मोबाइल पर बात ख़त्म करते हुए अबीर ने मानसी को आवाज़ दी.
सुनो ! अब जल्दी से बताओ, कब चलोगी ? मैं बात करके उनसे मिलने का वक़्त तय कर लेता हूँ . "अबीर ने कहा .
नन्हें को नहलाने में व्यस्त मानसी ने पूछा " पर कहाँ " तो अबीर झल्ला उठा
"इतनी देर से तुम्हें कह तो रहा हूँ ,अनाथालय और कहाँ. वहीँ से तो फोन था. पता चला है एक नवजात बच्ची अभी ही आई है वहां. हमारा नन्हा 3 साल का हो गया. ये सही वक़्त रहेगा दूसरा बच्चा गोद लेने का.
''ओके, थोड़ा सोचने तो दो. बाद में बताती हूँ. “मानसी ने थोड़ा टालमटोल करते हुए जवाब दिया .
‘अरे, तुम्ही तो ये चाहती थीं . अब बेटा हमारे पास है तो बेटी गोद लेंगे. बार –बार इतने छोटे बच्चे थोड़ी मिल पाते हैं. वो तो हम अनाथालय से इतने दिनों से जुड़े हैं तो सबसे पहले उन्होंने हमे खबर दी. ‘सुबीर ने फिर से जोर देकर कहा
‘अभी इतना बड़ा भी नहीं हुआ है हमारा नन्हा '' दूसरा छोटा बच्चा आ जाने से इसकी परवरिश पर असर पड़ेगा.’’ कहती हुई मानसी नन्हे को टॉवेल में लपेट कमरे में ले आई .
अबीर हतप्रभ हो याद करने लगा वो दिन जब वो पहली बार मानसी से मिला था.
माँ ने देख कर मानसी को उसके लिए पसंद किया था. फोटो वो भी देख चुका था. मानसी भी उसका फोटो देख उससे मिलना चाहती थी. अब वो दोनों एक दूसरे से मिलकर बात कर लें ,एक दूसरे को पसंद कर लें तो बात आगे बढ़ेगी.
अबीर मानसी से मिला तो बेहद खूबसूरत और सर्वगुण सम्पन्न मानसी उसे पहली ही नज़र में भा गई थी. उसे एक पल भी नहीं लगा था शादी के लिए हामी भरने में.
मानसी को भी अबीर बेहद पसंद आया. पर सकुचाते हुए मानसी ने एक अजीब-सी शर्त रख दी थी. वो चाहती थी कि शादी के बाद उनका एक ही बच्चा हो. एक बच्चा वो अनाथालय से गोद लें
अबीर अचरज में पड़ गया ‘’ मगर क्यों ? ‘’
ताकि एक अनाथ को परिवार मिल सके. कम से कम एक अनाथ को तो हम उसका घर दे पायें “ मानसी का कहना था.
आदर्श के रूप में देखें तो मानसी की सोच बेहद अच्छी थी .पर क्या घर के लोग तैयार होंगे ? इस शर्त को वो स्वीकारेंगे ? वो सोच में पड़ गया था.
वो अच्छी तरह सोच कर ज़वाब देने का कह कर ये ज़ाहिर कर आया था कि वैसे उसको मानसी बहुत पसंद है.
घर आकर उसने सबको बताया तो माँ भी मानसी की ये अजीब-सी शर्त जान कर परेशान हो उठी थी.वो तो इस रिश्ते के लिए मना ही करने लगीं. पर दादी भ शर्त सुन कर कुछ क्षण चुप रहीं, फिर कुछ सोच कर हँसते हुए बोलीं शर्त स्वीकार लो और कह दो कि खुद का बच्चा पैदा ही नहीं करेंगे. अगर मानसी को ये मंज़ूर न हो तो फिर अपनी भी एक शर्त रख दो कि पहले अपना बच्चा होने के बाद ही दूसरा गोद लेंगे. दादी ने इसके आगे जो कुछ कहा उस पर विश्वास करके अबीर ने अपनी शर्त मानसी के सामने रखी.
खुद का बच्चा न हो इस बात के लिए वो नहीं मानी, पर पहले अपना बच्चा हो इसके लिए तुरंत तैयार हो गई. दादी ने अबीर को सिखाया ही कुछ इस तरह था. अबीर ने तर्क दिया था कि खुद का बच्चा पहले हो जाने से सबको ये प्रतीत नहीं होगा कि उन्होंने मजबूरी में गोद लिया है. और खुद का बच्चा जो पैदा होगा उसके अनुसार दूसरा बच्चा गोद लेने में आसानी होगी. अगर बेटा पैदा हुआ तो बेटी गोद लेंगे और बेटी हुई तो बेटा गोद लेंगे. मानसी को दोनों ही बातें सही लगीं.
उस के सहर्ष शर्त स्वीकार कर लेने से सब बातें तय हो गईं. फिर शीघ्र ही उनकी शादी भी हो गई. शादी के करीब 2 साल बाद नन्हा पैदा हुआ और अब वो 3 साल का हो गया था.
वक़्त था दूसरा बच्चा गोद लेने का.
वो लोग लगातार एक अनाथाश्रम से जुड़े हुए थे .नियमित वहाँ जाते. आर्थिक सहायता देते .ये भी ध्यान रखते कि उनके द्वारा दान की गई राशि का सही उपयोग हो रहा है या नही.
बेहद उत्साह से अनाथाश्रम जाने वाली मानसी अब धीरे –धीरे वहाँ जाने के नाम से टालमटोल करने लगी. नन्हें के आने के बाद मानसी में बहुत परिवर्तन आया था. उसकी दुनिया नन्हे से शुरू होकर नन्हे पर ही ख़त्म होती थी. दिन भर बस नन्हे के साथ व्यस्त. कुछ हद तक अबीर भी उससे दूर हो गया था.

तभी काँच टूटने की जोरदार आवाज़ से अबीर का ध्यान टूटा. दौड़ कर अन्दर गया. काँच का गुलदान नन्हे ने शैतानी करते हुए तोड़ दिया था. डर कर रोते हुए नन्हे को उठा कर मानसी चुप कराने लगी. अबीर को अचानक एक दिन पहले की घटना याद आई. मानसी की बेहद घनिष्ठ मित्र आई हुई थी अपने परिवार के साथ. उसका बच्चा करीब –करीब नन्हे की ही उम्र का था. दोनों बच्चे साथ खेल रहे थे . उस बच्चे ने बॉल फेंकी, जो काँच के गिलास से टकरा गई. गिलास गिर टूट गया. मानसी ने उसे शैतानी के डाँटते हुए अच्छे से खेलने को कहा और आज ? नन्हे की शैतानी देखते हुए भी उससे एक शब्द भी नहीं कहा. ये देख उसने पूछ ही लिया
“तुमने कल अपनी सहेली के बेटे को डाँटा था उसकी शैतानी के लिए और आज नन्हें को डाँटने के बदले प्यार कर रही हो ?
“अपने बच्चे पर भला कोई गुस्सा होता है?’’ मानसी ने मुस्कुराकर जवाब दिया.
अबीर फिर अतीत में डूब गया था. दादी की मानसी की शर्त की बात मान कर उसके बदले खुद की शर्त रख देने की बात से उसे थोड़ा डर लगा था. उसने दादी से पूछा था “पहले बच्चे के जन्म के बाद मानसी अपनी बात मनवाना चाहेगी और तब वो यदि मना करेगा तो ये तो क्या ये वादा तोड़ने जैसा नहीं होगा ? कैसे समझा पायेगा उस वक़्त वो मानसी को ?
दादी ने गम्भीर होते हुए कहा था कि अपना बच्चा होने पर अव्वल तो वो दूसरा गोद लेना चाहेगी ही नहीं. उसे दूसरे बच्चे को घर में लाना सुहायेगा ही नहीं. पर फिर भी यदि वो जिद करती है तो देखना क्या मानसी अपने और दूसरे के बच्चे में कोई फर्क करती है ? क्या किसी और के बच्चे को उतना ही प्यार और अधिकार दे पाती है ? अगर हाँ ,तो फिर तुम उसकी इच्छा ज़रूर पूरी करना, अन्यथा बिल्कुल भी नहीं. सख्ती से मना कर देना.
गोद लिए बच्चे के साथ तुम भेदभाव करोगे, उसे पूरी तरह प्यार नहीं दे पाओगे तो ये उसके साथ अन्याय होगा. उस से ज्यादा अच्छा तो यही होगा कि तुम अनाथालय में ही किसी होशियार और काबिल बच्चे को वहीँ रहते हुए उसकी पढाई और परवरिश में सहायता दो.
अबीर दादी की बात याद करते हुए अतीत से निकला और कहा
“ सुनो, मुझे लगता है नन्हा तो आ ही गया है हमारे जीवन में. दूसरा बच्चा गोद लेने की बात बाद में कभी ठीक लगा तो सोचेंगे. उसके बदले अनाथालय के कुछ बच्चों को पढने के लिए सहायता कर दिया करेंगे. “
उसे बिलकुल ऐसा प्रतीत हुआ मानो मानसी ने राहत की साँस ली. उसने चुपचाप सिर हिलाकर हाँ की और नन्हे को गोद में उठा कर सुलाने के लिए अन्दर कमरे में चली गई. इतनी आसानी से उसकी बात मानकर मानसी को जाते देख अबीर को दादी की कही अगली बात याद आ गई थी.
“’माँ होना आसान है पर दूसरे के बच्चे की माँ बन कर उसे प्यार देना बहुत ही कठिन है “

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