दो बंद लिखूं पैग़ाम लिखूं मैं जन्म भूमि को सलाम लिखूं
सरहद पर जो मेरे भाई हैं मैं उनका पहले नाम लिखूं
हैं रक्षक देश के लाडले वो उनके लिए एक कलाम लिखूं
मैं उनको अपना सलाम लिखूं

हैं अपने देश के गौरव जो मैं उनका भी अब नाम लिखूं
गांधी से पहले भगत लिखूं नेहरू से पहले सुभाष लिखूं
जो वीरगति को प्राप्त हुए उन शेरों को एक सलाम लिखूं
दो बंद लिखूं पैग़ाम लिखूं

भारत छोड़ो एक नारा है पर इंकलाब मेरा प्यारा है
मैं तो इसको हर बार लिखूं मैं बस इसका ही जाप करूं
इसको भी एक सलाम लिखूं
दो बंद लिखूं पैग़ाम लिखूं

मैं मातृभूमि का नाम लिखूं मैं अब झंडे की शान लिखूं
मैं राष्ट्रगीत को याद करूं मैं राष्ट्रगान का गान करूं
मैं इन सब का अब मान लिखूं
मैं इन सब को एक सलाम लिखूं
दो बंद लिखूं पैगाम लिखूं

:- आनंद शंकर
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