जोहरा आपा की जिंदादिली को मेरा सलाम

जोहरा आपा की जिंदादिली को मेरा सलाम राजीव आनंद

एक प्रतिबद्ध नृत्यांगना, रंगमंचीय एवं फिल्मी कलाकार जोहरा सहगल जिसे प्यार से लोग जोहरा आपा कहते थे, का 102 वर्ष की आयु में 10 जुलाई, 2014 को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. जोहरा आपा के जाने से भारतीय कला एवं सांस्कृतिक इतिहास का एक स्वर्ण अघ्याय समाप्त हो गया. 27 अप्रैल 1912 को उतरप्रदेश के सहरानपुर में एक परम्परागत मुस्लिम परिवार में जन्मी जोहरा सहगल का पूरा जीवन कला और संस्कृति को समर्पित रहा. 1935 में रंगमंच के दिग्गज उदय शंकर के साथ नृत्यांगना के रूप में अपनी करियर की शुरूआत की और फिर उन्हें पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा. परम्परागत मुस्लिम समाज में पली-बढ़ी जोहरा सहगल एक स्वच्छंद विचार की लकड़ी थी और अपनी स्वच्छंदता को उन्होंने हर संभव कायम रखा. 1942 में उन्होंने एक हिन्दु वैज्ञानिक एवं कलाकार कामेष्वर सहगल से प्रेम विवाह किया यद्यपि उनका वैवाहिक जीवन मात्र एक दशक का रहा क्योंकि 1952 में कामेश्वर सहगल का निधन हो गया. जोहरा सहगल अपने प्यार को खोने के बाद भी विचलित नहीं हुई बल्कि बहुत ही धैर्य और गंभीरता से अपने एक बेटे पवन और एक बेटी किरण को अपने अब्बू की कमी महसूस नहीं होने दिया. रंगमंच और सीनेमा दोंनों ही क्षेत्रों में जोहरा सहगल ने समान ख्याति अर्जित की. उनकी भूमिकाओं को फिल्म ‘चीनी कम’, ‘दिल से’, वीर जारा’, हम दिल दे चुके सनम’, दिल्लगी’, सांवरिया और हालीवुड फिल्म ‘बेंड इट लाइक बेकहम’ को काफी सराहा गया. आधुनिक भारतीय मंचीय कला के दिग्गज उदय शंकर और फिल्मी दिग्गज पृथ्वीराज कपूर के साथ जोहरा सहगल ने काम किया था और ‘पृथ्वी थिएटर’ के बतौर सदस्य उन्होंने पूरे देष के कई शहरों के रंगमंच पर अभिनय किया. जोहरा आपा का पूरा जीवन ही कला को समर्पित रहा और उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने खुद को कभी आप्रसांगिक होने नहीं दिया. 1935 में उदयशंकर के बैले से शुरू हुआ उनका कला जीवन आज के निर्देशकों जैसे संजय लीला भंसाली और बाल्की के फिल्मों में काम करते हुए बीता और उन्हें कल के कलाकारों एवं दर्षकों ने जितना सराहा उतना ही आज के कलाकारों एवं दर्षकों ने भी सराहा. जोहरा और कामेश्वर की जोड़ी उस दौर के प्रगतिशील, आर्दशवादी कलाकारों के उस समूह के सदस्य थे जो न सिर्फ कला और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत थे अपितु एक बेहतर समाज के लिए भी संघर्षरत थे. जब जोहरा सहगल बम्बई जाकर इप्टा और पृथ्वी थिएटर में काम करने लगी तो अपनी बहन उजरा बट को भी रंगमंच के दुनिया में ले आयी और ‘बट सिस्टर्स’ के नाम से रंगमंच पर अपनी अलग पहचान कायम की. शादी के बाद जोहरा के पति भी इप्टा और पृथ्वी थिएटर से बतौर सदस्य और कलाकार जुड़ गए. इप्टा उस दौर में बामपंथी विचारधारा से जुड़ा संगठन था जिसमें उस दौर के महान कलाकार कैफी आजमी, बलराज साहनी, अली सरदार जाफरी, चेतन आनंद, शलैन्द्र, अनिल विश्वास, ख्वाजा अहमद अब्बास, सज्जाद जहीर, सलील चैधरी षामिल थे. पृथ्वी थिएटर जिसे पृथ्वीराज कपूर चलाते थे, न सिर्र्फ फिल्मों से जुड़ी थी बल्कि रंगमंच की दुनिया में इप्टा के बाद दूसरी बड़ी संस्थान थी. इप्टा और पृथ्वी थिएटर के इन आदर्षवादी जुझारू प्रगतिशील कलाकारों ने जिस कला और संस्कृति की एक समृद्ध परंपरा कायम की, उसकी अंतिम कड़ी जोहरा आपा थी. जो गुण एक कलाकार को महान बनाता है मसलन घमंड़ न होना, अपने वरिष्ठता का बोझ दूसरो पर नहीं थोपना, पेशेवर प्रतिबद्धता और हमेशा मेहनत करने में सक्षम होना आदि जोहरा आपा में कूट-कूट कर भरा था. खुद को प्रासंगिक बनाए रखने का गुण ही जोहरा आपा को 102 वर्षो की लंबी आयु बख्शी थी. जोहरा आपा की जिंदादिली को मेरा बार-बार सलाम.

प्रोफेसर कोलोनी, न्यू बरगंड़ा, गिरिडीह-815301 (झारखंड)़ सेल फोन-9471765417

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