‘‘क्यों भई संजीव जी आपने अपनी 8 वीं कक्षा में जिन बच्चों ने सुन्दर-सुन्दर, साफ सुथरे व अच्छे-अच्छे प्रोजेक्ट बना कर दिए, उन्हें कम अंक दिये बताए। जिस बच्चे ने गन्दा काम किया तथा सफाई का ध्यान न रखा, उस छात्र को सर्वोच्च अंक दिये सर आपने ऐसा क्यों किया? प्रधानाचार्य जी ने अपने अघ्यापक से पूछा।
‘‘सर हम बच्चों से प्रोजेक्ट बनवाते हैं ताकि उनकी योग्यता का पता चले। पर सभी बच्चों के माँ-बाप क्या करते है ......मेरे बच्चे का नम्बर ज्यादा आ जायें ऐसा सोच कर स्वयं ही प्रोजेक्ट तैयार कर देते हैं। इस तरह बच्चों की योग्यता का आंकलन कैसे हो सर ? इसीलिए मैंने जिस बच्चे ने प्रोजेक्ट अपने हाथों से बनाया है उसे ही सबसे अधिक अंक दिये। मैंने जो किया वह ठीक है ना सर?’’ संजीव सर ने कहा।
‘‘बिल्कुल आपने जो किया वह सौ प्रतिषत सही है। आपकी सोच बिल्कुल सही है व सच्चाई पर आधारित है। मै इस हफ्ते बाल सभा में इस बारे में सबको बताऊँगा।’’ ऐसा कहकर संजीव सर को धन्यवाद दे कर वहाँ से रवाना हो गए।

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