उस रात जो भी हुआ उसको मैं कभी भूल नहीं सकती न किसी को बता सकती हूँ।  काम अधिक होने की वजह से मैं सेटर-डे नाईट के प्लान में शामिल न हो सकी।  घर पर ही थी।  करीब दस बजे लैपटॉप बंद किया और मैगी बनाने किचन में गई। खाने के बाद थकान की वजह से तुरंत नींद आ गई।  करीब देढ बजे डोरबेल बजी।  रवि - मेरा बॉयफ्रेंड और उसका दोस्त अभिषेक थे। उनके मुहँ से आ रही दुर्गन्ध से पता चल रहा था की कम से कम चार अलग अलग जगह से पी कर आ रहे है।  मैंने तुरंत रवि को संभाला। वो अस्वस्थ होने के बिलकुल करीब था। मैंने उसको ले जा कर अपने बेड पे सुलाया। कंबल ओढाते ही वो छोटे बच्चों की नींद सोने लगा। अभिषेक बहार वाले कमरे में रखे गद्दे पर पसरा हुआ था।  

मैंने कुछ दिन पहले ही नए फ्लैट में शिफ्ट किया था।  इसलिए गद्दों की कमी थी।  हम तीन लोग थे और गद्दे सिर्फ दो। ऐसे हालात में और इतनी देर रात गए मैं अभिषेक को घर जाने को भी नहीं बोल सकती थी।  मैंने ही सुझाया की दो गद्दों को इकठ्ठा कर के सब मेरे बैडरूम में ही सो जाये। रवि गहरी नींद में था, मैंने उसको हल्का सा खिसका कर अपने लिए जगह बना ली और दूसरा गद्दा अभिषेक को मुहल्ला कर दिया। बस कुछ ही पल बीते होंगे और मुझे जैसे लगा की कोई मेरे पैरों को सहला रहा है। नींद की वजह से पहले तो मैं कुछ समझ नहीं पायी।  लेकिन जब वो मेरे स्कर्ट में ऊपर आता महसूस हुआ तो मैं सतर्क हो गई।  मैं ने आंखें नहीं खोली।  क्यूंकि अगर रवि सो रहा था तो यह अभिषेक कर रहा था।  अभिषेक मेरे और रवि के साथ ही आईटी कंपनी में जॉब करता है और वो रवि का एकलौता करीबी दोस्त था।  अगर मैं आँखे खोलती, सवाल करती तो वो शायद कभी मेरा सामना न कर पाता।और तो और रवि और उसकी दोस्ती ख़तम हो जाती। मैंने करवट बदली और नींद खुलने का इशारा दिया ताकि वो जो भी कर रहा था वो बंद करें। तब तक उसके हाथ मेरे टॉप तक आ पहुंचे थे। 

 

जब उस पर इसका कुछ प्रभाव नहीं हुआ तो मैं खड़ी हो गई और बैडरूम से बहार पानी पीने के बहाने आ गई।  मेरी आँखे आँसूओ से छलक पड़ी।  अभिषेक जिस पर जान से अधिक भरोसा किया और जो इतना नशे में भी नहीं है वो यह सब कैसे कर सकता हैं। मैं कुछ पंद्रह मिनट तक टॉयलेट में बैठी रही। सोचती रही की रवि को कैसे जगाउ।  अगर रवि जग जाता है तो अभिषेक यह सब नहीं कर सकता। अभिषेक के दिमाग में अभी भी यही था की मुझे नींद में कुछ भी पता नहीं चला है। मैं हिम्मत जुटाकर वापिस आयी तो वह करवट बदल कर सो चूका था।  मैं डरी सी, रवि की बाँहों में जितना अंदर घूस सकु उतना घूस कर पड़ी रही। तभी कुछ घंटो में मुझे नींद आ गई। सुबह सब जगे उससे पहले मैं तैयार हो गई थी और रविवार की किसीसे कुछ भी बात किए बिना मैं ऑफिस चली गई।  

 

यह बात मैंने अपने सीने में ही गाड़ दी और तय कर दिया की अभिषेक को कभी मेरे फ्लैट पर आने का मौका न दूंगी । इसके बाद से मैंने अभिषेक से बात करना बहुत काम कर दिया। इस बात को कुछ दिन हुए होंगे। ऑफिस के दोस्तों के साथ हम एक शाम डिनर पर गए थे, रवि ने न जाने कब वहां से अभिषेक को मेरे फ्लैट पर बुला लिया। जिस बात का डर था वही हुआ।  मेरे मना करने के बावजूद रवि ने उसे रोक लिया।  लेकिन इसबार कोई नशे में नहीं था। न जाने क्यों लेकिन मुझे ऐसा लगा था की इन दिनों में मैंने अभिषेक को उसकी हरकत के लिए माफ़ कर दिया था। लेकिन फिर से वही रात दोहराने लगी।  इसबार उसकी जकड काफी स्ट्रांग थी।  इसबार मैंने आँखे खोल दी और रवि को खींचने की कोशिश की। लेकिन रवि घोड़े बेचकर सो रहा था। मेरी आँखों से आंसू बहने लगे। मैं वही बंधनों की वजह से और रवि को कही हर्ट न हो जाए के चक्कर में चूप रही। उसने पूरा बदन तराश डाला। कपडे खोल दीए। जैसे उसको इजाजत थी यह सब करने की बिलकुल वैसे। जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैं भागकर  बाथरूम में आ गई। और पूरी रात वही बैठी रही। मैंने दो बार शावर ले लिया जिससे उसके स्पर्श को मिटा सकूँ। 

 

आज एक महीने बाद रवि और मैं साथ नहीं हैं। रवि को किसी और से प्यार हो गया है और तीन दिन पहले ही हमारा ब्रेकअप हुआ है। जिसकी दोस्ती की इतनी कदर की मैंने, वो ही धौका दे दिया मुझे। और वो दरिंदा अभिषेक आज भी मेरे डेस्क के सामने बैठकर " भीगे होठ तेरे  .... " उसकी भद्दी आवाज में मुझे सुनाता रहता है।  इन सबसे परेशां हो कर मैं इस्तीफा दे यहाँ से निकल जाने की सोच रही हूँ। लेकिन मैं रुक रुक कर खुद को सवाल कर रही हूँ की मैं क्यू छोड़ू? वो नामर्द को यहाँ से भागना चाहिए मुझे नहीं।  

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