सच्चे चेहरे झूंटे चेहरे

ग़ज़ल

   सच्चे   चेहरे    झूंटे  चेहरे
   देखेे    कैसे   कैसे   चेहरे ।

    आँखों से कुछ ओझल चेहरे
     आँखों में  कुछ  ठहरे चेहरे ।

  भूखे  प्यासे  सहमे  सिकुड़े
    देखे  रोज़  बिलखते  चेहरे ।

      जीना  मुश्किल  कर  देेते हैं
      फ़ित्ना  जैसे  चुभते  चेहरे ।

  दौलत,शौहरत,ग़ैरत,तोहमत
  कितने  रंग   बदलते  चेहरे ।
 
      दिल  के  दर्द   छुपा  लेते  हैं
      फूलों  जैसे   हँसते   चेहरे ।

     इश्क़ अगर  हो  जाए ' मंथन '
     लगते  हैं  रब   जैसे   चेहरे ।


( ग़ज़लकार- राजेश मंथन )

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