काश तुम्हे रोक पाती

अंजली जल्दी करो , स्कूल बस आती ही होगी ।

यस मम्मी , बस दो मिनट - अंजली ने अपनी माँ को कहा । स्वाति जल्दी से किचन से आ कर , अपनी बेटी अंजली को तैयार होने में मदद करने लगी । रोज़ की तरह बस वाले भैया के भोपू बजने से पहले ही दोनों माँ बेटी आज बस स्टॉपेज पर खड़ी थी । कुछ ही मिनटो में बस आ गयी , और अंजली स्कूल के लिए रवाना हो गयी ।

स्वाति आज खुश लग रही थी , आज बहुत दिनों बाद उसने अकेले अंजली को तैयार कर के स्कूल भेजा था , वर्ना रोज़ अंजली के पापा की मदद के बिना ये काम तो उसके ज़िन्दगी में संभव ही नहीं था ।

अंजली , स्वाति और प्रकाश की एकलौती 8 साल की बेटी थी , और दिल्ली के एक अच्छे से कान्वेंट स्कूल में क्लास 3 में पढ़ती थी । प्रकाश दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर था , और स्वाति से उसके शादी हुए 10 साल बीत चुके थे । स्वाति खुद दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश p.hd की तालीम ले रही थी ।

अंजली को बस में छोड़ कर अब स्वाति अपने क्वार्टर में वापस आ चुकी थी । उसके पति प्रकाश को सरकारी क्वार्टर मिला हुआ था , लेकिन प्रकाश ने गुड़गांव साइड में कुछ ज़मीन ले रखा था ।

स्वाति जल्दी ही घर का सारा काम निपटा कर सोफे पर बैठ गयी , और सोचने लगी की आज तो प्रकाश भी नही है , और अंजली भी स्कूल गयी है , और आज मुझे यूनिवर्सिटी का भी कोई काम नहीं है । तो आज मै पूरा दिन लैपटॉप पर फेसबुक पर दोस्तों से चैट करुँगी , और एक - दो फिल्में देखूंगी । स्वाति जल्दी से दूसरे कमरे से लैपटॉप ला कर , नेट चालू कर के अपने ब्राउज़र पर फेसबुक.कॉम टाइप करने लगी । स्वाति के फेसबुक के प्रोफाइल का होम पेज खुल चूका था । वो एक एक कर के होम पेज पर आये पोस्ट , फोटो, न्यूज़ आदि , देख रही थी । तब उसने अपने स्कूल वाला ग्रुप पर बटन दबाया । WPPS 2004 - 2005 batch इस ग्रुप का नाम था । ग्रुप में काफी नोटिफिकेशन थे , शायद स्वाति बहुत दिनों बाद ग्रुप के पोस्ट सब देख रही थी । एका एक वो रुक गयी , किसी की तस्वीर लगी हुई थी । उसने ध्यान से देखा ये तस्वीर तो रोहन सिंह की थी , जिसे स्वाति की दोस्त रागिनी ने ग्रुप में शेयर किया था । उस फोटो के साथ कुछ लिखा हुआ था - Rohan Singh committed suicide , he is not more in this world.

एक मिनट के लिये मानो स्वाति के पैरों तले जमीन खिसक गयी । उसके बचपन का बेस्ट फ्रेंड अब इस दुनिया में नहीं था । ये पोस्ट रागिनी ने तीन दिन पहले शेयर की थी । यानी रोहन को मरे हुए तीन दिन से ज्यादा हो गया था ,और स्वाति को कुछ पता नहीं था । वो अपनी ज़िन्दगी में इतना आगे बढ़ गयी थी की उसे कुछ पता ही नहीं था कि उसके दोस्तों के ज़िन्दगी में क्या चल रहा है । इस पोस्ट पर बहुत कमेंट आये थे ।

स्वाति बहुत कोशिश कर रही थी , मगर फिर भी उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे । उसने हिम्मत कर के फेसबुक से अपनी दोस्त रागिनी खन्ना का मोबाइल नंबर मिला । क्योंकि स्वाति के पास रागिनी का मोबाइल नंबर नहीं था । तब उसने जा कर रागिनी को फ़ोन किया । तब रागिनी ने बताया कि रोहन को मरे हुए 6 दिन हो चुके थे । उसने स्वाति को यह भी बताया कि रोहन की गर्लफ्रेंड निकिता किसी एन-आर-आई लड़के से शादी कर के दुबई में सेटल हो गयी थी । और यही सदमा रोहन बर्दाशत नहीं कर सका और मौत को गले लगा लिया ।

स्वाति धीरे से कुर्सी पर उठी और अपने रूम के अलमीरा से एक डायरी निकाली , ये डायरी वो अपने स्कूल टाइम में लिखा करती थी । हर लड़की की तरह उसकी भी डायरी बहुत सुंदर तरीके से सजी हुई थी । वो एक एक पेज को पढ़ना शूरु की ………

रोहन तुमने आज फिर 8B के लड़को से मारपीट की - स्वाति ने रोहन से पूछा ।

हां की - रोहन ने जवाब दिया

लेकिन क्यों

क्योंकि वे लोग तुम्हे छिड़ा रहे थे , तुम्हे मोटी और चसमिस बोल रहे थे , तो मुझे गुस्सा गया और मैने उसके ग्रुप के बॉस को दो - तीन लगा दिया ।

लेकिन तुम मेरे लिये उन लोगो से क्यों लड़े ?

क्योंकि तुमको मोटी और चसमिस बोलने का हक़ सिर्फ मेरा है , और किसी का नहीं ।

उसकी यही सब हरकत मुझे उसके तरफ आकर्षित करती थी । और ये सारी बाते में अपनी इस डायरी में लिखती थी । मै और रोहन पटना के शास्त्री नगर एरिया में रहते थे । और हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे , जो हमारे घर से नज़दीक हुआ करता था । मै एक संयुक्त परिवार पली बढ़ी । लेकिन रोहन के माँ बाप नहीं थे ,उसके तो चार बड़े भाई थे जो रोहन को अपने बेटे से ज्यादा प्यार देते थे , लेकिन चारो भाई अलग अलग फ्लैट में रहते थे । और रोहन अपने सबसे बड़े भाई के साथ रहता था , रोहन के बड़े भाई मनेर के विद्यायक थे , इसलिये उसकी ज़िन्दगी हमेशा ऐशो आराम से गुजरी । मुझे जब कभी पैसो या किसी और चीज़ की जरुरत होती तो अक्सर रोहन मेरी मदद करता था । हम दोनों साथ ही बस में जाते और लंच टाइम साथ में ही लंच करते , वो अक्सर मेरे लंच की तारीफ किया करता । क्लास एक से क्लास पाँचवी तक हम लोग बस से स्कूल आते थे । लेकिन क्लास छः में रोहन ने साइकिल ले लिया और मुझे साइकिल पर बैठा कर स्कूल ले जाने लगा , मुझे अच्छा लगता था । पर ये बात समाज की आँखों में खटकने लगा , मोहल्ले की कुछ औरते ने आ कर मेरी दादी को कुछ उल्टा सीधा बताया । जिसके बाद मै रोहन के साथ साइकिल पर जाना छोड़ दिया । घर में मुझे ये बताया जाने लगा की मै एक लड़की हु , मुझे कैसे उठाना है , कैसे बैठना है , किससे कितनी और क्या बात करना है । इन्ही सब वज़हों से में अपनी इच्छाये दबाना सीखना शुरू कर दी थी । लेकिन स्कूल में रोहन आज भी मुझे मोटी बुलाता था । क्लास सातवाँ में मुझे चश्मा लग गया , घर में तो दादी ने कोहराम मचा दिया था कि - हाय हाय ये चश्मे वाली लड़की से कौन शादी करेगा , हमारी तो किश्मत ही ख़राब है ।

कोई नहीं करेगा तो मै शादी कर लूंगा आपकी पोती से - रोहन ने गेट के पास खड़ा हो के बोला ।

तू यहाँ क्या कर रहा है - दादी ने पूछा । दादी रोहन को पसंद नहीं करती थी , उनका बस चलता तो वो तो किसी लड़के से मेरा बात करना पसंद नहीं करती थी ।

अरे दादी हम तो स्वाति को उसकी इंग्लिश की नोटबुक वापस करने आये थे ।

हां तो वापस कर और जा यहाँ से ।

आज रोहन की बात सुन कर मुझे बहुत ख़ुशी मिल रही थी । शायद वो भी मुझे पसंद करता है ??

स्कूल में जब भी उसको इंग्लिश और सोशल साइंस के विषय में दिक्कत होती वो मुझसे मदद लेता , और मुझे जब भी मैथ और साइंस के विषय में दिक्कत होती तो वो मेरी मदद करता । धीरे धीरे मेरे मन के अंदर रोहन के लिये प्यार और मजबूत होते जा रहा था । लेकिन घरवालो और समाज के बनाये नियम मैं नही तोड़ सकती थी । इसलिये मैंने अपनी मन की बात को डायरी की शक्ल देने लगी । उसकी हर छोटी छोटी बात मेरे डायरी में लिखी हुई थी । फिर दशवी के बाद में आर्ट्स स्ट्रीम में आ गयी और रोहन साइंस स्ट्रीम में चला गया । लेकिन दसवी के बाद क्लास 11th के कॉमर्स सेक्शन में एक नयी लड़की आयी , किसी दूसरे स्कूल से उसका नाम था निकिता मल्होत्रा । दिखने में काफी सुन्दर थी , और काफी बड़े घर से बिलोंग करती थी । अब रोहन मुझे छोड़ कर उसके साथ लंच करता था । शायद यही पहली सीढ़ी थी जब मेरे रोहन की दोस्ती खत्म होने की निशानी थी । धीरे धीरे वो दोनों एक दूसरे के काफी नजदीक आ गये थे । फिर क्लास 12th में , हम और रोहन स्कूल के हेड बॉय और हेड गर्ल बने , मुझे लगा इस कारण रोहन दुबारा मेरे साथ अपना समय ज्यादा बिताएगा । लेकिन मैं गलत थी रोहन ने अपना पावर यूज़ कर के निकिता को स्कूल का कैप्टेन बनवा दिया था ।

मार्च में हम लोगो का बोर्ड का एग्जाम था , लेकिन उससे पहले फेब्रुरी में वैलेंटाइन्स डे आता है । मैंने अपने पास बचे हुऐ जितने भी पैसे थे उसका एक वैलेंटाइन्स कार्ड और लड़को वाला एक ब्रेसलेट लिया । सोचा शाम में कोचिंग के बाद रोहन को कार्ड और ब्रेसलेट देकर अपना प्यार का इजहार कर दूंगी । लेकिन शाम को कोचिंग से निकलते टाइम मैंने देखा की रोहन और निकिता , रोहन की बाइक पर कही जा रहे थे । मैंने उन दोनों का पीछा किया , तो मैने देखा वो दोनों किसी पार्क में अपना प्यार का इजहार कर रहे थे । मै टूट सी गयी थी , मैंने गुस्सा में आकर वो कार्ड को वही फाड़ कर फेंक दिया और चुप चाप घर को गयी । और अब में केवल बोर्ड के एग्जाम पर फोकस्ड थी । रोहन मुझसे मिलने की कोशिश करता था , लेकिन मैं उससे अब मिलना नहीं चाहती थी ।

स्कूल में फेयरवेल का फंक्शन चल रहा था । रोहन और निकिता एक साथ डांस कर रहे थे , और मैं किसी कोने में अकेले खड़ी थी ।

बोर्ड के एग्जाम के बाद मैं पटना में रह गयी और इंग्लिश से बैचलर की डिग्री करने लगी । मुझे लगा की रोहन शायद डॉक्टर की तैयारी करेगा , लेकिन मैं एक बार फिर गलत साबित हुई , वो तो निकिता के पीछे पीछे बंगलोर चला गया बी.कॉम करने , अपने घर वालो से लड़कर ।

शायद वो दिन मेरी डायरी लिखने की आखिरी दिन थी । और मैने आखिरी लाइन में ये लिखा था “ काश तुम्हे रोक पाती ” ।।।।।

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