मेरा सपना

उस दिन घर पर हमारे एक पड़ोसी का बेटा आया था, जिसका नाम काकू था I उसके घर वाले कही बाहर जा रहे थे इसलिए आंटी ने काकू को हमारे घर छोड़ दिया था I वह अभी दो साल का था I हमने काकू के साथ उस दिन बहुत मस्ती की I रात को काकू मेरी मम्मी के कमरे में सो गया था और उसके साथ मै भी सो रही थी I पता नहीं क्यों मुझे नींद नहीं आ रही थी और मै बिस्तर पर पड़े-पड़े करवट बदल रही थी की अचानक मुझे गेट खटखटाने की आवाज़ सुनाई पड़ी I मैने घड़ी देखी तो रात के साढ़े बारह बज रहे थे I मै बेड पर से उठी और गेट की तरफ बढ़ी I मैने जब गेट खोला तो वहाँ कोई नहीं था मुझे लगा की वॉचमैन से गलती से गेट बज गया होगा I मै गेट बंद कर रही थी की फिर से मुझे गेट खटखटाने की आवाज़ सुनाई पड़ी I मैंने देखा की गेट की चिटकिनी अपने आप ही बजे जा रही थी I मै बहुत डर गई I मै गेट को खुल्ला छोड़ कर बेड की ओर भागने लगी I जब मै बेड पर आ गई तो देखा की काकू उठ कर बेड के एक ओर अपना सर झुकाकर बैठा है I मै थोड़ी डरी हुई थी I मैने काकू से पूछा – “क्या हुआ , तुम तो मेरी मम्मी के पास सो रहे थे, यहाँ कोने मे क्या कर रहे हो ? “ उसने अजीब और डरावनी सी आवाज़ में बोला – “ आज की रात तुम्हारे लिए बहुत भयानक होगी “ I उसकी बात से मेरी रूह काँप गयी I मेरी नज़र जब उसकी ऊँगली पे गयी तो मेरे पसीने छूटने लगे I उसकी बीच की ऊँगली आधी कटी हुई थी I मैंने जब उससे पूछा की – “ये कैसे हुआ ?” तो उसने भयानक सी आवाज में कहा की "मुझे प्यास लगी थी , इसलिए मैने तुम्हारी मम्मी को जागने की कोशिश की तभी उन्होंने करवट बदली , मेरा हाथ उनकी कमर पे होने की वजह से उनके करवट बदलते ही मेरा हाथ बेड से बाहर हो गया और अचानक ऊपर से लेज़र आयी और मेरी ऊँगली कट गयी I” मै बहुत डरी हुई थी और ये सोचकर हैरान थी की इसे दर्द भी नहीं हो रहा है I उसकी आँखे लाल होने लगी I मुझे कुछ समझ मै नहीं आ रहा था I मै डर के मारे भागी-भागी दूसरे कमरे मे गयी जहाँ मेरी चाची और उनके दो बच्चे सोते थे पर वहाँ कोई नहीं था I

मै अभी ये सोच ही रही थी की सब एक साथ इतनी रात को कहाँ गए की मेरी नज़र सीढ़ियों पर चाची के धड़ से अलग सर पर गई I मै लगभग चीख पड़ी थी I तभी मुझे मेरे भाई की आवाज सुनाई पड़ी – “आज की रात तुम्हारे लिए बहुत भयानक होगी I" मैंने अपने भाई से पूछा की क्या हुआ है यहाँ...वो कुछ नहीं बोला और धीरे धीरे उसकी आँख लाल होने लगी थी । मै बहुत डर गई और गेट की ओर भागी । तभी मेरी नज़र मेरे मम्मी के कमरे की ओर गई । वहाँ पर सब लोग बिस्तर पर उठ कर बैठे हुए थे । सब की आँखे लाल थी और वो बड़ी अजीब सी हंसी हस रहे थे । मै इस बात पर हैरान थी की कोई मुझे बचाने क्यों नहीं आ रहा है ?

"सब तेरी माँ का किया धरा है मै कहती न थी की वो प्रेतात्मा है '। चाची की एक दर्द भरी आवाज आई ।

"ये नहीं हो सकता चाचीजी, मेरी मम्मी ऐसी नहीं हो सकती "

"अब भी तुझे यकीन नहीं हो रहा है । अब बचा ही क्या है ?"

मम्मी तब तक अपने बिस्तर से उतर कर मेरे तरफ बढ़ने लगी थी । सबके एक साथ चिल्लाने की आवाज आई - " भाग यहाँ से...जल्दी भाग...नहीं तो तेरी मम्मी तेरा भी वही हाल करेगी जो हमारा हुआ है...भाग..."

मै मम्मी को देख रही थी...उनकी नज़रो में मेरे लिए कोई प्यार नहीं था...मुझे लोगो की बातो पर यकिन होने लगा था और मै धीरे-धीरे पीछे की और खिसक रही थी की मेरे कदम लड़खड़ाए और मै गिर पड़ी....मेरी नींद खुल गई और मै अपने बिस्तर पर पसीने से तरबतर पड़ी थी । मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था I मम्मी योगा कर रही थी I बाहर चिड़ियों के चहकने की आवाज़ सुनाई पड़ रही थी I दिन निकल पड़ा था...मै मम्मी के पास गई और उन्हें पकड़ कर रोने लगी....I

शशि कांत सिंह "स्वेक्षा"

१४/५/२०१७


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