सच्चे चेहरे झूंटे चेहरे

ग़ज़ल

सच्चे चेहरे झूंटे चेहरे

देखे कैसे कैसे चेहरे ।


आँखों से कुछ ओझल चेहरे

आँखों में कुछ ठहरे चेहरे ।


भूखे प्यासे सहमे सिकुड़े

देखे रोज़ बिलखते चेहरे ।


जीना मुश्किल कर देते हैं

फ़ित्ना जैसे चुभते चेहरे ।


दौलत ,शौहरत ,ग़ैरत,तोहमत

कितने रंग बदलते चेहरे ।


कितने दर्द छुपा लेते हैं

फूलों जैसे हँसते चेहरे ।


इश्क़ अगर हो जाए ' मंथन '

लगते हैं रब जैसे चेहरे ।


( ग़ज़लकार- राजेश मंथन )

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.