ऑटो स्टैंड से लेकर मेट्रो स्टेशन तक सिर ही सिर , चेहरे ही चेहरे – रंग –बिरंगे । फेरीवालों की आवाज़ , मोची की क़तार , सस्ते कपड़ों की फुटपाथी दुकानें और इन सबके बीच डोलते भिखारी । कुछ ने तो अपनी जगह मुस्तैदी से पक्की कर ली है । जैसे एक लंगड़ा भिखारी ऑटो स्टैंड के पास , बूढ़ी माता मेट्रो स्टेशन की पहली सीढ़ी पर फेविकोल से चिपके हुए मिलेंगे । कुछ बच्चे भी सीढ़ियों पर भागते –दौड़ते हाथ पसारते और कुछ मिल जाने पर खिलखिलाते हुए।

मैं इनमें से हरएक को रोज़ तो नहीं , कभी-कभी कुछ न कुछ दे दिया करती हूँ। पैसे, दाल- चावल ,ब्रेड –बिस्कुट –कुछ भी। ये भी खुश होकर ले लेते हैं मगर वह नौ साल की बच्ची ,गंदी फ्रॉक ,बिना चप्पल के धूप में पैर जलने से बचाती हुई, एक थाली में काली माँ की तस्वीर रखकर मेरे पास आई और बिना कुछ कहे उसने थाली आगे बढ़ा दी । मैंने पर्स में हाथ डाला ,मगर कुछ सोचकर पैसे नहीं निकाले और उससे कहा “बेटे, देवी माँ से भीख मत मँगवाओ ।“

वह कुछ नहीं बोली , यंत्रवत आगे बढ़ गई, दूसरे दाता की ओर। दूसरे दिन वही लड़की मेट्रो स्टेशन की सीढ़ी पर डोलती नज़र आई। आज हाथ मे वह थाली नहीं, एक कटोरा था। मैंने उस कटोरे में बिस्कुट का पैकेट डालना चाहा तो उसने झट से मना करते हुए कहा “बिस्कुट नहीं, पैसे चाहिए”। मैंने हैरानी से पूछा “तुम इन पैसों से खाना ही तो खरीदोगी , मैं खाने के लिए दे रही हूँ ना !”

“नहीं , पैसे चाहिए । ”

उसने दृढ़ता से जवाब दिया।

“मगर पैसे ही क्यों ?”

मेरी बात का उसने कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गई। मैं भी सीढ़ियाँ उतरने लगी ,मगर दिमाग उसके वाक्य पर ही टिका रहा। कभी किसी ने खाने की चीजों को इस तरह नहीं ठुकराया था। खैर ,अपने काम में मैं भूल -सी गई। दो दिन बाद वही लड़की अपने चीकट फ्रॉक का अगला भाग फैलाकर पैसा माँगती नज़र आई। पहले तो मैंने सोचा, इसे नज़र अंदाज़ कर दूँ, फिर मेरी जिज्ञासा मुझे वहाँ घसीट ले गई। मैंने उसे टोका,

“मैं तुम्हें पाँच रुपए दूँगी ।पहले बताओ कि तुमने उस दिन बिस्कुट लेने से क्यों मना किया ।“

“ये अपना धंधा है मेमसाब । हमसे सिर्फ पैसा लेने को कहा गया है, खाना लेंगे तो मार पड़ेगी” कहकर उसने मुस्कुराने की कोशिश की । चेहरे पर करुण भाव उमड़ता , उसके पहले ही उसने व्यावसायिक मुद्रा में कहा, “ मेमसाब मेरे पाँच रुपए !”

उसे रुपए देकर मैं आगे बढ़ गई मगर कान में उसके स्वर बहुत दूर तक पीछा करते रहे ... ये अपना धंधा है मेमसाब ... धंधा है …..

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