लखनऊ में मेरी नई-नई जॉब लगी थी ऑफिस हजरतगंज में था और मैं एलडीए कॉलोनी में रूम लेकर रह रही थी। ऑफिस का टाइम सुबह 11 से शाम के 8 बजे तक था तो घर पहुंचते-पहुंचते मुझे रात के 10 बज ही जाते थे। अगस्त का महीना था बरसात हो रही थी रोज की तरह ही मैं जल्दी-जल्दी काम खत्म करके ऑफिस से घर के लिए निकली। मैं ऑटो स्टेंड पर लगभग 1 घंटे से खड़ी थी लेकिन कोई ऑटो नहीं मिल रहा था।

रात के 9 बज गए बारिश तेज ही होती जा रही थी दूर से एक ऑटो दिखा तो मेंने उसे रुकने का इशारा किया वो रुक गया।अंदर एक अंकल और एक आंटी बैठी थी। एलडीए जाने के लिए उसने कहा कि किराया ज्यादा लगेगा क्योंकि मवइ्इया पुल के नीचे पानी भरा है तो केंट होकर जाना पडेगा। मैंने कहा ठीक है । चारबाग आया तो वो आंटी वहां उतर गई अंकल ने कहा कि उन्हें भी एलडीए जाना है। आंटी को छोडने के बाद आटो चल दी, बारिश तेज हो रही थी पानी की छीटें ऑटो के अंदर तक आ रही थी तो मेरे साथ बैठे हुए अंकल थोडा खिसक के मेरे करीब आ गए मैंने उनकी तरफ देखा तो बोलते हैं पानी की छीटें आ रही हैं । धीरे-धीरे मुझे महसूस हुआ कि वो अंकल जानबूझकर मुझसे चिपकने की कोशिश कर रहे हैं।

मैं उनसे दूर खिसकने लगी तो वो और खिसककर पास आ गए उसके बाद वो अपना हाथ मेरे कंधे के पीछे से लेकर गए और मेरे स्तन को छूने की कोशिश की मैंने उनका हाथ जोर से झटक दिया। मैं लगातार अंकल को घूरे जा रही थी मन में था कि अबकी कुछ हरकत की तो मार दूंगी तभी अचानक ऑटो रुक गई और ड्राइवर ने उस अंकल को बाहर निकलने को कहा ।

अंकल चिल्ला उठे कि मुझे यहां नहीं उतरना है। उसने अंकल का हाथ पकड़ कर खींचते हुए बाहर निकाला और कहा कि -तुम्हारी हरकतों को तब से शीशे में देख रहा हूं, मन तो हो रहा सीधे पुलिस स्टेशन ले चलूं । ड्राइवर उसे उतारकर फिर से चलने लगा । ड्राइवर ने मुझसे कहा कि आपने उस बुढ्ढे को मारा क्यों नहीं? तो मैने उसे जवाब दिया कि मैं कोई बवाला नहीं चाहती थी। वो हसनें लगा, फिर बातों-बातों में उसने मुझे बताया कि वो लखनऊ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है कुछ परेशानियों की वजह से रात में ऑटो चलाता है।

मेरा घर आते ही मैंने उसे रुकने के लिए बोला। मैंने उसे किराया दिया और चल दी घर के अंदर घुसकर जब मैं दरवाजा बंद करने को मुड़ी तो देखा ड्राइवर खड़ा था। फिर उसने अपनी ऑटो स्टार्ट की और चला गया मैं भी रूम में चली गई। मुझे कुछ सूना-सूना लग रहा था ऐसा लग रहा था कि कुछ अधूरा रह गया था फिर याद आया कि जिस इंसान ने मेरी इतनी मदद की उसे मैं धन्यवाद कहना भूल ही गई थी।

सच मैं आज भी तुम्हें उस बरसात वाली रात के लिए दिल से धन्यवाद

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