शापित ज़िन्दगी भाग १ के लिए यहाँ क्लक करें


वंदना अपने कानों मे headphones दबाए बैठी थी- कभी कमर लाचकाती, कभी गर्दन सरकाती तो कभी कंधों को यहाँ वहाँ हिलाते हुए गाने सुन रही थी। बीच बीचमे गाने का chorus जोर से गाती और बाहर hall मै बैठें Mr. Joshi परेशान होतें!


Mrs.Joshi विकास का फ़ोन try कर रही थी। 3-4 असफल प्रयास के बाद आखिर लग ही गया। ये पता चला कि विनीता को पूरे 3 दिन बाद डिस्चार्ज मिलने वाला था। उसके पतीने विकास के मुँह पर 5 लाख की रक़म फेंका और कहाँ "तुम्हारी बेहन ने जो सुख दिया है उससे ज्यादा ही पैसे दे रहा हूँ। just get lost!" पाँच मिनट और बात चली उनकी फिर call disconnect कर दिया। Mrs. Joshi अगले ही पल फुट फुट कर रोने लगी। उनकी दर्द भरी आवाज़ गले से भी नीचे दबे हुए दिल से आ रही थी- पलकों को फड़फड़ाने वाली आवाज़। आप वहां होते तो आपका कलेजा टूटकर ज़मीन पर धौंक खाता।

Mrs Joshi चिल्लाईं, चीखीं.... थोड़ी शांत हुई... फिर रोने लगीं।


पत्नी की ये हालत देखकर जोशीजी अंदर से खल गए । वैसे जो आदमी अपने पत्थर दिल के लिए जाना जाता हो, उसका बुरा मानना ताज्जुब वाली बात थी। चाहते थे जाकर पत्नी को संभाले, सहारा दें। अब तो उनकी आँखें भी नम पड गईं थीं। ये Mr Joshi उठनेवाले थे कि एहसास हुआ उनका रिश्ता तो सिर्फ एक सामाजिक और ओर पारंपरिक compromise था- न कभी प्यार से बात हुई न बाहर गए कभी अपने दोनों के लिए वक़्त निकालके।


35 साल पहले की एक घटना उन्हें अभी भी सताती। अभी अभी शादी हुई थी Mr Joshi की- मुंबई से नौकरी का बुलावा आया तो मजबूरन Pune से shift होना पड़ा। office वालों ने दादर मै रहनेका इंतज़ाम किया था। ये दोने शाम की ट्रैन से दादर स्टेशन पर उतरे। ये जगह- तब भी मेले जैसा लगा और अब भी- न जाने कितनों के सपनों का मेला- कोई बनाने, कोई खरीदने तो कोई बेचने। Mrs. Joshi ने पहली बार इंसानों का सैलाब देखा। जाहिर सी बात है की अपने पति का हाथ थाम लिया। और फिर बस, हमारे Mr. जोशी बेचैनसे हुए। थोड़ी कूटनीति करि, हाथ छुड़वाया और भीड़ मे हुए फ़ुर्र।


ऐसा आनंद झलक रहा था चेहरे पर की क्या बताते वो। जैसे किसी 8th standard के बच्चे ने अपने class teacher को चकमा दिया और खुले सड़क मे मटरगश्ती करते घूम रहा हो....हाहाहा...

शान से स्टेशन भटकने के बाद बहार टैक्सी स्टैंड आये तो Mrs Joshi उनका इंतज़ार कर रही थी! चोंक गए- he skipped या heart beat। हताश हुए, निराश हुए, फिर अपने आप को कोसने लगे।

अब ये बंधन 7 जनमों का है ये बताना मुश्किल है- इस जनम का तो हैं- इसे कड़वा सच समझकर चल दिए।


मन ही मन थान लिया- ये ठहरी 7वीं पास- मै first class वाला graduate! कहाँ ये अनपढ़ गवार को मेरे गले लटका दिया! बस इसे अपनी औकाद दिखाना पड़ेगा। ये औरतों की जात ही ऐसे अनपढ़ हैं।


अब आप सोच रहें है ये Mr.जोशी बड़े मेल chauvanist क़िस्म के हैं! दरअसल उन्हें स्त्री jaat से घृणा थी। बचपन से जवानी तक, घर की सुख शांति इन औरोतों ने ही तहस-मेहस कर दी थी। पैदा होते ही माँ का देहांत हुआ- अब पुने से 60km दूर कौनसा doctor, कौनसा Hospital! घर में चाचा- चाची ले अलावा एक विधवा अत्य (हिंदी मे बुआ और इंग्लिश मे Maternal Aunt) थीं।

पिताजी दिन मै पोस्ट ऑफिस में clerk थे और शाम को मंदिर के पुजारी। चाचा यूँही लफंगे जैसे घूमते और पैसे यहाँ वहां उड़ाते। चाची, जो उम्र मै 15 साल की थी पर गरीबी का रोना धोना चालू रखती। अब गाँव मै एक ब्राह्मण का परिवार पैसों से ज्यादा, सम्मान से गुजर करता, सभी जाट वाले कमर झुकाकर बात करते उनसे।


जब Mr. जोशी 5 साल कि उम्र के थे, तब पैसों कि हवस पालनेवाली चची गाव के 40 साल जमींदार के साथ शहर भाग गयीं। इतने सालों की इज्जत पल बाहर मे भूलकर गाँववालों ने रातोरात उनके परिवार को भगा दिया। उनके पिताजी बहुत अपमानित हुए- जान चली जाती तो भी अच्छा होता, यूँ ऐसे मान -सम्मान चकना चूर न होता।


20 साल की आत्या ने Mr. जोशी और उनकी बड़ी बहन को पाल पोसकर बड़ा किया। वे दोनों बड़े घुल मिल जाते अपनी आत्या के साथ।

जभी आत्या को देखते, एक सवाल हमेशा परेशान करता- इतनी खूबसूरत, दर्जेदार चेहरा, बोलनेवाली आँखे, सुरीला आवाज़। कोई हेरोइन से कम न थी- सिर्फ सर पर बाल न थे। हमेशा मैरून कलर की साड़ी पहने रहती! कभी घर कि चौखट पार नहीं करती। Huh, कभी पूछने कि हिम्मत नहीं हुई।

Mr. Joshi ने कभी अपने पिता को आत्या के साथ ढ़ंग से बात करते नहीं देखा। चाची कि घटना के बाद उन्क्व पिताजी बड़े गुस्सैल स्वाभाव के हो चुके थे। न अपनी बेटी से दिल खोलकर बात करते न अपनी बेहन से। जब पत्नी का ज़िक्र होता तो पुरे दिन कोसते, बड़बड़ाते, "तुम्हारी जिंदगी को शार्प लगा था, इसलिए चल बसी, और जानेके बाद शापित जिंदगी छोड़ गयी!

उनके पीछे पीछे आत्या भी चल बसी जब Mr. Joshi कॉलेज में थें। कैसे बैसे घर मे पड़ीं 10वीं पास बेहन कि शादी कर डाली। अब अचे घर में रिश्ता दिया था- लड़का US मै settle, नो dowry एंड green card मिलने की पूरी संभावना!


फिर 5 साल मै अपना graduation ख़त्म कर लिया, चाचाजी के दबाव मै मजबूरन शादी करनी पड़ी- huh, लो एक और औरत आयी घर मे- कुछ तो जरूर होना था।

और क्यू न हो- शाहरुख खान ने आखिर कहा है, जब आप किसी चीज़ को शिददत से चाहते हो तो पूरी कायनात तुम्हे उसे मुलाने की साजिश करती है!

एक दिन खबर आयी उनकी बेहन का देहांत हुआ! सुना heart attack हुआ। Mr. Joshi का दिमाग ये मानाने बिलकुल तैयार न था! थोड़ा जुगाड़ लगाया और Indian Embassy से पता किया आखिर सच मे क्या हुआ था- उसके पति ने US मे पहले ही एक शादी की थी। इनकी बेहन तो नौकरानी का काम करती थी।

दिन रात बदन पीसकर काम करती। एक दो महीने हो तो ठीक, पर सालों साल आप वही करने लगे तो stress and fatigue शरीर तोड़ देता है। किस जन्नत के सपने मे गयीं थीं कि नरक वाली ज़िन्दगी नसीब हुई थी।

Mr.. Joshi के लिए ये बड़ी दर्दनाक बात थी- आज फिर से एक औरत ने उन्हें दुःख दिया। ये कभी किसी को सुख देने लायक नहीं है क्या!?!

और अपने ओत कि बात कानों में गूँजने लगी-ये औरत जात मतलब शापित ज़िन्दगी।


भाग ३ यहाँ अंतिम भाग है

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