हेल्लो दोस्तों ,

मै अमित राय एक बार फिर एक कहानी ले कर आया हूँ .मेरी पहली कहानी एक अधूरी सी कहानी को आप लोग ने बहुत पसंद किया बहुत प्रतक्रिया आयी आप लोग को उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद् दोस्तों मैं कोई राइटर नही हु राइटर तो पता नहीं सोच के किस किस सागर मै डूब कर मोती निकाल लाते है मैं तो बस अपने आस पास की ही घटनओ से प्ररिते हो कर लिखता हूँ.

वो नहीं मेरा मगर उससे मुहब्बत है तो है
ये अगर रस्मों, रिवाज़ों से बग़ावत है तो है

ये कहानी है सुमित और स्वाति की

शाम के 5 बज गये थे और बनारस से लखनऊ जाने वाली ट्रैन प्लेटफार्म पर लग गयी थी और मैं भारी मन से बैठे भी गया था लेकिन मेरा ध्यान तो उस

चेहरे की तरफ था जिसको स्टेशन की भीड़ मै एक झलक भर देखी थी | मुझे पक्का यकीन था की वो स्वाति ही थी हा वो स्वाति ही थी कई रातो की नींद और महीनो का चैन जिसके लिये गवाया हो उसको कैसे भूल सकते है, जिसके लिये ना मन होते भी कॉलेज जाने का मन करे सिर्फ और सिर्फ उसकी एक झलक पाने के लिए सिर्फ उसको देखने के लिए, और मैं स्वाति को तो किसी भी भीड़ किसी भी अंन्धेरे मै पहचान सकता हूँ.

आखिर उस लड़की को कैसे भूल सकता हूँ साथ साथ पढ़े थे हमलोग. क्लास मै साथ साथ बैठना और फिर क्लास बंक कर के कॉलेज की कैंटीन मे घंटो भर बैठना और वो तुम्हारी दुनिया भर की बातें कैसे भूल सकता हूँ, वो तुम्हारी बातें पता है नेहा रागनी सब मुझसे जलती है वो ऐसा बोलती है वो वैसा बोलती है अगर भूल कर भी तुम्हारी बातें ध्यान से ना सुनना तो वो तुम्हारा गुस्सा हो जाना और बोलना अगर मेरी बातें तुमको बोर कर रही है तो बता दो, मै फालतू मै बोले जा रही हूँ क्या, पुरे क्लास को पता था कि मै तुमसे प्यार करता हूँ बस तुमको नहीं था और होगा भी कैसे मै तुमको कभी बता नहीं पाया और दोस्तों को क़सम दे दिया था की प्लीज उसको कुछ बोलना मत.

स्वाति 8 साल बाद तुमको देखा था वो भी कैसे प्लेटफार्म पर धीरे-धीरे चलती हुई ट्रैन के कुछ 50 मीटर दूर पर देखा था मुझे तो अपनी आँखों पर यकीन नही हो रहा था | खुद को जब तक मैं यक़ीन दिलाता की हाँ वो स्वाति ही है तब तक ट्रैन प्लटफॉर्म पर लग चुकी थी और स्वाति किसी भींड़ मे खो गयी थी, मैं तो ये भी नही देख पाया था की वो ट्रैन मे ख़ुद चढ़ने आयी थी या किशी को छोड़ने आई थी ,शायद अपने पति को छोड़ने आई होगी या कोई रिश्तेदार कॊ एक झलक मे कहा कुछ देख पाया था

8 साल पहले कितने धूम धाम से शादी हुई थी उसके ससुराल वाले बहुत अमीर थे करोड़ो का बिज़नेस था, स्वाति की खूबसूरती और उसके गुण देख कर ख़ुद लड़के की माँ ने अपनी तरफ से रिश्ता भेजा था और बिना दहेज़ की शादी हो रही थी स्वाति के पिता के लिए तो वो बहुत बड़ी बात थी एक साधरण परिवार के लिया तो बहुत बड़ी बात थी तो पूरा परिवार बहुत ही खुश था और मैं कभी उससे बता नही पाया मैं तुमसे प्यार करता हूँ रुक जाओ ये शादी मत करो आखिर क्या बोलता उसके पाप से की जॉब नही है लेकिन घर बसाना चाहता हूँ , प्यार करना और प्यार जाहिर ये दोनों बहुत बड़ी बात है मुझको प्यार करने मे महारात हासिल थी लेकिन प्यार कॊ ज़ाहिर करने की हिम्मत नही थी और स्वाति कॊ सपने मे थोडे आता होगा की मैं उससे प्यार करता हूँ या उसको कभी लगा भी हो तो वो थोडे बोलेगी और ना प्यार की कभी आकाशवाणी होती है, बल्की प्यार तो बदनसीब खामोश नींद सो जाता है.

खैर एक बुरे मन के साथ अपने पहले और आखिरी प्यार कॊ अपने से दूर जाते हुए देखता रहा स्वाति की शादी हो गयी, और मैंने भी मन ही मन से उसको अलविदा कह दिया था उसकी शादी के कुछ महीनो बाद ही मैं अपना शहर छोड़ कर दिल्ली आ गया था अपने कुछ नए सपनो के साथ.

लेकिन स्वाति यहाँ क्या कर रही है बनारस मे, हो सकता है है अपने घर वालो से मिलने आई हो मैं सोचना लगा क्या मैं जा कर मिलूं उससे उसका हाल पुछू कैसी है वो ,लेकिन ये भी सोचना लगा क्या पता वो पहचाने ना तो, लेकिन हाल पूछने पर बुरा थोडे मान जायगी ये सोच कर मैं बैठ गया और अपना फ़ोन निकाल कर कुछ देखने लगा, चलती ट्रैन के साथ-साथ मेरे ख्यालो का सफ़र भी जारी था.

आखिर कर मैंने सोच लिया की जो भी हो मुझे मिलना है स्वाति से ये सोच कर मै उसकी तरफ चल दिया

कुछ बोगी चलने के बाद मेरी नज़रे उसको ही ढूंढ रही थी तभी एकएक मेरी नज़र एक बर्थ के कोने मे बैठी स्वाति पर पड़ी, बिखरे हुए बाल आँखों के निचे गढ़े क्या ये वही स्वाति है जो कॉलेज की स्टाइल क्वीन हुआ करती थी एक बार के लिया तो मै स्वाति को पहचान नहीं सका की ये वही लड़की है, इतनी ख़ामोश बैठी हुई स्वाति नहीं हो ही नहीं सकता वो तो दिन भर बक बक करने वाली लड़की थी यही ख्याल मेरे दिमाग मे चल रहा था.

फिर मैने सोचे लिया की मुझे स्वाति से बात करनी ही होगी,और मै उसकी तरफ चल दिया और पास की एक शीट पर जा कर बैठ गया लेकिन स्वाति का ध्यान तो कही और ही था पता नहीं क्या सोच रही थी वो, तभी मैंने उसको तरफ देखते हुआ बोला हेलो मैडम कहा ध्यान है आप का एकाएक मेरी आवाज सुन कर वो सकपका सी गयी और मेरी तरफ देखने लगी, मैंने बोला ध्यान कहा है तुम्हारा वो मेरी तरफ बड़े ध्यान से देखने लगी और थोड़ा मुस्कुरा कर बोली ओह सुमित तुम यहाँ कैसे.? तुमने तो डरा ही दिया था मुझे.

थँक्स गॉड की तुमने पहचान लिया मुझे लगा की इतने दिन हो गए क्या पता पहचानो या ना और मै हसँने लगा, वो बोली यहाँ कैसे इतने दिन बाद कहा हो आज कल तुमने तो अपने शहर आना ही छोड़ दिया तुम्हारे घर गयी बहुत बार लेकिन वहाँ ताला लगा हुआ पाया आस पास के लोग से पता चला की तुमने शहर ही छोड़ दिया ऐसा क्यों.?

मैंने बहुत ही लापवाही से उसकी तरफ़ देखते हुआ बोला बस ऐसे ही ज़िन्दगी की भाग दौड़ और कुछ सपनो को पूरा करने के लिया ऐसा करना पढ़ा क्या.

और क्या बताता की यहाँ आने की कोई वजह नहीं थी मम्मी पापा तो पहले ही छोड़ कर जा चुके थे और जिससे प्यार करता था उसकी शादी हो गयी थी तो फिर ये यहाँ आने की क्या वजह हो ये शहर तो कटे की तरह चुभता था मुझे, तुम्हारे साथ वो बीते हुए पल तुम्हारी यादें और परेशान करती थी मुझे और फिर मेरा वहा था कौन एक बड़ी बहन थी वो अपने पति के साथ दिल्ली रहती थी तो उनके बार बार बुलाने पर मै आ गया.

मैंने बोला मेरी छोड़ो अपनी बताओ यहाँ कैसे अकेले हो क्या तुम्हारे mr. कहा अब तो तुम्हारे बच्चे भी होंगे, मैंने सवालो की लाइन लगा दी थी वो मेरी तरफ देख रहीं थी उसका चेहरा एक दम मुरझा सा गया मानो वो बोल रही हो की सुमित तुमने ऐसा क्यों पूछा.?

मैंने फिर जोर दे कर पूछा बताओ क्या हुआ है.? वो धीरे से बोली ठीक है सुमित मै तुमको सब बता रही हूँ पहले मुझे यहाँ से ले चलो कही और अकेले मै मै तुमसे कुछ नहीं छुपना चाहती. फिर हम शीट से उठ कर ट्रैन के एक कोने मे जा कर खड़े हो गये, फिर मैंने स्वाति की तरफ देखा वो मेरी तरफ़ देख कर रोने लगी उफ्फ कुछ भी हो सकता है लेकिन मै स्वाति के आँखों मे आंसू नहीं देख सकता जिस लड़की से पहला प्यार किया हो उसकी आँखों मे आंसू कैसे देख सकता था ये मेरे लिया सबसे मुश्किल का समय था, मैंने किसी तरह स्वाति को चुप कराया.

वो बस मेरी तरफ़ देख रही थी वो चाह कर भी कुछ नहीं बोल रही थी और मै बस उसकी तरफ़ देख रहा था बहुत मुश्किल से वो चुप हुई और बोली उसकी शादी तो बहुत अच्छे से हो गयी थी लेकिन उसके ससुराल वालो अच्छे नहीं थे, उसका पति एक नंबर का शराबी बदचलन और आवारा लड़का था मतलब एक बड़े घर का बिगाड़ा हुआ लड़का था. उसके घर वालो को एक अच्छी बहू नहीं बल्कि एक गरीब घर की लड़की चाहिये थी जो उसके शराबी लड़के की जुलमो को सह सके, उसके पति ने भी ऊसपर पर जुल्मो की इन्तहा कर दी थी हमसे शराब के नशे मे रहता था. शराब तक तो ठीक था लेकिन कुछ दिनों बाद तो उसको खूब मारने पीटने लगा था और बेचारी स्वाति सब उसके जुल्मो को बिना कुछ कहे सहती रही..

स्वाति जैसी खूबसूरत गुणी लड़की के साथ कोई ऐसा कैसे कर सकता है वैसी लड़की तो जिसके भी क़िस्मत मे होगी वो खुदकिस्मत ही होगा इतनी प्यारी लड़की पर कोई हाथ कैसे उठा सकता हैं मेरे दिमाग मे यही चल रहा था

फिर स्वाति ने आगे की बात स्टार्ट किया उसके पति की यही सब चलता रहा कुछ समय के बाद जायदा शराब पीने से एक दिन उसका पति इस दुनिया से चल बसा स्वाति पर तो मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

पति के इस दुनिया से जाते ही सुसराल वालो के तो तेवर और सख्त हो गये पहले उसको कोई थोड़ी बहुत बात तो करता था लेकिन पति के मरते ही सास और ननद ने ताने देना लगे सास बोलने लगी मेरे बेटे को खा गयी डायन,कुलक्छणी और पता नहीं क्या क्या गालियाँ उसको मिलने लगा घर मे कोई उससे बात नहीं करता था सब उसको ताने देने लगे. अब भला इसमे उस मासूम सी लड़की का क्या दोष उसके पति की शराब पीने की लत ने उसकी जान ली वो तो अपना घर बार सब छोड कर आयी थी

ये तो हमारे समाज की बुरी आदत है अगर नई बहु घर मे आये तो अगर कुछ बुरा हुआ तो उसी को सब दोष देते है कोई ये नहीं सोचता की जो हुआ उसके पीछे वजह क्या थी

बस यही हुआ स्वाति के साथ भी, एक दिन तो हद हो गयी जब उसकी सास ने उसको मर पीट कर घर से भागा दिया और वो बेचारी चुपचाप रोते हुए घर से चली गयी आखिर करती भी तो क्या करती कौन था उसका वहां कौन उसकी बात सुनता सबके मन मे तो उसके लिया बस घृणा और नफ़रत ही था वो बेचारी बेबसी और किस्मत की मारी थी चुपचाप वो अपने पापा के घर आ गयी और अब वही रहने लगी थी उसके घर वालो ने भी यही सोच लिया था की उसकी किस्मत मे यही लिखा है शायद.

इतना सब बताने के बाद वो मुझसे लिपट कर रोने लगी, स्वाति की बातें सुनने के बाद मै यही सोच रहा थी की उस लड़की की क्या गलती भगवान तुमने ऐसे क्यों किया इतना दुःख भगवान किसी को कैसे दे सकता है.

बहुत मुश्किल से मैंने स्वाति को चुप किया वो चुप तो हो गयी थी पर मेरी तरफ देख रही थी और मै उसकी तरफ उफ्फ स्वाति तुमने इतना सब बर्दाश्त किया और मै यही सोच रहा था की तुम अपने परिवार के साथ खुश होगी

फिर थोड़े समय बाद मैंने पूछा और फिर क्या कर रही हो तो उसने बताया की मन बहलाने के लिए लखनऊ के एक छोटे स्कूल मे नौकरी करती है टीचर की उसकी ये सब बात सुनने के बाद मेरे अंदर स्वाति के लिए और इज़्ज़त बढ़ गयी थी फिर मैंने पूछा की अब आगे क्या करना है तो वो बोली करना क्या बस मेरी तो ज़िन्दगी बस यही तक थी.

मेरे पास अब दो रास्ते थे या तो मै स्वाति को उसके हाल पर छोड़ दू या फिर स्वाति को अपनी ज़िन्दगी बना लू, स्वाति की वो वीरान और मुरझाई हुई ज़िन्दगी मै फिर से प्यार भर दू, और स्वाति मै तुमको इस हाल पर कैसे छोड़ सकता हूँ, जिस लड़की से मैंने सच्चा प्यार किया है उसको इस हाल पर कैसे छोड़ सकता था और वो भी जब स्वाति को मेरी जरूरत है, ये दूसरा रास्ता ही मेरे लिए ठीक है.

मेरे दिल मे स्वाति के लिये वही पुराना प्यार जग गया था जो दिल के किसी कोने मे दब गया था मैंने उसी पल सोच लिया की स्वाति जो भी बहुत नाइंसाफी हुई है तुम्हारे साथ लेकिन अब नहीं.

मैंने फिर स्वाति की तरफ़ देखा वो एक दम खड़ी बेजान बूत की तरह खड़ी थी, मैंने बोला स्वाति बहुत नइंसाफी हुई है तुम्हारे साथ लेकिन अब नहीं वो हैरान भरी नज़रो से मुझे देख रही थी. फिर मैंने कहां आज मैंने एक फैसला किया है मै तुम्हे अपनी ज़िन्दगी मै शामिल करने जा रहा हूँ तुमसे शादी करना चाहता हूँ जो खुशियाँ तुमको जो नहीं मिली वो देना चाहता हूँ .

स्वाति एक दम हैरानी भरी नज़रो से मुझे देख रही थी और बोली तुमको कुछ पता भी है क्या बोल रहे हो पता है सब लोग क्या कहेंगे ये समाज क्या सोचगा तुम क्यों एक विधवा की बेरंग ज़िन्दगी मै रंग भरना चाहते हो.?

मैंने तुरन्त उसकी बात को काटते हुए कहा कोई क्या सोचता है मुझे फर्क नहीं पड़ता और ये समाज और लोग तब कहा थे जब तुम्हारे साथ इतना सब नइंसाफी हुई तब तो कोई नहीं आया. और हम इस समाज इस दुनिया सब से दूर कही अपना प्यार का घर बनायंगे जहाँ बस हम और तुम होंगे जहाँ ढेर सारी खुशियाँ होगी हमारे नये सपने होंगे बस. देखो सुमित तुम्हारी ये सब बातें कहने मे अच्छी लगती है सुनने मै अच्छी लगती है पर ये सब बिलकुल ठीक नहीं है घर वाले क्या सोचेंगे ये सब बिलकुल ठीक नहीं है.

तुम इतना क्यों डर रही हो कुछ नहीं होगा अगर तुम साथ हो तो मै इस ज़माने समाज सब से लड़ सकता हूँ तुम्हारे घर वालो से मै बात कर लूंगा बस तुम्हारी मर्जी होनी चाहिए तुम्हारे दिल मे क्या चाहता है बस बाक़ी सब मेरे पर छोड़ दो मै सब देख लूंगा.

इतना बोलने के बाद मै स्वाति की तरफ़ देखने लगा वो एक कोने मे एक बुत के जैसी खड़ी थी और मेरी ही तरफ देख रही थी और उसके आँखों से आंसू निकल रहे थे,वो मेरी ही तरफ़ एक टक लगये देख रही थी मुझे कुछ समँझ मे नहीं आ रहा था की क्या करू. फिर मैंने स्वाति को गले लगा लिया वो और जोर से रोने लगी थी मैंने बोला बस स्वाति अब ये तुम्हारे आख़री आंसू है अब कभी तुमको रोने नहीं दूंगा कभी अकेला नहीं छोडूंगा ये वादा रहा अब हमको कोई जुदा नहीं कर सकता. बहुत मुश्किल से वो चुप हुईं उसने कुछ बोला तो नहीं लेकिन उसकी आंखे सब बता रही एक अजीब सी शांति थी उसके चेहरे पर. एक सुख़द अहसास था उसके चेहरे पर और मै वही तो देखना चाहता था.


तो दोस्तों ये थी एक कहाँनी बहुत मुश्किल से लिखा है आशा है आप को पसंद आयेगी . अपनी प्रतिकिया का इंतज़ार रहेगा जरूर जवाब दे.


अमित राय की क़लम से

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