बारिश की बूंदों की तरह बीते हुए पल टपक रहे है दिमाग में टिप-टिप ...निरंतर ...शिमला के माल रोड की ठण्डी रात ....मुंह से भाप उड़ाते हुए ....और धप्प से आकर गिरा यह पल .....इसमें देखो हांगकांग के ताइकूशिंग की ताइ कू बिल्डिंग के सातवें माले से नीचे झाँकता आश्चर्यचकित लड़का .....वह इंडोनेशिया के जंगल .....थाईलैंड ...चिआन्ग्माई .....लकड़ी के टुकडो पर उभरती आकृतियाँ ...मोलभाव ...शिपमेंट ...यूरोप ...चेक ..प्राग का वेयरहाउस .... ओस्त्रावा ..बर्नो ....स्लोवाक … ब्रातिस्लावा ......!
बारिश की इस बूँद में देखो दुबई .....यह दूसरी बूँद तुर्की .....इस्ताम्बुल ....ओह .......!
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…और बारिश की इन बूंदों में ये रहा मास्को एयरपोर्ट ……। ये जुलाई -अगस्त २००१ के आस -पास का समय था ! बाउजी सीरियस हैं , ये जानकर आनन-फानन में प्राग से टिकेट लिया और जहाज़ में बैठ लिए , अंतिम समय में बाऊजी से मिलने की ललक ……! मास्को से देलही के लिए अगली फ्लाइट में अभी वक़्त था ! अचानक तेज तूफ़ान … गहन अन्धकार … दिल्ली के लिए फ्लाइट कैंसिल ! हमारे लिए समय काटना मुश्किल ! मौसम साफ़ होने तक अगली फ्लाइट अनिश्चित काल तक के लिए स्थगित ! तूफ़ान की भयंकरता को देखते हुए अगले ८-१० घंटो तक उड़ान की संभावना नहीं …। हमें एयरपोर्ट से होटल ले जाया गया , उम्मीद जताई गयी की मौसम सामान्य होने पर अगली उड़ान से हमें दिल्ली भेज दिया जायेगा ! एयरपोर्ट से होटल के रास्ते के दौरान जगह जगह गिरे हुए पेड़ों को देखकर तूफ़ान की भयावहता का अंदाज़ हुआ ! वह रात कितनी लम्बी थी ....... समय काटे नहीं कट रहा था ! बदन थकान से निढाल था पर आँखो में नींद नहीं थी ! मौसम सामान्य होने पर अगली फ्लाइट से जब दिल्ली पहुंचा , पता चला बाउजी रोहतक पीजीआई में एडमिट हैं , तुरंत रोहतक के लिए टैक्सी पकड़ी ! बाऊजी की हालत खराब थी ! और बाउजी को देखकर मेरी …। बाउजी तो खैर बात करने की हालत में नहीं थे लेकिन सभी सम्बन्धियों से पता चला की अब तो बस १-२ दिन मुश्किल से पकड़ेंगे .... ! बाउजी ने पहचानना बंद कर दिया था ! मुझे सबसे ज्यादा धक्का तब लगा जब उन्होंने मुझे ही नहीं पहचाना ! मेरी आँखो से आंसू बह रहे थे और अपने बाउजी को असहाय-सा अस्पताल के बिस्तर पर देख रहा था ! उस समय मन यह कतई मानने को तैयार नहीं था की बाउजी अब हमारे बीच नहीं रहेंगे ! खैर २-३ दिन जितना संभव था बाउजी की सेवा में लगाये ! इसे चमत्कार कहूँ या भगवान का वरदान की मृत्यु सैय्या पर पड़े बाउजी ठीक होने लगे ! ३-४ दिन अस्पताल में रहने के बाद तो उन्हें छुट्टी दे दी गयी ! अब वो सामान्य होने लगे थे ! अभी २-३ दिन पहले तक मुझे न पहचानने वाले बाउजी की स्मृति लौट आई थी मैं अगर कुछ देर के लिए भी उनके पास से हट जाता था तो बड़ी जोर से आवाज लगाते ! मै उन्हें अखबार सुनाता और किसी बात पर वो इतना जोर से ठहाके लगाते की हमें अचरज होने लगता , हमें हैरान देखकर बाउजी मुस्कुरा देते ! बाउजी सामान्य होने लगे थे और मुझे भी नौकरी का तकाजा था सो कुछ दिन बाउजी के पास बिता कर मैं प्राग लौट आया ! एक नवम्बर २००१ को भाई ने सूचना दी की बाउजी इस नश्वर संसार से विदा हो गए हैं ! मैंने फिर इंडिया के लिए फ्लाइट पकड़ ली ! रास्ते भर बाउजी की स्मृतियों में खोया मैं ये भी सोच रहा था कि तमाम दवाइयों , उपचार और सेवा सुश्रुषा के अलावा भी कोई चीज थी जो बाउजी को भौतिक रूप से कुछ और समय के लिए हमारे बीच बनाये हुए थी …… ! ये कुछेक स्मृतियाँ हैं जो बारिश की इन बूंदों में स्पष्ट दीख रही हैं ! शेष फिर कभी ……। ********
....... बारिश की बूंदे गिर रही है झमाझम …!
ये एक मोटी सी बूँद इधर को निकल आई है और इसमें कितना साफ़ दीख रही हैं ये गगनचुम्बी इमारतें ! भयानक चकाचौंध …… ! ये हांगकांग है ……
वान -चाइ, ताई -कू -शिंग , त्शिम -त्षा -त्सुई (चिम-शा -चुई ) के साथ साथ अड्मिरल्टी , नार्थ पॉइंट, सेंट्रल ....... चाइनीज़ के साथ अंग्रेजी तहज़ीब, भाषा , संस्कृति का अनोखा संगम ! ये दुनिया अलग है ! कितनी ही बार इन गगनचुम्बी इमारतों को देखकर मुझे अपनी लघुता का अहसास हुआ है ! अक्सर काम के बाद मैं ताइकुशिंग की अपनी बिल्डिंग के सातवें मंजिल के फ्लैट की खिड़की में से नीचे के नज़ारे देखता रहता ! नीचे उतरकर भीड़ का हिस्सा बनकर और उस चकाचौंध से मुझे डर-सा लगता था ! मुझे इस माहौल के लिए सामान्य होने में समय लगा ! नई टेरिटरी के शा -तिन, फोटॉन के बड़े-बड़े वेयरहाउस ....शिपमेंट चैकिंग , नए सप्लायर्स के साथ मीटिंग , नए आइटम्स की खोज , उनका मोल भाव , गुणवत्ता की जांच , बैंकिंग , कन्टेनर कार्गो …आदि कामो को निपटाते हुए धीरे धीरे उस माहौल में अपने आप को बैठाने की कोशिश …। कभी हिम्मत कर के सेंट्रल प्लाजा की ४२ वीं मंजिल पर सिर्फ नीचे झाँकने भर के लिए हो आता और रोमांच से भर जाता !
बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल में करीने से सजे हुए सामान और उन पर लगे प्राइस टैग देखकर आश्चर्यचकित सा भारतीय रुपयों में उसकी कैलकुलेशन करता और दांतो तले अंगुली दबाने के अलावा और कुछ न सूझता ! अक्सर ऐसे समय मेरे दिमाग में हिंदुस्तान का अपना छोटा शहर, गली , घर और वहां के लोग घूमते रहते जिन्हे मैं बार बार झटकने की कोशिश करता ताकि कुछ समय वहां के माहौल के मुताबिक अपने आप को ढाल सकूँ और चैन से कुछ समय वहीँ के हिसाब से गुजार सकूँ लेकिन अक्सर ऐसा संभव ना हो पाता !
चीन की संस्कृति, वहां के लोग वहां का पूरा माहौल मुझे आकर्षित करता है ! मेहनतकश लोग …उन दिनों जब मैं चीन में बसों और ट्रेनों में दूर-दूर तक यात्रायें करता था तो देखता था रातों में भी सड़कों को चौड़ा करने का , नई सड़के बनाने का काम चलता रहता था ! हर आदमी जैसे काम में लगा हुआ है ! हर साल लगने वाले व्यापारिक मेलों में पूरी दुनिया से उमड़ती भीड़ चीन की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है ! और फिर सुकून देने के लिए जगह-जगह बौद्ध मठ तो है ही !
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बारिश लगातार जारी है …… !
बालकनी के कांच पर छिटककर ये जो कुछ बूंदे चिपक गयी हैं इनमे से ये एक बूँद में से झांकता पुतु गेडे विदानयाना का चेहरा साफ़ नजर आ रहा है !
बाली …इंडोनेशिया का खूबसूरत टापू ! प्राकृतिक नजारों से भरपूर ! भोले भाले , अपनी संस्कृति को समर्पित लोगों का देश ! इनका ज्यादातर समय अपने देवताओं के श्रृंगार एवं अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को समर्पित होता है ! रात को बांसों से बनाई गयी विंडचाइम की मधुर ध्वनि हर तरफ वातावरण में रस घोलती है ! राइस टेरेस पर घंटो खड़े होकर प्रकृति से वार्तालाप संभव है ! लकड़ी पर की गई इनकी जादूगरी पूरी दुनिया में फैली हुई है ! विभिन्न प्रकार की लकड़ी को काट-छांट कर ये जो रूप देते हैं पूरा यूरोप उसे महंगे दाम चुका कर खरीदता है ! बड़े शहरों वाली चकाचौंध एवं प्रदुषण यहाँ नहीं है ! प्रकृति ने दोनों हाथों से इसे संवारा है ! पूरा इंडोनेशिया वैसे तो मुस्लिम बहुल है लेकिन बाली अकेला टापू है जो हिन्दू बहुल है और सभी बाली -वासी हिन्दू धर्म में गहरी आस्था रखते हैं ! हरेक घर में एक कमरा देवताओं का होता है जिसकी साज सज्जा एवं श्रृंगार से ही उनकी हैसियत बयां होती है ! समय समय पर अपनी यात्राओं के दौरान मैंने आस-पास के एकाध टापू लोम्बाक की भी समुद्र से रोमांचक यात्रा की है ! अधिकतर बालिनीज अपना देश छोड़कर जाना नहीं चाहते हैं ! उनका एक ही मुख्य ध्येय है अपने देवता का बढ़िया से बढ़िया मंदिर बनाना उनका श्रृंगार करना और उनके सन्मुख अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहना !
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बारिश की इस एक बूंद में ये सुबह-सुबह पार्को में विशिष्ट प्रकार से एक्सरसाइज करते लोग , दूसरी में …रेस्त्राओं में भरे पड़े लोग , तीसरी में …… सड़कों पर लोगो का हुजूम, …… बाज़ारो में सामान खरीदते बेचते बेशुमार लोग ....अरे ये तो चीन है !
लोग ही लोग .... लेकिन मैनपावर का सही उपयोग वहां दिखाई पड़ता हैं ! चमचमाते डोमेस्टिक एयरपोर्ट अपने (हिन्दुस्तान के )अंतर- राष्ट्रीय एयरपोर्ट को मात देते हैं ! मैंने देखा है हर आदमी मन लगा कर अपना काम ईमानदारी से करे तभी यह संभव है ! अपने यहाँ सभी को काम से जी चुराने की आदत है ! एयरपोर्ट पर , अस्पतालों में, स्कूलों में , सरकारी दफ्तरों में सफाई कर्मचारी है, लेकिन ईमानदारी से अपना काम पूरा नहीं करने से सभी जगह गंदगी का आलम है ! चीजे बनती है लेकिन सही व्यवस्था एवं देखभाल के अभाव में जल्द ही चरमरा जाती है !

हरेक देश के अपने कुछ विशिष्ट उत्पाद होते हैं जिनमें उनकी कारीगरी , उनकी संस्कृति का स्पर्श होता है , हमारी एक कोशिश ये भी थी की पूर्वी एशियाई देशों के इन विशिष्ट उत्पादों को यूरोप में एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाना ! इसी कोशिश में मेरी यात्रायें निरंतर जारी थी ! थाईलैंड के बैंकाक में लगने वाले ट्रेड-फेयर से सप्लायर ढूंढकर मैं चिआंगमाई की तरफ चला ! यहाँ हाथ की कारीगरी देखने लायक है ! लकड़ी एवं कागज़ के उत्पादों के अलावा कपडे भी यहाँ से ख़रीदे जाते हैं ! दिन भर की थकान के बाद चौराहे पर विभिन्न देशों के अलग अलग खाने के स्टाल के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया जा सकता है ! इसी तरह ताइवान की राजधानी ताइपे से अलग तरह की विंडचिम , कोरिया के सिओल से आर्टिफिशियल ज्वेलरी आदि प्रसिद्ध हैं ! मुझे काम के साथ-साथ वहां के लोग, वहां का खान-पान, वहां की संस्कृति ,पहनावा आदि भी दिलचस्प लगते हैं !
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बाहर की ये जो बारिश है इससे कहीं तेज बारिश चल रही है मेरे भीतर …… भिगो रही है अंतस तक …। अनवरत गिरती बूंदों में कभी प्राग, बर्नो , ओस्त्रावा …… ब्राटिस्लावा … वार्सा … इस्तांबुल। … दुबई … लंदन ! किसको पकडूँ .... किसको उठाऊं .... कशमकश जारी है !
प्राग .... बेहद खूबसूरत .... मेरे प्रवास का अधिकतम हिस्सा प्राग में ही गुजरा ! प्राग ९ में वसातकोवा .... बिल्डिंग न. १०२८ ....पांचवी मंजिल ! कोलबेनोवा का वेयरहाउस .... !
जर्मनी और पोलैंड के बीच में बसा चेक और इसकी राजधानी प्राग …… यूरोप का सेंटर …… ! खूबसूरत वलतावा नदी पर बना चार्ल्स ब्रिज … ओल्ड टाउन स्क्वायर .... अपनी खूबसूरती से मन मोह लेते हैं ! कला और साहित्यप्रेमी लोग सह्रदय हैं ! पुराने समय में चेक में पिस्तोल , रेल एवं गाडी के इंजन बनाने के बड़े-बड़े कारखाने थे ! इन कारखानों में काम करने लिए बड़ी संख्या में वियतनामी लोग यहाँ आकर बस गए , जो अभी भी यहाँ बसे हुए हैं !
कार्लोवी-वारी यहाँ का एक खूबसूरत शहर है ! स्वास्थ्य की दृष्टि से गर्म और ठन्डे पानी के चश्मे हैं ! यहाँ की खूबसूरती मन मोह लेती है ! बर्नो , ज़लिन , ह्रादेस क्रालोवे , प्ल्ज़न , ओस्त्रावा , फ्यरिदेक- मिस्तेक यहाँ के अन्य बड़े शहर हैं ! यहाँ की बीयर दुनिया भर में मशहूर है ! इसी तरह यहाँ क्रिस्टल एवं पोर्सलान से बनी हुई क्रॉकरी विश्व-विख्यात है !
यहाँ के लोग अपनी भाषा ( स्थानीय चेक भाषा ) , संस्कृति से प्यार करते हैं ! जहाँ हांगकांग की चकाचौंध कुछ कुछ आक्रांत करती हैं वहीँ यूरोप के इन शहरों की खूबसूरती दिल को सुकून देती है ! पूरे यूरोप में आर्किटेक्ट लगभग एक जैसा है , इसीलिए शहर एक जैसे लगते हैं , कभी कभी इन्हे पहचानने में मुश्किल हो जाती है ! सड़के, हाई वे , और दोनों तरफ की हरयाली बरबस मन मोह लेती है !
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टिप टिप बारिश की बूंदो में ये जो बार बार जेहन में कौंध रहा है ये लन्दन है ……।
बचपन से दिल में जिस स्थान को देखने की चाह थी , जो जगह हमारे मुहावरों में प्रयुक्त होती थी वहां जाना हुआ बिलकुल अकस्मात … बिना पूर्व योजना के ! हुआ यूँ की हांगकांग से प्राग के लिए मेरी फ्लाइट वाया लंदन थी लेकिन लंदन से कनेक्टेड फ्लाइट प्राग के लिए १२ घण्टे बाद की मिली ! लंदन का वीज़ा चूँकि मेरे पास नहीं था , सो एयरपोर्ट पर ही समय बिताने के लिए हम लोग टहल रहे थे ! अचानक मेरी नजर इम्मीग्रेशन काउंटर पर बैठे ऑफिसर्स पर गयी , अधिकांश काउंटर्स पर भारतीयों को देखकर मैं हैरान हो गया (लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर अधिकांश ऑफिसर्स भारतीय मूल के हैं ) ! मुझे १०-१२ घंटे एयरपोर्ट पर बोर होना था सो मैंने सोचा एक बार अपनी कनेक्टेड फ्लाइट की टिकट दिखाकर एक दिन के वीसा के लिए अप्लाई करने में क्या हर्ज है , शायद बात बन जाए .... और बात बन गयी ! पांच मिनट बाद ही हम एयरपोर्ट से बाहर थे ! एयरपोर्ट अंडरग्राउंड ट्यूब (मेट्रो ) से हम बकिंघम पैलेस उतरे ,वहां कुछ समय टहलने के बाद हम टेम्स नदी के नज़ारे देखते हुए बिग बैंग की तरफ बढे ! समय की कमी और अधिक से अधिक लंदन घूमने की चाह के चलते हमने सिटी टूर की बस को पकड़ा और लंदन दर्शन किये ! लंदन ब्रिज, लंदन आई एवं चर्च देखते हुए समय कब बीत गया पता ही नहीं चला , समय पर एयरपोर्ट भी पहुँचना था , सो कुछ दृश्य कैमरे में कैद करके हम एयरपोर्ट की तरफ चल पड़े
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बारिश की नाचती बूंदो में ये जो दो बूंदे अलग से निकल कर कांच की इस दीवार पर चस्पां हो गयी है इनमे एक में इस्ताम्बुल और दूसरी में दुबई …… !
तेरह साल के विदेश प्रवास में सिर्फ एक बार मुझे डर लगा इस्ताम्बुल में …। धोखाधड़ी एवं जबरन जेब में से पैसा निकलने की यह घटना दुःस्वप्न की तरह जब तब जेहन में कौंध जाती है ! काम के सिलसिले में मैंने अकेले दूर दूर तक लम्बी यात्रायें की है ! चीन के सुदूर प्रांतों में अकेले यात्रायें करते हुए मैंने कभी डर महसूस नहीं किया लेकिन इस्ताम्बुल अपवाद रहा ! उन दिनों यूरोप में एविल्स आई (ब्लू कलर की कांच की गोल प्लेट , जो दिवार पर डेकोरेशन के लिए या बुरे प्रभाव से बचने के लिए लगाते हैं ) का प्रचलन था और यह टर्की का उत्पाद था , सो ये और अन्य सामान के लिए मैं टर्की के लिए चला और ठगा गया ! भौगोलिक दृष्टी से इस्ताम्बुल दो महाद्वीपों (एशिया और यूरोप ) का मिलन स्थल है एवं मस्जिदों का यह शहर दर्शनीय है !
दुनिया भर की खूबसूरती समेटे दुबई खुले दिल से सब का स्वागत करता है ! बुर्ज-अल-दुबई और बुर्ज-अल-अरब दोनों इमारतें यहाँ की शान है ! समुद्र, रेत एवं आलिशान अट्टालिकाओं का यह देश बरबस मन मोह लेता है! विदेश भ्रमण के शौकीन लोगों को एक बार दुबई जरूर जाना चाहिए !
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इन सब के दौरान ईशान और अलीशा नाम के दो प्यारे फूल हमारे आँगन में खिल चुके थे ! अब ये सब भागदौड़ से तनिक निज़ात पा कर इन प्यारे फूलों पर अपना प्यार उँड़ेलने और इनके साथ इस बारिश का मजा लेने का समय था !
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बारिश की इन कुछ बूंदों में शेयर मार्किट के उतार चढाव , कमोडिटी मार्किट के उछाल हैं !
२००६ में मैं हिंदुस्तान वापस आ गया व्यापार के बदलते तरीके और कम्प्यूटरीकरण में शेयर मार्केट की और ध्यान आकर्षित होना स्वाभाविक था ! भान्जे अनूप गोयल के साथ मिलकर सब-ब्रोकरशिप ली और काम शुरू कर दिया ! २०१४ में दक्षिण भारतीय व्यंजनों का शुद्ध शाकाहारी रेस्तरां भिवाड़ी (राजस्थान ) में शुरू किया जिसे बाद में मित्र दुर्गेश के साथ मिलकर नाशिक, महाराष्ट्र में शिफ्ट कर दिया !
अंदर और बाहर की ये जो बारिश झमाझम हो रही है यूँ तो इनमें अनगिनत बूंदे हैं जो ध्यान आकर्षित करती हैं लेकिन इनमे से ये कुछ बूंदे जो बिल्कुल अलहदा छिटक आई हैं ये उनकी एक झलक भर है ! बारिश अनवरत जारी है …। अंदर भी !
अभी तो बस इतना ही --

"बहुत मुश्किल डगर थी जिससे होकर के मैं गुजरा हूँ
मुझे कुछ देर माँ की गोद में सिर रख के सोना हैं !" -----पवन

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