मेघा

“तेरे लिये हम हैं जिये, हर आंसू पीये......”

“लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो न हो......”

“आंखो मे तेरी , अजब सी अजब सी अदाये हैं......”


......उफ आज तो Fm रेडियो वालो ने हद कर दिया था। दिल्ली की व्यस्त जिन्दगी से जो थोडी बहुत खामोश रातो को मैं खुद के लिये निकाल पाता था उस दिन उस 30वी मंजील की छत पे मैं खुद को इन्ही सब गानो के बिच छोड देता था। इतनी ऊंचाई पर खामोशी मे जो सुगबुगाहट पैदा होती थी उसका कारण ये गाने और इनसे दिल में पैदा हो रहे भाव थे। रात के दो पहर बीतने के बाद भी आंखो की पलको का झुकना मुश्किल हो रहा था। सनसनाती हवाये जिस्मो से टकराकर कुछ पल के लिये ऐसा महसूस कराती थी जैसे समुद्र अपने उंची लहरो से पुरी ताकत के साथ आकाश को छु लेना चाहता हो, पर हर बार नाकामी हासिल हो रही थी। FM वाले भी कहाँ रुकने वाले थे, उनकी तरफ से लागातार ऐसे गाने बजते जा रहे थे जो दिल मे कई सारे यादो को एक साथ पैदा कर रहे थें। खामोश दिल के अन्दर बढ रही बेचैनी, स्थिर नजरो मे उभरती किसी की तस्वीर और सांसो का उठना और गिरना, इन सारी भावनाओ को समेटे होठो पे बस एक ही शब्द आ रहे थे, “मेघा” जो हवाओ मे मिल बदन से टकरा रहे थे और हर बार की तरह उन पुरानी यादों को ही ताजा कर जा रहे थे। सुदुर उंचाई पर एक प्लेन जलता बुझता अपनी मंजील की तरफ जा रहा था। मेरे आंखो ने मेरे दिल को उस प्लेन की धीमी गती के साथ पुराने लम्हो मे एक बार फिर धकेल दिया था......

Some years ago,

Somewhere in Bihar.

“How airplanes fly, I mean what is the physics behind airplanes fly?” Mishra sir asked to us.

ये 12वी की क्लाश थी। मिश्रा सर हमे भौतिकी पढाते थे और भौतिकी समझ मे आते हुये भी मेरी उनसे कभी बनी नहीं। उनके प्रश्न का जवाब जो दे रहा था, साँरी , जवाब जो दे रही थी, उसकी अवाज सुने बिना तो मेरे दिन कटते ही नही थे। उसके अंग्रेजी बोलने के फ्लुएंट तरीके, चेहरे का एक्स्प्रेशन , उफ कयामत थी वो। मै पिछे मूड उसे सुन रहा था या उसे देख रहा था , मुझे पता नही था। वो बस जारी थी,...

“Aerodynamic Forces, Airfoils, gravity and much more are the reason behind airplanes fly. In aerodynamics, airplane wings are called airfoils. They have a cambered shape which enables them to produce lift, even for angles of attack (α) equal to zero. The figure below shows a cross-sectional view of an airfoil, with nomenclature shown. . . . .


उसने तो अच्छा खाशा लेक्चर दे दिया।

उसके चुप होने के बाद सर ने उसे शाबासी दी और मुझे कहाँ,

“समर, आगे देखेगो तभी भी सुनाई देगा”

”नही सर, आप जब कुछ बताते हो तो मै आपको सुनता भी हूँ और देखता भी हूँ, वही काम मै कर रहा था। सुन भी रहा था और देख भी रहा था।”

“अच्छा ये बात हैं”

”हाँ ये बात हैं”

“खैर छोडो इसे, तो सुना आपने what is the reason behind airplanes fly”

सर अब अपनी भाषा मे सबको समझाने लगे। क्लास खत्म हुई। कोचिंग के बगल से ही एक गली निकलती थी जो आगे जाकर मेन रोड मे मिलती थी। हमारा क्लास evening period में था , सो निकलते वक्त शाम हो जाती थी। मै बस युँ ही जा रहा था उस गली से तभी हमेशा की तरह वो मेरे बगल मे आई , उसने मेरे कदमो से कदम मिला कर मेरे हथेलियों को प्यार से अपनी हथेलियों मे थामा। हमने एक दूसरे की तरफ देखा और हमारी आंखो मे एक प्यार के साथ होठो पे मुस्कान तैर रही थी।

“कर क्या रहे थे तुम आज क्लास में?” मेघा ने बडी ही मासूमियत से मुझसे पुछा।

“बस निहार रहा था तुम्हे”

“ऐसा मत किया करो क्लास में, लोगो को शक होगा, बातें बढेंगी”

“बातें बढेंगी तो छोड दोगी हाथ मेरा”

“कैसी बातें करते हो, ऐसा कभी नही होने वाला”

“Thanks जान , अच्छा एक बात बताउ मैं, मुझे लगता हैं मिश्रा सर शायद flirt करते हैं लडकियो को और तुम्हे भी”

“Stupid, he is teacher and he is not doing this type of activity”

मेघा ने मुझे डांटा। मैं और मेघा एक दुसरे को कई सालो से जानते थे। एक दूसरे को देखे बिना एक दिन भी नही कटता था हम दोनो का, जिस्म भले ही अलग था पर जान एक थी, शायद सांसे भी।

आने वाला समय कितना भयावह था , इसका मुझे कोई अन्दाजा नही था। हमारी दोस्ती जो मोहब्बत मे बदल चुकी थी और एक दुसरे के संग ढेर सारे सपनो की ईमारत खडी कर रही थी, इस सपने पर किसी तीसरे की नजर थी इसका मुझे अन्दाजा भी नही था और जो इस बात से वाकिफ था उसे इसमे कोई खातरा नजर नही आ रहा था।

Delhi

हमारे 12वी के फाईनल एग्जाम के result आने के बाद हम दोनो ने दिल्ली यूनिवर्सिटी मे दाखिला ले लिया था। उसका तो बस एक ही सपना था, प्रोफेसर बनना। वो कहती,

“जब मेरे नाम के आगे डाँ लगेगा तब, कितना अच्छा लगेगा न, डाँ मेघा सिंह”

“अच्छा तो लगेगा , लेकीन एक बात बताओ, जब तुम अपने नाम के आगे डाँ. लगाने के लिये दिन-रात एक कर के पढोगी, तब तुम्हारे पास मुझसे मिलने का वक्त नही होगा और तब मेरा दिल बिमार पड जायगा, तो फिर मेरा क्या होगा कालियाँ”

वो हँसने लगी, और फिर,

“मैने आपसे प्यार किया है सरदार, आपको भुलुंगी कैसे”

“मुझे तो नही लगता कि आपने मुझसे प्यार किया हैं”
“क्यूं?”

“कई दिनो से अहसास नही हुआ हैं प्यार का, दिल को और होठो को भी”

“अच्छा बच्चू , होठो को प्यार का अहसास चाहिए”

मै खामोश था। उसने मेरे गालो को ऐसे पकडा जैसे मेरे बच्चे जैसी हरकत पर वो मुझे सजा दे रही हो। हम दोनो के चेहरे करिब थे, थोडी देर बाद वो मुस्कुराई और उसने अपनी उस मुस्कान को समेट कर मेरे दिल पे एक छाप छोड दी। आई. एन. ए. की मैट्रो स्टेशन पर हम दोनो के शिवा बस एक चिज थी , खामोशी और थोडी देर मे आते मैट्रो ट्रेन की आवाज।

हमारे subjects अलग अलग थे और हमारा final year चल रहा था. जुन की इस गर्मी मे हालत खराब थी दिल्ली की। हम दोनो एक ही मोहल्ले मे अलग अलग flats मे रहते थे तो शाम मे हर रोज एक दुसरे के लिये थोडा वक्त निकाल पार्क में मिलते थे और ये याद उन्ही सारे दिनो में से एक था।

वो काले सलवार-कमीज मे किसी......, पता नही मैं क्या कहूँ, हाय , वो बहूत खुबसुरत लग रही थी। मैं पार्क मे पहले ही पहुँच चुका था। वो थोडी देर से आई और हम दोनो एक दुसरे को देख कर हमेशा की तरह मुस्कुरा रहे थें, और उसे देख कर ऐसा लग रहा था आज तो बारिश जरुर होगी।

“हाय, क्या लग रही हों”

उसने मेरे इस compliment को किसी और अन्दाज मे लिया और हसते हुये पुछा,

“क्या लग रही हूँ मैं?”

“क्या लग रही हूँ मैं, अरे मेरे कहने का मतलब था, बहुत खुबसुरत लग रही हों”

“सच में”

“हाँ”

“thanks dear”

दिल्ली के पार्क मे बैठने से ज्यादा अच्छा होता हैं, पार्क के चारो तरफ टहलना। उसकी उंगलियो ने मेरे उंगलियो को खुद मे ऐसे उलझा रखा था जो मुझे हर वक्त उस situation में ये अहसास दिलाता था कि मैं, मेरी हर राहो पे अकेला नही हूँ, कोई हैं सम्भालने वाला। एक दुसरे से कदम से कदम मिला हम चले जा रहे थे जहाँ कभी कभी हमारी नजरें एक दुसरे से मिल डूबने को बेताब थी। मुझे अच्छा लगता था जब वो मुझसे किसी बातो पे थोडा-बहुत खींचा-तानी करती थी।

“आज कल गर्मी बहुत हैं, क्यो हैं न”

“हाँ”

“बारीश भी नही हो रही हैं, temperature है कि रुकने का नाम ही नही ले रहा हैं, बढता ही जा रहा हैं। तुम्हे पता हैं, कब होगी बारिश?”

“पता नही”

”पता नही, कैसे पता नही, आपको तो पता होना चाहिए”

“क्युं, मुझे क्युं पता होना चाहिए, मै कोई मौसम विभाग मे काम करती हूँ क्या?”

“नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं हैं”

“तो फिर कैसी बात हैं?”

“मेघा नाम हैं आपका, और उपर से आज ये खुबसुरत काली dress, किसी चलते फिरते घनघोर बादल से कम नही लग रही हो तुम, मुझपे तो बरस जाओ कम से कम, दिल को ठंडक दे दो, please”

“ओये होये, बडी ही बेचैनी है बारीश मे भिंगने को” उसने मेरे गाल को फिर वैसे ही पकडा।

“पर तुम इस बैचैनी को समझ भी तो नही रही हो”

“हर चिज का एक वक्त होता हैं” बडी ही धीमी अवाज मे कहाँ उसने।

“क्या कहाँ आपने?”

“कुछ नहीं”

“मुझे लगा कि कुछ कहाँ आपने”

“अच्छा एक बताओ, अगर आने वाली हमारी जिन्दगी की राहें एक दुसरे से अलग हो या मै ना रहू तो फिर कैसे रह पाओगे तुम?” उसने पता नहीं ये सवाल क्यूं पुछा।

“क्या?”

“बताओ क्या करोगे तुम?”

“दो बातें करुंगा मैं, पहली बात ये कि अगर वैसी जिन्दगी मे तुम खुश रहती हो तो तुम्हारी राहो पे कभी नहीं आंऊगा मैं और दुसरी बात ये कि मेरी सुनसान राहों पे मेरे हाथो को जिसने थामा है उसे मै युं ही नही छोड सकता।

“हाय, इतना ज्यादा प्यार ना करो यार कि कभी जिना ही मुश्किल हो जाये, आंखो की निन्द ही उड जाये और सपनो मे भी नजर ना आऊ मैं”

“अब प्यार हैं तो हैं, और ये मेरे साथ ही खत्म होगा?”

“अब खत्म होने की बात ना करो, एक तो मै serious बात कर रही थी अब तुम भी शुरु हो गये और आइन्दा से खत्म होने की बात की न तो समझ जाना, मुझसे बुरा कोई ना होगा” उसने अपने भौं को तान कर थोडे गुस्से में कहा। वो इस पोज मे भी काफी खुबसुरत लग रही थी।

“Ok ok calm down dear , नही करुंगा मै ऐसी बात, चलो मै आज का अपना पहला question फिर से शुरु करता हूँ, कब आयगा वो वक्त?

“किस चिज का?”

“बादलो के बरसने का”

“जल्दी ही” वो हंसने लगी और मै उसकी हंसी मे किसी चिज को ढुंढने लगा था।

Next morning

जब मैं उठा, तब जा कर confirm हुआ कि finally light तो हैं, पिछली रात को तो power greed वालो ने जो light काटा था वो कई घंटो तक दिया नही था जिसकी वजह से मेरा mobile dead हो चुका था।

मैने mobile charge मे लगाया और washroom मे fresh होने चला गया और जब आकर उसे on किया तो missed call alert ने कई सारे notification दिखाने शुरु कर दिये। करीब 20 notification थे मेघा के call के, मैने उसे call किया। रिंग तो हो रहा था पर वो फोन उठा नही रही थी, और कई सारे रिंग हो चुके थे। मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा था, मैंने अपनी t-shirt पहनी और थोडी ही देर मे मैं उसके दरवाजे के सामने था। मैने उसके दरवाजे पे नाँक किया लेकीन ये क्या, दरवाजा तो खुला था और जैसे ही मेरे कदम उस कमरे के अन्दर पडे बिल्कुल जम से गये। सामने बेड पर उसकी खून से लथ-पथ लाश पडी थी। सारी दुनिया रुक सी गई थी मेरे लिये अचानक से। आंखो से आंसू निकलना तो दूर, दिमाग भी काम नही कर रहा था। मैं बस उसके चेहरे को देख रहा था। थोडी ही देर मे बात आग की तरह फैल गई थी और पुलिस ने अपना काम शुरु कर दिया था।

उसने उस दिन मुझे कई सारे call किये थे जिसकी वजह से पुलिस ने मुझसे कई सारे सवाल-जवाब किये। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उसके साथ जबरदस्ती हुई थी और फिर बात छुपाने के लिये मर्डर। किसने किया था, पुलीश अब तक पता नही कर पाई थी।

दो-तीन महीने बित चुके थे। पुलिस कुछ कर नहीं पाई थी। उसके parents थाने के चक्कर कई बार काट चुके थे, पर हर बार मायूसी ही हाथ लगी थी।

मेरा हाल ये था कि मै बुत सा बन गया था। कुछ समझ नही पा रहा था कि ये किसने किया था। कुछ लोगो पे शक था लेकीन वे थे कौन ये पता नहीं था। मेघा ने मुझे एक दो महिने पहले ऐसा कुछ बताया था पर वो ज्यादा serious थी नहीं । उसने कहा था कि मोहल्ले के कुछ लडके उसे flirt करते हैं और जब मैने उससे उनके बारे मे पुछा कि वो कौन है तो उसने इस बात को इग्नोर करने को कहा। पुलिस थाने मे मेरी कई बार बहश हो चुकी थी। पुलीश ने उसके कमरे से जो डायरी बरामद की थी उसके बारे मे वो कुछ बता भी नही रही थी। मीडिया में ये बात बस दो-तीन मिनट की न्युज बन कर रह गई थी।

पार्क की उन राहो मे मेरे कदमों से कदम मिलाने वाला कोई नहीं था, नाहीं वो उंगलियाँ जो मेरे उंगलियों मे उलझी रहती थी तभी अचानक मुझे कुछ याद आया और मै तेजी से बगल के cyber caffe मे computer screen के सामने था। मेरे gmail id का password उसके पास था और उसने ही ये तय किया था कि वो अपनी हर दिन की बातें मेरे google drive मे लिख कर save किया करेगी। मैने कई दिनो से उस drive को open नही किया था और अब जब open किया और उन सारी बातों को पढना शुरु किया तो उसमे उसने कई सारी पुरनी बातों का जिक्र किया था जिन्हे याद कर दिल को थोडा बहुत सुकून मिल रहा था और finally एक पेज पर उसने उन लडको के बारे लिखा था, नाम सहीत।

मुझे बस ये कंफर्म करना था कि ये वही थे और तब थाने के हवलदार ने कंफर्म किया कि बडे अधिकारी इस बात को दबाना चाहते हैं। उस building के cctv footage से उन लडको के बारे मे जब उन्हे पता चला तो उन्हे अच्छी-खासी रकम मिली इस बात को दबाने के लिये। उन लडको का political connection भी था।

चार महिने बित चुके थे उस घटना को। पिछले दो महीनों से मैं उनके पिछे लगा हुआ था कि कब वे एक साथ मुझे मिले और finally वो दिन आ गया।

मेर कोई ऐसा connection था नही तो उस हवलदार की मदद से मैंने एक gun का arrangement किया। होटल की 34वी मंजील पे उनका जश्न जारी था, आखिरी जश्न। कमरे मे घुसते ही ताबडतोड गोलियो की बरसात ने उन्हे झटके मे ही मौत की निन्द सुला दिया। अगले दिन ये बहुत बडी न्युज बन चुकी थी कि किसी अग्यात अपराधी ने चार लोगो का मर्डर किया और पुलिस नाकाम थी solid evident जुटाने मे कि उस होटल के cctv footage मे दिख रहा नकाबपोश आदमी मैं ही हूँ।


अगले एक महीने के बाद B.ca final year का result out हुआ और M.ca की पढाई शुरु हुई। खुद को busy रखने के लिये मैंने एक बडी software company मे interview दिया और जाँब शुरु किया, क्योकि ये उसकी चाहत थी। उसने drive के note मे लिखा था कि,

...... अगर मुझे कुछ हो जाये या किसी वजह से मै तुम्हारी जिन्दगी से दुर चली जाऊ तो उदास मत होना यार और नाही दिन रात मुझे सोचना। भुला देना मुझे....खुद को busy रखना, तुम्हे मेरी कसम।

Present time

कई कई महिने हो जाते है उसकी कसम को निभाते हुये पर कई दफा टूट भी जाते हैं।

उसकी मौत का जिम्मेदार कही न कही मैं भी था, काश उस दिन मोबिले dead नही रहता और तब मै उसके call को receive कर पाता, तो वो जिन्दा रहती शायद आज।

उसके साथ बिताये हर लम्हों को समेट कर उसकी शक्ल नजरों के सामने आ रही थी। अब सुकून भरी निन्द से दूर दूर का नाता नहीं था। सही कहाँ था उसने, सपनों में भी नही आती थी वो पर आंखो में हर वक्त बसी थी वो जिसने सारे आँसुओ को पी लिया था और जिसकी वजह से दिल का धडकना आज भी जारी था।

कुछ देर पहले ही अचानक से उमड आये बादलो की पहली बुन्द मेरी खुली हथेलियों पे गिरी। दिल को कुछ अहसास हुआ, शायद मेघा आज बरसने वाली थी। उस पुराने लम्हो को याद कर होठो पे हंसी आई थी और पलकों ने सारी यादो को समेट कर खुद को हल्के से बन्द किया।

और तभी रात के तीसरे पहर की शुरुआत Fm रेडीयो वालो ने इस गाने से किया,......


“ चलते......चलते, युँ ही कोई मिल गया था, सरे राह चलते चलते......”

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