ओय्य्....! एक खूबसूरत आवाज मेरे कानों में पड़ी,मैने पीछे मुड़कर देखा तो वो ,वैसे वो का मतलब वही जो रोज मेरे ख्वाबो में आती थी जिसे मैं चाहता था हिरनी जैसी आंखे थी | तभी उसने मुझे फिर बुलाया विकी ....मैं पीछे मुड़ा और उसकी तरफ देखते हुये खुद पर इशारा किया मैं...उसने अपना सिर हा में हिलाया ...मैं सहसा डर गया यार पोल खुल गयी क्या यार आज तो मरे उसकी सैंडिल से बेटा आज गाल सूजा तेरा ऐसा मेरे दिमाग ने मुझसे कहा ...मै साईकिल खड़ी करके बैग लेकर उसकी तरफ बढा हालाकिं दिमाग मेरा मुझे डरा रहा था पर दिल उम्मीद लगाये था ...मैं उसके सामने पहुचां और उससे बिना नजरें मिलायें बोला हां जबकि मेरा गला सूख गया था ...लेकिन फिर खुद को स्थिर करके बोलता कि उसने शुरू कर दिया यहां और कोई भी विकी है क्या जो एक बार में न सुनें ....मै फिर कुछ बोलता उससे पहले उसने मुझे एक मोटी बुक पकड़ा के कहा कि ये लो इसे आशीष को दे देना मैंने राहत की सासं ली और पीछे मुड़ते हुये कहा ठीक है फिर मै कुछ ही कदम चला था कि उसने कहा यार मैथ की बुक होगी क्या मैंने पीछे मुड़कर कहा हां है उसने कहा मुझे दे देना मैने ठीक का इशारा किया जबकि मैथ से तो मेरा बहत्तर का आकड़ा था हालाकिं मैने उसे इंटरवल में बुक का इंतजाम करके दे ही दिया उसने भी हौले से शुक्रिया किया......

स्कूल में जैसे ही छुट्टी हुई मैं अपनी R15 साइकिल लेकर निकला और फिर धीरे-२ चलने लगा आज तो दोस्तो का इंतजार भी नही किया ....अभी कुछ दूर ही चला था कि मोदी जी कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन मेरे बगल से निकली जिसमें वो सवार थी किसी सैनिक की तरह सिर्फ सीधे देख रही थी वैसे मैंने भी अपनी साईकिल को तेज किया और उसके बगल से निकाल कर आगे फिर धीरे हो गया फिर वो मुझसे आगे निकली मैं फिर उससे आगे फिर वो मोड़ आ गया जहां से हमारे रास्ते अलग होते है ...वो उस मोड़ पर मुड़ गयी और अपने जुल्फो की ओट से मेरी तरफ देखा .....

" आगे फिर किसी और दिन "

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