' हेलो ' आज काफी दिनों के बाद मेरी एक पुरानी मित्र अनामिका का व्हाट्सअप पर मैसेज आया।

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ फिर भी मैने बात करना शुरू किया।

मै- हेलो, आप कैसी हैं।

अनामिका मैं ठीक हूँ , तुम बताओ ।

मै- मैं भी ठीक हूँ ।

अनामिका तुम तो मुझे भूल ही गए ।

मै- तो तुम तो जैसे रोज याद करते हो ।

अनामिका - आज किया तो तुमने तो वो भी

नहीं किया ।

मै - अगर मेरे बात करने से किसी को कोई दिक्कत या परेशानी हो तो हम कैसे कर सकते हैं।

अनामिका - मुझे तो कोई परेशानी नहीं ।

मै - याद करो आज से एक साल पहले जब तुम्हें बहुत तेज बुखार था और हमने तुम्हें मेसेज और काल किया था तब तुमने सही से बात नही की थी, और दो तीन दिन बाद भी हमने मेसेज किया था तब भी तुमने उत्तर नहीं दिया था।

अनामिका - यार मैं उस समय बहुत बुरे फेज से गुजर रही थी। उस समय मेरा बहुत बड़ा एक्सीडेन्ट हुआ था , चेहरा और पेट में बहुत चोट आयी थी । किसी से भी बिल्कुल बात करने का मन नही करता था।

उसने जैसे ही ये सब बातें बताई मेरे चेहरे की हवाईयाँ उड़ गईं। मैं अपने आप को बहुत शर्मिन्दा व आत्मग्लानि महसूस कर रहा था।

आज से एक साल पहले की बात है जब अंतिम बार मेरी सविता से बात हुई थी और उस दिन उसको बहुत तेज बुखार था और मैंने उससे काफी बात करने की कोशिश की थी तो उसने सही से बात नही की थी तो मुझे लगा कि तबियत खराब होने की वजह से वो हमसे सही से बात नहीं कर रही। पर जब दो तीन दिन बाद मैंने फिर बात करने की कोशिश की तो उसने कोई जवाब नहीं दिया तो मुझे लगा कि शायद वो मुझसे बात नहीं करना चाहती है। और उस दिन के बाद से हमने उससे बिल्कुल बात करना बन्द कर दिया।


एक बहुत बड़ी गलतफहमी हमे और हो गई थी जिसके चलते और अपने अहम् के चलते हमने पूरे एक साल तक उससे बात करने या कान्टैक्ट करने की कोशिश भी नहीं की ।

अनामिका ने हमारे साथ ही बी एच एम एस मे दाखिला लिया था लेकिन किसी वजह से वो ६ महीने पीछे हो गई थी। और इस वजह से उसका सारे बैचमेट से सम्पर्क टूट गया था या कहिए उसकी सिर्फ हमसे और एक दो लोगों से ही बैच मे बात होती थी। हम और अनामिका बहुत अच्छे दोस्त थे। कालेज के समय से ही हमे पता था कि अनामिका हमे पसंद करती है पर हम लोगों ने कभी भी इस बारे मे कोई बात नही की।


हम दोनों लोग बहुत अच्छे दोस्त थे। हमारे बीच हमेशा बातचीत होती थी और एक दूसरे की टाँग खीचते थे और चिढाते भी थे हम कुछ भी उसको कह ले पर वो कभी बुरा नहीं मानती थी। पर पता नहीं हमारे दिमाग यह बात उस दिन कैसे घर कर गई कि शायद अनामिका हमसे दोस्ती से ज्यादा चाहती है इसलिए वह हमे इग्नोर कर दिया है। पर हम बिल्कुल गलत थे जिसके साथ इतनी बड़ी दुर्घटना हुई हो वो तो बात करने के हालात में ही नही थी। फिर भी उसने हमसे बात तो की पर हमने अपने इगो के चलते उसके एक दो बार हमारी काल का उत्तर नहीं दिया तो हमने उससे बात करना ही बन्द कर दिया। और उससे हमने कोई कान्टैक्ट भी नहीं किया। और अगर आज उसने मेसेज ना किया होता तो हम शायद ही कभी करते ।

मुझे अपने आप मे बहुत आत्मग्लानि हो रही थी इसलिए हमने सोचा लिया कि हम अनामिका से मिलकर माफी माँगेगे । इसलिए अनामिका से हम दूसरे दिन बाहर मिले उससे माफी माँगी और बहुत सारी बातें की कब २-३ घंटे गुजर गये पता ही नही चला और अभी भी हमारी बातें खत्म न हुई। सिर्फ अपने एक सच्चे दोस्त से ही आप सब कुछ शेयर ( बता ) कर सकते हो । उसने अपनी सारी आप बीती और हमने अपनी जो जो एक साल मे हुआ एक दूसरे को बताई।

और अब समय हो गया था अपने अपने घर जाने का । हम दोनों लोगों के चेहरे पर मुस्कराहट थी और हम दोनों लोगों ने इस वादे के साथ कि चाहे जितनी विषम परिस्थिति हो हम हमेशा कान्टैक्ट मे रहेंगे।


इस कहानी को लिखने का मेरा सिर्फ एक उद्देश्य है कि हमे कभी किसी चीज को लेकर गलत अवधारणा नहीं बनानी चाहिए । दुनिया में सब कुछ मिल जायेगा पर सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल है इसलिए कुछ भी हो किसी गलतफहमी के चलते आप अपनी दोस्ती मत तोडना।

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