रात ११:४५ , अशोक विला, मुंबई 

- हेलो ...सोनू , मैं तुम्हे बहुत मिस करता  हूँ.. काश तुम यहाँ होती..मेरे पास..मेरी बाँहों में ..

- राकेश, इसके आलावा तुम्हे और कुछ दिमाग में क्यूँ नहीं आता..

- तू है ही इतनी हॉट...जानेमन..

- अगर एसे ही बाते करनी है तो मैं जा रही हूँ...बाय..

- रे रुको रुको सोरी ...बुरा क्यों मान जाती हो यार ..

- अच्छा सुनो. कोई दरवाजे पर है मुझे जाना होगा. 

- ठीक है, जल्दी आओ. मैं यहीं हूँ लैपटॉप लिए.

 

(५ मिनट के बाद)

 

- राकेश, कुछ अजीब हुआ?

- क्या हुआ ?

- किसी ने डोरबेल बजाई और बाहर कोई नहीं मिला...लेकिन एसा लगा जैसे कोई बच्चा था..भैया-भाभी पार्टी में गए है उनको आने में अभी कमसेकम तीन घंटे है.

- हा...हा...हा ... डर रही हो तुम..

- बाय. नहीं बात करनी मुझे.

- रुको रुको...मजाक कर रहा था सोनू. कुत्ता- बिल्ली होगा. तुम खामखा परेशान हो रही हो.

 

( रसोई में बर्तन गिरने की आवाजे आती है )

 

- राकेश, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है. कोई तो है यहाँ. जैसे कोई बच्चा तूफानी कर के भाग जा रहा हो..

- सोनू, जाकर देखो तो सही किचन में.

 

राकेश भी अब चौकन्ना हो गया था.  वो ध्यान से स्क्रीन को देख रहा था. तभी उसने कुछ अजीब देखा. सोनू के बेडरूम के कोने में रखा टेबल लेम्प बुजबुजा रहा था. और एकदम से  किसीने लैपटॉप घुमाया जिससे स्क्रीन हिल गया और वापस क्लियर होने में १ मिनट जितना टाइम लग गया. फिर कुछ टाइम तक कुछ नहीं हुआ. उसने सोनू को आते हुए देखा.

 

- लैपटॉप, क्यों हिलाया?

- क्या बोल रहे हो? मैं अभी अभी किचन से आयी हूँ. और लैपटॉप वैसे ही पड़ा है.  राकेश, किचन में कोई था तो नहीं लेकिन एक अजीब सी बदबू आ रही थी और यह खिलौना मिला. ( वो एक लेगो का पिस दिखाती है)

- राकेश, क्यों न तुम कुछ टाइम के लिए यहाँ आ जाओ. मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है. 

- सोनू , डरो मत. मैं जल्द से जल्द पहुचने की कोशिश करता हूँ.

 

राकेश ने लैपटॉप खुला ही छोड़ दिया और कार की चाबी लेकर निकल पड़ा. आधे घंटे में वो अशोक विला पहुँच चूका था. पहली ही डोरबेल पर सोनू ने दरवाजा खोला. वो डर की मारी कांप रही थी. पसीना पसीना हो चुकी थी. कुछ भी बोलने के होश में नहीं थी. उसने राकेश को खिंच कर वहा से भाग चलने का इशारा किया. दोनों घर की चाबी ढूंढने लगे. इतने में अंदर से दरवाजा तेजी से बंध हो गया. 

( २ घंटे बाद )

 

भैया भाभी के आवाजे देने पर भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्हों ने पुलिस बुलाई और दरवाजा तोडा गया. दोनों की खून से लथपथ लाशे मिली.

अन्दर क्या हुआ किसीको पता नहीं चला. लेकिन यह सब अनजाने से ही राकेश के लैपटॉप में कैद हो गया था. छानबीन करने पर पता चला की लैपटॉप की हार्ड डिस्क क्रेश  हो गई थी.

 

( २५ साल बाद, अशोक विला )

 

- पापा ...पापा ...यह सीडी में क्या है ...

- नहीं पता बेटा, चाचा का सब सामान है उसको छूना मत...

और वो बच्चा अपने पापा को पीछे से घुर रहा है और हंस देता है...

 

 

 

 

 

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