाम में क्या रखा है बेटी ? मन ही ठीक रहना चाहिए। ’’
‘‘ इसका मतलब तुम अपना नाम ‘मन’ रख लो। अच्छा रहेगा। आधुनिक भी लगेगा। ’’ गीता बोली।
पिता जी के मरने के बाद मां व बेटी में निकटता ज्यादा ही हो गई। इकलौती जान कर जानू गीता पर जान छिड़कती ।
गीता ने साईकोलोजी विषय लेकर एम.ए. किया। भू्रण हत्या,बाल श्रमिकों,महिला उत्पीड़न आदि पर लेख पत्र-पत्रिकाओ के लिए लिखती है।
अक्सर कम्प्यूटर से अमेरिका की अपनी मौसी से चैट करती है।
‘‘ वॉव........कितनी सुन्दर हो मौसी !...........प्रत्यक्ष में आपको देखने की इच्छा होती है। ’’
मौसी कहती ‘‘मुझे तो ये अमेरिका का जीवन बोर लगने लगा है। मैं तो भारत लौटने की सोच रही हूं। ’’
‘‘आ, जाओ मौसी......मजा आ जायेगा। हमारे घर में ही हमारे साथ रह सकती हो। अमेरिका के बारे में मुझे बताती रहना ताकि मुझे लिखने में सहायता मिलेगी। ’’
‘‘गीता, अब तो हमारे से ज्यादा जानकारी भारतीयों को है अमेरिका के बारे में। इन्टरनेट पर जाकर कितने कितने इन्फारमेशन मालुम करते हैं। उनके साथ चित्र भी होते है।...... ’’
‘‘ फिर भी मौसी प्रत्यक्ष देखने की बात तो और ही है। और उसका आनन्द तो अलग ही है ना ? ’’
‘‘तुम तो अमेरिका ही आ जाओ.........मैं किसी यूनिवर्सिटी में प्रवेश दिला दूंगी। मैं तो अमेरिका की सिटिजन हूं। सो मैं......तुम्हें स्पांसर कर सकती हूं।’’
‘‘इच्छा तो होती है मौसी, पर मम्मी मुझे नहीं छोडेंगी। मुझे तो एम.ए. करने के लिए भी लोकल कालेज में ही प्रवेश दिलाया। अपने ही देश भारत दूसरे शहर के बढ़िया कालेज जाने को भी मना कर दिया। मम्मी को मेरा वियोग पसंद नहीं है। मम्मी तो बहुत पुराने ख्यालों की भी हैं। ’’
‘‘ ऐसा करो एक अमेरिकन दामाद तुम्हारे लिए मम्मी को ढुंढ़ने के लिए बोलो। तुम्हारे साथ ही जनार्दनी भी.......’’
साथ में खड़े होकर इस संम्भाषण को कम्प्यूटर में देख रहीं है जनार्दनी।
‘‘ अरी !...........केमरा आन कर......मैंक आन कर.............रमा को मैं ड़ॉट लगाती हूं। टाइप करने को तो मेरे पास टाइम नहीं है। खुद तो सब को छोड़ कर अमेरिका जाकर बैठ गई, तो अब तुझे भी ले जाने की योजना बना रही है क्या ? ’’ जानू बोली।
ऐसी वही मौसी आज आ रही हैं। उन्हें लेने गीता टैक्सी लेकर एयर पोर्ट रवाना होने लगी तो उसकी मां भी साथ में बैठ गई। मां को आश्चर्य से देखा गीता ने।
हमेशा मंदिर के सिवाय कहीं न जाने वाली मां बुलाने पर भी कहती ‘‘ तुम ही जाओ गीता.......मुझे घर पर बहुत काम है। ’’वह मां है क्या यें ? फिर उसने सोचा कुछ भी हो बहन आ रही है ! बहुत सालो बाद मिलना हो रहा है ! मिलने की इच्छा नहीं होगी क्या ?
‘‘ क्यों मम्मी तुम भी आ रही हो ? ’’
‘‘ हां क्यों कि रमा तुम्हें पहचान सकेगी कि नहीं ? ’’
‘‘क्यों नहीं पहचान सकेगी ? कम्प्यूटर में देखते तो हैं ! ठीक है........अब बहन को तुरन्त देखने की इच्छा है ऐसा बोलो ना.....’’
एयरपोर्ट में कई देर इन्तजार करने के बाद फ्लाइट आई।
मौसी रमा वाह.......फोटो में देखने से भी ज्यादा खूबसूरत, युवा व सुन्दर दीख रहीं हैं। मौसी हमारे पास आई तो उनकी आंखें भीगी हुई थीं।
घर आते ही मौसी ने उपहारों का अंबार लगा दिया। गीता के लिए बहुत सारे कास्मेटिक सामान, लेपटाप,डिजिटल केमरा , अति आधुनिक मोबाइल आदि-आदि। मम्मी के लिए किचन के आइटम्स। मम्मी के लिए तो वही ठीक है देखो तो मम्मी अभी भी रसोई में है।
गीता ने डिजिटल केमरे से बहुत सारे फोटो खीचें व तुरन्त प्रिन्टर से फोटो निकाल लिए।
मौसी के रहते ये दो हफ्ते कितने अच्छी तरह गुजरे पता नहीं चला।
मौसी के साथ ही सारे समय रही गीता। एक मिनिट भी उन्हें छोड़ कर अलग नहीं हुई। खाते, सोते हर समय साथ रही सिर्फ नहाने को छोड़ कर ।
एक दिन मौसी, जनार्दनी से बोली ‘‘ जानू, गीता को आगे पढ़ने के लिए अमेरिका भेज दे मुझे भी सहारा रहेगा। तुम परेशान मत हो। तुम भी साथ आ सकती हो। विजिंटिग वीजा, पासपोर्ट सब का इंतजाम कर दूंगी। मेरा बड़ा अपार्टमेंट है। कार की सुविधा है। अकेलापन मुझे मार डालता है जनार्दनी ! मैं बहुत मेहनत कर चुकी। रात के 12 बजे भी आफिस से फोन आता तो कार लेकर दौड़ पड़ती। डालर ! डालर बहुत कमा लिया। सब को वाइंडअप कर यहां आ जाने की सोच रही हूं। उसमें थोड़ी कानूनी अड़चन आडे आ रही है। कम्पनी का कान्ट्रेक्ट भी है। सो तुम्हारा वहां आना बैटर रहेगा। ’’
गीता धीरे से बोली ‘‘क्यों मौसी, बूरा न मानना, आपकी उम्र छोटी ही है ना ? तुम शादी क्यों नहीं करतीं ? आजकल तो भारत में ही बड़ी-बड़ी उम्र में लड़कियां शादी करती है। आप तो सुन्दर व सर्व गुण सम्पन्न हो। ’’
रमा हंसी। ‘‘ मैं इस उम्र में इतना रिस्क नहीं ले सकती। अकेलेपन की मुझे आदत पड़ गई। इस उम्र में आकर किसी पर विश्वास कर जोखिम उठाओ फिर धोखा खा जाओ, तो इस उम्र में सम्भलना ही मुश्किल है। मैंने बहुत सी कहानियां सुनी है इस तरह की व कुछ अनुभव भी किया ही है। ना बाबा ना ! अब रिस्क नहीं उठा सकती। ’’
उसके बाद गीता नहीं बोली।
उस दिन......................
मौसी का रवानगी का दिन।फ्लाइट के लिए कई घण्टे पहले रवाना होना होता है।इन्टरनेशनल फ्लाइट के कारण सिक्यूरिटी चेंकिग दो घण्टे पहले एयर पोर्ट में रहना पड़ता है।
अर्द्धरात्री की फ्लाइट है। ये लोग आठ बजे से ही जल्दी-जल्दी कर रहें हैं।
मम्मी गीता से बोली ‘‘मै मंदिर में अभिषेक के लिए सामान देकर आई थी। पुजारी जी ने प्रसाद घर भिजवाने की कही थी। अभी तक भेजा नहीं। मैं जाकर प्रसाद लेकर आती हूं। गीता तुम घर रह कर मौसी की मदद करो......’’कह कर जनार्दनी बाहर चली गई।
दरवाजे को बंद कर गीता मौसी जी के पास आई।
‘‘ मे आई हेल्प यू ? ’’
‘‘ नहीं कुछ नहीं करना। यदि मेरी मदद करना चाहती हो तो जल्दी से कोई तरकीब कर अमेरिका आने की सोच। इसी में मेरी खुशी है। ’’
गीता हंसी।
‘‘क्यो मां ? अचानक मुझ पर इतना प्यार उमड़ रहा है ? ’’ जैसे ही गीता की बात सुनी तो सूटकेस में सामान रखने के लिए जो कपड़े उठाए थे वे घबराहट में गिर गए। मुड़कर गीता को देखा। उनके हाथ कांपने लगे। शब्द निकल नहीं रहें थे, गला रूंध गया।
‘‘ये........ क्या ..........बोल रही है ? ’’
‘‘ मालुम है मौसी , तुम मेरी मां हो मालुम है। ’’
‘‘ये...इस....जानू......ने....... ’’
‘‘ मम्मी ने ये बात नहीं बताई,मम्मी नहीं बोलेगीं पर जब से तुम आई हो मौसी, मम्मी में मैंने अजीब सी घबराहट देखी।उनकों अजीब सा टेंन्शन में देखा व जिसे मैंने मेहसूस किया। मुझे संदेह हुआ। दाल में जरूर कुछ काला है। इसी उघेड बुन में मैं, मम्मी को बताये बिना मम्मी की लॉकर की चाबी लेकर बैंक गई। मैं व मम्मी हम दोंनो ही उस लॉकर को अॅापरेट कर सकते हैं। पर मैंने आज तक इसे आपरेट नहीं किया। मम्मी कहती थी उसमें कुछ गहने व प्रपत्र जरूरी कागजाद रखे हैं। कल मैं जाकर देखी तो उसमें आपने मुझे गोद देने की पूरी कार्यवाही करके उसमें फिर कभी वापस नहीं लेने की बात लिखी थी। अब उससे मेरा कोई रिश्ता नहीं होगा ये भी आपने लिखा है मौसी ! कुछ चिट्टियां........अमेरिका से तुमने जो पत्र लिखा एरोग्राम पत्र, अठारह वर्ष पहले का.......एक पर विश्वास करके धोखा खाई व ये पाप मेरे पेट में देकर चला गया। उस समय तुमने मुझे बचाया उसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं। अब मेरी पढ़ाई में काई रूकावट नहीं है। तुमने इसे पालने का जिम्मा लिया था इसीलिये मैंने इसे पैदा किया। नहीं तो.........गर्भ में ही खतम कर देती। नहीं तो.......पैदा होने के बाद भी मार सकती थी..........ऐसे............ऐसे...........पत्र............’’ बोलते बोलते गीता का गला रूंध गया।
’’ मौसी तुम्हें धन्यवाद। मेरे पैदा होने के बाद तुमने मुझे जहर देकर या गला दबा कर नहीं मारा व अपनी बहन को दे दिया।.....धन्यवाद मौसी, ये पाप की गठरी बोल रही है धन्यवाद....... ’’
’’गीता मैं जो..........’’
‘‘अब अकेलापन काटता है ना ? इसलिए इस पाप की गठरी से रिश्ता रखोगी। ऐसा लगता है ?...नहीं..........नीच लोगों को दूर ही रखना चाहिए। वही हम दोनों के लिए अच्छा है। मम्मी ने बेचारी पापा के मरने के बाद अपना सारा प्यार और विश्वास मुझ पर उड़ेला।मुझे चन्दामामा दिखा कर अमृत खिलाकर बड़ा किया। माना कि वे नये जमाने के आड़म्बर नहीं जानती। तो क्या हुआ ? उनमें मानवता, स्वाभाविमान, अपना भारतीय संस्कार और देश प्रेम उनमें कूट-कूट कर भरा है। इस भारत की मिट्टी में ही मेरी जड़े हैं उसको उखड़ कर दूसरे देश में ले जाकर रोपने में मैं विश्वास नहीं करती।’’
‘‘इस मिट्टी में मेरी माँ के द्वारा दिया गया प्यार, दुलार और संस्कार हैं। जिसे देकर मुझे बड़ा किया मेरी माँ ने। जो परम्परागत ज्ञान मेरी माँ ने दिया है उसे उखाड मत देना। यही मदद मैं आपसे मुझे पैदा करने के लिए चाहती हूं।.......गुड-बाय।’’
गीता को ऐसे बोलते देख रमा मौसी आश्चर्य चकित रह गई।
ये कौवे के घोंसले में रखे कोयल का अण्डा अब मेरे आडम्बर में आने वाला नहीं। ये तो कौवे के साथ ही रहना चाहता हैं। वाह! री !दुनियां !रमा सोच कर मन में दुखी होती है।
इतने में बाहर डोर बेल के बजने लगती है। मन्दिर जाकर अभिषेक का प्रसाद लेकर जनार्दनी लौट आई।
रमा अपने आंसू पोछकर फिर अपने सामान जमाने लग गई।

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.