निलम घाडगे की मराठी कहाणी का हिंदी अनुवाद

निलम घाडगे की मराठी कहानी का हिंदी अनुवाद

साक्षी का फोन बजा !!! मधु का फोन था

कल का क्या ??? साक्षी ?? मधु ने कहा

हम एक साथ ही जाएँगे ना शाम को !!!

अरे पर कहाँ ????

साक्षी......यार तू फिर से भूल गयी...आज मंगेश की शादी है ...और उसने हमारे पुरे कॉलेज ग्रुप को

बुलाया है !!!!

सॉरी यार मै भूल गयी !!!!ओके ठीक है हम जाएँगे आज...

शाम को मधु और साक्षी शादी में पहुंच गयी !!! बहुत सालों बाद सब मिले थे !!! कुछ लोग दुल्हेराजा

के पास खड़े रहकर फोटो निकाल रहे थे...कुछ गप्पे लड़ा रहे थे तो कोई खाना खाने कि लाईन में

थे....मधु और साक्षी ने भी नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएँ दि !!! और वो भी खाना खाने के लिए

लाईन में खड़ी रह गई.....तभी पीछे से किसी ने आवाज दि..

हाय !!

साक्षी ने पीछे देखा और उसके चेहरे की हँसी ही गायब हो गई.....क्योंकि पीछे....निशांत खड़ा था !!!!

हाय !!!!

हाय !! साक्षी ने भी फॉर्मेलिटी के लिए कहा और फिर आगे खड़ी हो गई !!!!

निशांत के आगे साक्षी नॉर्मल बर्ताव कर रही थी फिर भी अब पुरा अतीत उसके सामने आया

था..वह मन से फिर दुःखी हो गई थी.....आँखों मे "गुस्सा और आँसु" एक ही वक्त हाजिर हुए थे !!!!

दो साल पहले का अतीत साक्षी के सामने खड़ा हो गया !!!!!

निशांत....चलो ना मुव्ही देखने चले, बाद में मस्त रोमांटिक ड्राईव !!! चलो ना !!

साक्षी...क्या ये छोटे बच्चों की तरह हमेशा यहाँ चले वहाँ चले !!!! हमेशा रोमांटिक...बी नॉर्मल यार !!

और अभी हम बच्चे नहीं है !!! निशांत ने गुस्से में कहा !!!

साक्षी.....साक्षी...मधु कि आवाज से साक्षी अतीत से बाहर आ गई...

कहाँ ध्यान है तेरा !!! आर यु ओके ना??

हम्म...मै ठीक हूँ !!! बोल तू क्या कह रही थी !!!!

अरे यही कि मंग्या को बीवी फिर भी बहुत अच्छी मिली है ना !!!

ए... मंग्या क्या बोल रही है, अब उसकी शादी हुई है...कमसे कम उसकी बीवी के सामने तो ठीक से

नाम ले..!!!!

साक्षी भले ही मधु से बात कर रही थी मगर उसकी आँखे कुछ और ही ढूंढ रही थी...

चल ना मधु हम चलते है....साक्षी ने कहा

क्या यार साक्षी बहुत बोर हो गयी है तु आजकल !!! तु रुक ईधर ही मै हमारे लिए कोल्ड्रिंक्स लेकर

आती हू...देख फिर तेरा मूड कैसे फ्रेश होता है वो !! आयी मै !!!!

साक्षी अब अकेली ही खड़ी थी...और सामने से निशांत आ रहा था !!!

हाय !!! तुम अकेली ही???

वो मधु कोल्ड्रिंक्स लाने गई है !!!

ओके | बाय द वे...तुम बहुत अच्छी दिख रही हो साड़ी में !!!

थैंक यु !!! साक्षी जितना हो सके उतना ही बोल रही थी !!!

गुस्सा हो क्या????

क्या???? मै क्यू गुस्सा होऊ किसीपर !!

साक्षी उसको पूरा इग्नोर कर रही है ये अभी तक निशांत को समझ आ गया था !!!

दुसरे किसी पर नही मुझ पर गुस्सा हो क्या??? ऐसा पूछ रहा हूँ और "तुम्हे गुस्सा आ गया तो

तुम्हारा चेहरा पूरा लाल होता है, यह पता है मुझे !!"

तुम क्यो आये हो अब????? साक्षी ने गुस्से में कहा

आय एम् एक्सट्रेम्ली सॉरी !!! यार मुझे पता है मेरी बहुत गलतीयाँ है, मुझे जो चाहे वो सजा दो...पर

प्लीज् ऐसे अजनबी की तरह बर्ताव मत करो प्लीज् !!!

मुझे कुछ भी सुनना नही है !!! ये मधु कहाँ गई है !! ऐसा कह के साक्षी वहाँ से निकल गयी !!!

उस रात साक्षी फिर से एकबार बहुत रोई...फिर से वह अतीत उसके सामने आया था !!!

साक्षी और निशांत एक ही कॉलेज में थे !!! निशांत साक्षी का सीनियर था !! निशांत दिखने में एकदम

हीरो टाइप, मोडर्न !!! कॉलेज की बहुत सारी लड़कियाँ उसपर फिदा थी !!! तो साक्षी पतली, घुंघराले

बाल, बोलती आँखे, आँखों पे चश्मा...सावली पर प्रभावी व्यक्तित्व !!!

दोनों की पहचान लायब्ररी में हो गयी वह भी फिल्मीअंदाज में !!!

कभी लायब्ररी में पाँव न रखनेवाला निशांत आज परिक्षा के पहले दिन पढ़ाई करने के लिए आया

था !!! क्योंकि घर से ताकिद मिली थी....इस साल कुछ भी कर के पास होना ही चाहिए इसलिए !!!

निशांत ने इधर उधर देखा और सीधे साक्षी के बाजू में जाकर बैठ गया !!! साक्षी ने उसकी तरफ

एक बार देखा और फिर नोट्स निकालने लगी !!! पर निशांत का फिर भी पढ़ाई में बिल्कुल मन नही

लग रहा था !!!

हाय !!! आय एम् निशांत !!!

साक्षी ने फिर एक बार गर्दन उठा कर देखा...और चेहरे पर एक छोटीसी स्माईल दि और फिर सिर

किताब में डाल दिया !!!

निशांत को ये थोडा अलग लगा !!! अन्यथा यही वह दुसरी किसी लड़की से बोला होता तो अबतक

वह फिदा हो गई होती !!! हम्म...ये कितना भाव खा रही है???

क्या कर रही हो??? निशांत फिर से बोला |

अब साक्षी को गुस्सा आ गया था !!

डांस कर रही हूँ !!! आओगे??????

हा हा !!! पीजे मस्त !! आय लाईक ईट |

क्या प्रोब्लेम है तुम्हारा???? लायब्ररी में टाईमपास करने आए हो क्या????

सच कहू क्या???? सच तो मुझे बिल्कुल इंटरेस्ट नही है !!! बट घरवालों ने लास्ट वॉर्निंग दि है, इस

साल कुछ भी कर के पास होना ही चाहिए !!! इसलिए सबकुछ !!

ओह्ह !! फिर करो ना पढ़ाई !!! ऑल द बेस्ट !!! ऐसा कह के साक्षी सब बुक्स समेट कर निकलने

लगी !!!

और हाँ....पढ़ाई ऐसे जबरदस्ती से नही होती !!! उसको अपनाना पड़ता है | पहले उसके लिए "फर्स्ट

फिल इट, देन रीड इट एंड लास्ट स्टडी इट"...ऐसा कह के साक्षी तो निकल गयी | पर निशांत फिर

भी उसको पीछे से अभी भी देखता रह गया....

उस रात रह रह के निशांत को साक्षी कि याद आ रही थी !!!

क्या बोली सच में वह !! अनजाने में ही सही साक्षी ने निशांत के मन में जगह बना ली थी !!

दुसरे दिन फिर से उसी वक्त निशांत लायब्ररी में पहुँचा !!!

और वह फिर यहाँ वहाँ देखने लगा !!! पर आज तो साक्षी उसको दिखी नही !!! निशांत उतरे हुए

चेहरे से बाहर निकलने को और तभी साक्षी कि एंट्री हो गयी !!!

क्या कहाँ थी तुम??? मुझे लगा निकल गयी तुम !!!

निशांत के इस तरह अधिकार से बोलने से दंग रह गई साक्षी !!

पर उसके अगले ही पल खुद को संभालते हुए बोली !!

क्या???? हम जानते है क्या एकदुसरें को???

अरे यार....क्या तुम भी !!! कल ही तो हमारी दोस्ती हुई थी ना !!!

दोस्ती...हमारी?? तुमने खुद ही तय किया ये? ठीक है....

फिर मेरा नाम क्या है??

निशांत अब फिर गड़बड़ा गया !!!

नाम वो...तुमने.....नाम कब बताया??

हाँ तो फिर हमारी दोस्ती कैसे हो गयी !!!

साक्षी ने फिर से तमाचा लगाया यह निशांत अब अच्छे से समझ गया था !!!

क्या घमंड है रे इसको !!! जब देखो तब नाक पर गुस्सा रहता है !!!

खुद से ही बड़बड़ाते हुए निशांत भी निकल गया !!!

आगे कॉलेज कल्चरल प्रोग्राम शुरू हो गए...और तैयारी शुरू हो गई....साक्षी बहुत अच्छा नृत्य

करती थी !!! इस वजह से उसको भी इसमे हिस्सा लेना था...उसके लिए पहले नाम लिखाना जरुरी

था...इसलिए वह नाम देने गयी....सामने निशांत....क्योंकि सब कल्चरल प्रोग्राम कि जिम्मेदारी

सीनियर्स कि थी...

मुझे फॉर्म भरना है |

ठीक है तो??? निशांत भाव खा के बोला !!

साक्षी को ये ध्यान में आ गया पर वह शांत थी...तो मुझे फॉर्म चाहिए !!!

फॉर्म पक्का किस लिए भरना है...

डांस के लिए !!

ओके !! पर फॉर्म इधर ही भरना पड़ेगा...वह भी अभी??

क्यों?? साक्षी ने फिर सवालियाँ चेहरे से उसकी ओंर देखा !!!

क्यों?? कैसे?? ये नही पुछने का हिस्सा लेना है ना??

नाम बोलो??

साक्षी !!

डांस प्रकार??

फ्री स्टाईल !!!

पसंद???

क्या?? ये फॉर्म में लिखा है क्या??

मुझे कोई रूची नही है !!! तुम्हारे पसंद नापसंद में...बताओगी क्या अभी??

डांस करना, पढ़ना !!

पढ़ना !! वो तो उस दिन ही समझ आया !! निशांत बुदबुदाया !!!

आपने कुछ कहा क्या??? साक्षी

नही कुछ नही !!! पता???

अब पता किस लिए चाहिए???

लगता है मिस.साक्षी, सब फोर्मेलीटिज रहती है !!! अब आपका मोबाईल नंबर भी चाहिए इसमें !!!

पर आपको मुझे नंबर चाहिए ऐसा लग रहा है तो मै क्या करु !!

साक्षी ने पता, नंबर दिया....और शुरू हो गयी प्रक्टिस....निशांत हररोज साक्षी कि प्रक्टिस में आता

था...साक्षी को भी उसकी इतनी आदत हो गई थी कि वो नही होता था उस दिन तो डांस में उसका

मन ही नही लगता था !!!!

उसको भी समझ आ रहा था सब, बस उसको वह स्वीकार करने का साहस नही हो रहा था....ईधर

निशांत का भी सेम हाल था !!!! उसको पता था साक्षी दूसरी लड़कियों जैसी नही है....आप दिखने में

स्मार्ट हो इसलिए आपको भाव देनेवाली नही है !!!

डांस प्रक्टिस के लास्ट चार दिन ही बचे थे...पर पिछले दिन से निशांत कहीं दिखाई नही दिया था !!!

रह रह के साक्षी बेचैन हो रही थी !!!

कहाँ होगा यह? तबियत ठीक नही होगी क्या?? या और कुछ??? फोन करू क्या??? पर नंबर कहाँ

है??? क्या करू किसीको पूछा तो !!! पर किसको !!

साक्षी ने एक दूसरे फ्रेंड से नंबर लिया !!

हँलो....निशांत??

हाँ बोल रहा हूँ !!! निशांत कि आवाज सुनते ही साक्षी को अच्छा लगा !!!

हँलो !!!! कौन बोल रहा है???

साक्षी ने फोन कट किया !!!

निशांत को अंदाजा आया कि फोन साक्षी का ही था !!! उसको दिल से बहुत मस्त लग रहा था !!!

दुसरे दिन साक्षी रिहसल के लिए पहुँच गई तो आज भी निशांत नही था वहाँ !!! उसने रिहसल कि

शुरूवात की !!! पर आधा ध्यान दरवाजे पर था !!!

साक्षी क्या चल रहा है तुम्हारा??? मेंटोर चिल्लाये !!

सॉरी...एक पाँच मिनट ब्रेक लेते है ना??? प्लीज्

ओके ठीक है !! बट उसके बाद फुल फोकस !!!!

साक्षी ने पानी पीते पीते फोन पर देखा...अब आज क्या हुआ होगा !!

करूँ क्या फोन??? नही नही मुझे क्या करना है !! रहेगा कोई काम !! और मुझे क्यों इतना फरक पड़

रहा है उसके न होने से???

साक्षी कि खुदसे ही लुकाछिपी चल रही थी !!!

साक्षी ने लंबी सांस ली...और फोन लगाया !!

हँलो !! मै साक्षी बोल रही हूँ !!

कौन साक्षी??? निशांत साक्षी का अंत देख रहा था अब !!

क्या प्रॉब्लेम है तुम्हे???? हम्म मुझे नही पहचानते तुम?? तो इतने दिन क्या मजाक चल रहा था??

अरे चिल्ला क्यों रही हो??? मुझे सच में याद नही है !! हम जानते है क्या एकदूसरें को???

साक्षी को अब रोना आ गया था !!

नही पहचानती !! और इसके आगे भी कभी नही पहचानुंगी !! ऐसा कह के साक्षी ने फोन रख दिया !!

और उसको बहुत रोना आ रहा था सच में !!! पर खुदको संभालते हुए उसने फिर से रिहसल शुरू

की !!

इधर निशांत को समझ आ गया कि उसने कुछ ज्यादा ही खिंचा है और उसकी वजह से साक्षी बहुत

नाराज हो गई है !! अब ये उसको ही संभालना था !!!

कल्चरल प्रोग्राम को सिर्फ एक दिन ही बचा था !! ऑलमोस्ट सब फिक्स हुआ था !!! निशांत साक्षी

को ढुंढ रहा था !!! पर साक्षी तो कही भी दिखाई नही दी !! फिर किसी ने बताया कि वो रिहसल रुम

में है..निशांत भागते हुए वहाँ गया !!! रुम के बाहर ही खड़ा रह के वह साक्षी को देखने लगा...साक्षी

के डांस से तो वह पहले ही घायल हुआ था !!! साक्षी उसकी डांस में इतनी व्यस्त थी कि...निशांत को

उसने देखा ही नही !!! आखिर गाना खतम हुआ और साक्षी रुक गई !! थकी सी साक्षी नीचे बैठ गई

और पीछे से किसी ने उसे पानी दिया !!

थैंक्स !! साक्षी

वेलकम !! निशांत

साक्षी ने पीछे देखा तो निशांत हाथ में गुलाब का फुल लेके बिल्कुल फिल्मी स्टाईल में खड़ा था !!

साक्षी मन ही मन खुश हुई मगर उसने वैसा दिखाया नही !!!

आप कौन?? साक्षी

आय एम् सॉरी?? निशांत

किसलिए??? हम जानते है क्या एकदूसरें को??? और सॉरी मै अजनबी लोगों से बात नही करती !!

ऐसा कह के साक्षी जाने लगी....

तभी निशांत ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी ओंर खिंचा !!!

नही पहचान तो हो जाएगी ना !! निशांत बहुत प्यार से बोला !!!

पर मुझे नही करनी होगी पहचान तो, साक्षी ने खुदको उससे अलग करते हुए कहा |

छोड़ो कोई आ जाएगा....

आने दो ना फिर !!

तुम ठीक तो हो ना???

नही हूँ मै ठीक???

छोड़ो, सच में देखेगा कोई??

देखने दो !! मुझे नही फरक पड़ता !!

पर मुझे पड़ता है !! साक्षी

क्यों?? मुझपर विश्वास नहीं है??? ऐसा कहते हुए निशांत ने और पास खिंचा साक्षी को !!!!

सर !!! आप !!! साक्षी जोर से चिल्लाई और निशांत ने उसको छोड़ दिया !!

पर वहाँ उन दोनो के सिवाय कोई नहीं था....

साक्षी हँसती हुई दरवाजे तक गई और जाते जाते फिर उसको चिड़ाने लगी...

आए बड़े !! मुझे फरक नही पड़ता कहनेवालें...डरपोक कहिंके !!!

तुम रुको !!! मै डरपोक क्या !!! तुम रूको अभी !!! साक्षी के पीछे निशांत भागने लगा..

इस प्रकार साक्षी और निशांत कि लवस्टोरी कि शुरुवात हुई....

बाद में एकदूसरें के साथ वक्त गुजारना !!

रात रात भर जाग कर फोन पर बातें करना, रूठना-मनाना यह वह दोनों एन्जॉय कर रहे

थे....लेक्चर बंक कर के फिल्म देखने जाना !!! पर परिक्षा के वक्त एकसाथ नोट्स निकालना जब कि

निशांत सीनियर था तब भी साक्षी उसको समझाती थी कैसे स्टडी करना वह...फिर लायब्ररी में बैठ

के घंटों उसकी पढ़ाई लेती थी !!! वह इतनी उसमें व्यस्त होती थी कि निशांत कब सो गया यह भी

उसको पता नहीं होता था !!! फिर वह बहुत चिड़ती, गुस्सा होती थी; फिर उसका गुस्सा जाने के

लिए उसके प्रयास !!!

कैंटीन में मेरी चाय में चीनी ही नहीं डाली ऐसा कहते हुए साक्षी को चाय पिने देना और चाय पिने के

बाद, अरे यह तो मिठी ही है.....उसकी ऐसी प्रतिक्रिया के बाद दिखाओ....ऐसा कह के खुद चाय पिना

और अब कहीं मिठी लग रही है ऐसा उसका फिल्मी बर्ताव करना उसको बहुत स्पेशल लगता

था....उसका रिजल्ट आने पर उससे कहीं ज्यादा साक्षी खुश होती थी !!! क्योंकि उसको बड़ा होते

देखना था उसे !!

चलो पार्टी दो !! साक्षी हँसते हुए बोली !!

देता हूँ ना !!! चलो कैंटीन में |

दोनों कैंटीन में गए !!!

हम्म !!! पार्टी मतलब कुछ स्पेशल चाहिए !! ओके ठीक है |

साक्षी बड़ी बेसब्री से देखने लगी कि वह क्या ऑर्डर कर रहा है ऐसा !!

अम्म....दादा ईकडे या !!

अं...दोन कटिंग चहा !! आणा !!

साक्षी घुर के देखती रह गई उसकी तरफ !!

यह देखकर उसकी हँसी छूट पड़ी !!

कंजुस कहिंके !! नही चाहिए मुझे तुम्हारी पार्टी..चलो | ...साक्षी उठ के चलने लगी..

साक्षी.... साक्षी अरे बैठो ना...बैठो ऐसा कह के निशांत ने साक्षी को फिर से नीचे बिठाया...

चल तू भी क्या याद रखेगी...ओह दादा अरे या ना ईकडे...ते दोन कटिंग चहासोबत एक वड़ापाव

पण आणा..जा !!!

बहुत बुरा था...साक्षी

क्या..?? निशांत

जोक !!! साक्षी....

सब अच्छा चल रहा था !! बिल्कुल एक आयडियल कपल कि तरह !!! पर

निशांत अंतिम साल में था !! और साक्षी सेकंड इयर में !! पर अचानक साक्षी का ऐसे बार बार

उसकी चिंता करना...उसको खटक रहा था !!

ऐसा करो !! ऐसा नही !! ऐसे बार बार रोकना बंधन लगने लगा था !! साक्षी का हर छोटी बात को

उससे पुछ के करना, उसे नही चाहिए था !!! तुम्हारी लाईफ है, तुम तुम्हारे फैसले ले सकती हो !!!

निशांत का साक्षी को ऐसा बोलने के बाद.....मेरी लाईफ वो तुम्हारी लाईफ है...यू आर माय हार्टबीट

!!! ऐसा उसका हरवक्त प्यार में रहना...नही पसंत था उसको...

अबतक पूरे कॉलेज को उनके अफेयर के बारे में पता चल चुका था !! और यही निशांत को नही

चाहिए था...उसका कहना था...हम पहले अच्छे से सेटल हो जाए बाद में बताएँगे ना दुनिया को !!!

पर इसके उलटा साक्षी को ऐसा लगता था...कि अगर हम है ना रिलेशन में तो फिर क्यों किसी से

छुपाना अब !! सच तो गलती किसी कि भी नही थी अगर किसी कि थी तो वक्त कि थी, जो दोनो में

दूरीयाँ लेकर आई थी !!

निशांत !!! यार क्या चल रहा है तुम्हारा आजकल कितनी चिड़चिड़ करते हो तुम !!! हरवक्त माथे

पर शिकंजे !! क्या हुआ है तुम्हे !! ओके आय एम् सॉरी !!! अब तुम कहोगे वैसा !! नही बताना ना

किसीको तो नही बताएँगे !!! मै जिद् भी नही करूंगी अब !! सच में जैसे तुम कहोगे वैसा !!! पहले ही

अपना कॉलेज में एकसाथ यह आखिरी साल है...अगले साल मै अकेली ही रहूँगी सो मुझे बूरी यादें

नहीं चाहिए !!! साक्षी अकेली ही बोल रही थी !! निशांत खामोश था !!! उसके मन में सच में क्या चल

रहा है उसका साक्षी को अंदाजा नही आ रहा था !!!

साक्षी मैंने तय किया है...और निशांत ने मौन छोड़ा !!

क्या तय किया है तुमने???? साक्षी को अब चिंता लगने लगी थी !!!

हम ब्रेक लेते है !!!

साक्षी दंग रह गई !!! निशांत के शब्द उसके कानों में अभी भी घुम रहे थे !!

तुम्हे ब्रेकअप ऐसा कहना है क्या??? साक्षी ने भारी स्वर में कहा !!

यार !!! वैसा नही है मुझे यही पसंद नही है तुम्हारा !!! हर एक बात का उलटा मतलब निकालना !!!

निशांत इरिटेट होकर बोला !!!

ग्रेट !!! मीन्स यहाँ भी मेरा ही दोष है तो !!! ओके फिर तुम बताओ ब्रेक लेना मतलब सच में क्या करने

का?

ये देखो साक्षी मै ऐसा नही कह रहा कि हम अलग होते है...बस कुछ दिन एकदूसरें के सिवाय रहते

है...खुद को वक्त देते है !! लाईफ में आगे क्या करना है यह तय करते है !! हमें एकदूसरें के बारें में

सोचने के लिए वक्त मिलेगा !! कुछ दिन नहीं मिलते है | बस यह सब एक ही सांस में निशांत बोल

गया पर साक्षी को अभी भी सच नही लग रहा था !!!

तुमसे हो पाएगा यह सब?? तुम रह सकते हो मेरे सिवाय?? साक्षी ने भरी हुई आँखों से पूछा !!!

साक्षी !! ऐसे इमोशनल होकर कैसे चलेगा !!

हम्म !!! बराबर है तुम्हारा..इमोशन !! कंट्रोल !! करेक्ट है, बस मुझे एक लास्ट सवाल का जवाब

दोगे????

कौनसा?? निशांत ने शांती से कहा !!

क्यों कर रहे हो तुम यह सब??? क्या साबित होनेवाला है इससे कि हमारा कितना प्यार है एकदूसरें

पर !!! पर वो तो अभी भी है ना !!! फिर किसी को क्या दिखाना है अब !!! किसलिए यह जिद्??? कि

तुम पक गए हो मुझ से???? मतलब सच कहों ऐसा है क्या !! नही तो मै खुली आशा धरे रहूँगी और

तुम ऐसे हवा कि तरह उड़ जाओगे !!! है क्या ऐसा कुछ??

साक्षी अब रोने को हुई थी !!

वैसा नही है...यार तुम भी जरा समझदारी से लो ना !! निशांत चिल्लाया !!

अब तुमने सब तय कर लिया है तो मै क्या बोलुंगी !!! साक्षी ने लास्ट टाईम उसको गले लगाया और

उसकी तरफ देखे बिना निकल गई !! उसने उसको देखा होता तो साहस नही होता उसका

जाने का !!!

उसके बाद वो बहुत बार सामने आए पर बिल्कुल अजनबीयों कि तरह !! साक्षी कैंटीन में अकेली

बैठती थी !!! कॉलेज में आते वक्त वो रोज गेट पर दोस्तों के साथ दिखाई देता था !!! शुरूवात में यह

सब पचाना बहुत कठीन हो गया साक्षी को..पर धीरे धीरे आदत हो गई उसको भी !!! अब साक्षी

पूरी चेंज हो गई थी !!! क्लासरूम, लायब्ररी, घर बस इतना ही |

कभी अनजाने में निशांत सामने आया तो शुरूवात में बहुत कठीन गया उसके बिना जीना !! पर

बाद में वह इग्नोर करने लगी जैसे कुछ हुआ ही नही कभी !!!

लास्ट ईयर का रिजल्ट लग गया !!! जाहिर है साक्षी ने वह देखा था !!! और निशांत अच्छे अंको से

पास हुआ था, उसकी उसे खुशी भी हुई थी !! उसने खुद का इगो, सेल्फ रिस्पेक्ट बाजू में रख के

उसको congratulation ऐसा मँसेज भेजा था, साथ में कहाँ मिलेंगे?? यह भी पूछा....पर उसका

रिप्लाय आया ही नही....ना रिप्लाय आया ना वो आया !!

उसके बाद निशांत उसको मिला ही नही...

साक्षी बहुत बेचैन हो गई थी !!! उसने बहुत फोन किए उसको पर उसको फोन लगा ही नही !!! साक्षी

पूरी तरह अंदर से टूट गई !! उसको कुछ समझ नही आ रहा था सच में क्या हुआ है??? निशांत

उससे बहुत दूर गया है यह पचाना आसान नही था उसके लिए !!! ये ऐसा क्यों हुआ इसका जवाब

अभी भी नही मिला था उसको !!!

साक्षी...साक्षी, माँ कि आवाज से साक्षी फिर अतीत से बाहर आ गई..

आयी माँ....साक्षी ने लंबी सांस ली !!! पर अब क्यों आया है फिर ये???? साक्षी के मन में अभी भी

हलचल मची थी !!! पर उसने पक्का तय किया था कुछ भी हो जाए मगर इस वक्त इमोशनल नही

होने का !! साक्षी एक दृढ़ संकल्प से उठ गई !!!!

माँ मै जा रही हूँ !!! साक्षी ने बाहर जाते हुए माँ को आवाज दि !!

साक्षी शाम को जरा जल्दी आना हमें एक जगह जाना है !!

अब कहाँ जाना है?? आप चलें जाना मुझ से नही हो पाएगा !!! साक्षी चिड़ते हुए बोली !!

अरे...ऐसा क्यो कर रही हो...हमें जाना है और तुम आ रही हो यह फिक्स है !!

माँ....साक्षी उतरे हुए चेहरे से ऑफिस में गई !!! पर उसका मन नही लग रहा था, बारबार आँखों के

सामने निशांत दिख रहा था और उस वजह से उसकी चिड़चिड़ बढ़ रही थी !!!

शाम को साक्षी माँ-पापा के साथ गई !!! वो साक्षी के पापा के कंपनी कि पार्टी थी !!! साक्षी को कुछ

उसमें दिलचस्पी नही थी !!!माँ-पापा उनके उनके फ्रेंड्स के साथ बातें कर रहे थे !!! साक्षी को बहुत

पक रहा था !!! वह हाथ में कोल्ड्रिंक लेकर गार्डन कि तरफ गई !!! और एक जगह बैठ गई !!!

हम्म...चलो यहाँ तो मनचाही शांती है साक्षी खुद से बोली !!!

हाँ !!! शांती तो है ही !!! पीछे से कोई तो बोला !!!

साक्षी ने पीछे देखा तो निशांत खड़ा था !!! उसको एक पल सच है या सपना यही नही समझा...

साक्षी शांती से निशांत के सामने खड़ी रह गई !!! बोलो !! क्या बोलना है??

सच तो निशांत थोड़ा चौक गया !! क्योंकि साक्षी उसपर गुस्सा नही हुई, चिल्लाई नही; यह निशांत

के लिए नया ही था....वो जिस साक्षी को जानता था....वो जोर जोर से झगड़नेवाली, वक्त आए तो दो

रख के देनेवाली..एक बार गुस्सा जाने तक चिड़चिड़ करनेवाली !!! और आज जो सामने खड़ी है वो

सच में वही साक्षी है ना !! पलभर के लिए निशांत गड़बड़ा गया !!!! उसकी यह गड़बड़ साक्षी ने

पकड़ ली थी !!! और उसका ध्यान खिंचते हुए साक्षी बोली !!!

बोलो ना !! बोलने के लिए ही आए हो ना !! फिर बोलो एकबार मतलब तुम्हे अच्छा लगेगा और मै भी

मुक्त हो जाऊँगी !!

निशांत को क्या बोलना है यह सूझ ही नही रहा था !! क्योंकि वो जो सोचकर आया था उसके पूरा

उलटा बर्ताव कर रही थी साक्षी !!! आय एम् सॉरी साक्षी |

इट्स ओके !!!! साक्षी बहुत इजीली बोली !!!

अब तो निशांत को डर लगने लगा था कि साक्षी को फिर से पा सकूंगा या नही !!! साक्षी आय एम्

सॉरी ना यार !!! मुझे पता है मेरी गलती थी !! बहुत गलती थी पर ऐसे स्ट्रेंजर जैसे तो मत बर्ताव

करो !!

मुझे तुम्हे सब बताना है !!! बहुत बोलना है !!! प्लीज् मुझे एक चांस दो !!! प्लीज् !!

चांस !! हम्म...मै कौन हूँ तुम्हे चांस देनेवाली | तुम्हारी लाईफ है, तुम तुम्हे जैसे चाहे वैसे जीओ...मेरा

क्या है??? साक्षी कि आवाज कांप रही थी !!! आँखों में जमे हुए आँसू राह देख रहे थे छलकने को !!!

तुम जीओ जैसा चाहो !!! मै क्या....आज हूँ कल कोई दूसरी होगी !! उस में क्या है इतना !!

साक्षी वैसा नही है कुछ !! प्लीज् मुझे समझो !!!

हम्म...समझू !!! यहीं तो मैने गलती की है ना !!! "तुम्हे समझने में !!" तुम्हारे जाने के बाद भी तुम

पक्का आओगे !!! इतना विश्वास रखा था मैने !!! तुम मुझे ऐसे छोड़कर जा ही नही सकते !!! इतना मै

जानती हूँ तुम्हे, ऐसा लगता था मुझे !!! इतनी जानती थी तुम्हे कि खुदका भी अस्तित्व है यही भूल

गई मै !!!

साक्षी का गुस्सा अब धीरे धीरे दु:ख में बदलता जा रहा था !!! साक्षी बोलती ही जा रही थी !!! पर

निशांत को आज सब बताना ही था !!!

मुझे पता है रे, पर गलती तुम्हारी नही है...वोह तो मेरी ही है....साक्षी.. रूकने को तैयार ही नही थी !!

साक्षी !!!!! बस...निशांत ने साक्षी के मुंह पर हाथ रखा !! और उसको अपनी ओंर खिंचा !!!! "मुझे पता

है सब साक्षी... और मै सुनूंगा यह सब पर अब मै बोलूंगा....तुम सिर्फ सुनोगी" !! नो कमेंट्स और हाँ

हाथ मत काटना !!! निशांत माहौल को हलका करने के लिए बोला...साक्षी पिछले दो साल मै

अमेरिका में था !!! और वहाँ कोई जीवनभर रहने के लिए नही गया, वो तो कैंसर जैसी बिमारी पर

इलाज करने गया था !!!

साक्षी को झटका लगा था !!! उसने उसका हाथ मुंह से हटाया !!! और बोली !!! क्या?? यह कैसे संभव

है !!! तुम्हे कब कैंसर हुआ था??? ये देखो अगर तुम खुद को साबित करने के लिए झूठ बोल रहे हो

तो प्लीज् अब और झूठ नहीं....पक गई हूँ मै अब इन सब से !!!

साक्षी मै झूठ नही बोल रहा हूँ सच में !!! तुम्हे याद है, लास्ट इयर में था तब मैने कुछ टेस्ट किए

थे..उसमें मुझे लंग कैंसर कि फर्स्ट स्टेज है ऐसा दिखाया था !!

फिर मुझे क्यों नही बताया यह !!!

मुझे ही इस सदमें से बाहर आने में वक्त लगा !!!! और मेरी बिल्कुल भी इच्छा नही थी कि मेरी

बिमारी कि वजह से तुम दु:खी हो जाओ !!! तुम्हे होनेवाली तकलीफ मुझ से सहीं नही जाती !!!

और तुम छोड़कर गए उसके बाद जो तकलीफ हुई उसका क्या??? तब मेरा क्या होगा यह सोचा

नही था क्या फिर !! साक्षी ने आँखे पोछते हुए कहा !!! इन दो सालों में मै जिंदा हूँ कि नही , मेरा क्या

हुआ इसकी पूछताछ करूँ ऐसा भी नही लगा तुम्हे !! और मै तुम्हे तुम्हारे दु:ख में साथ भी ना दे सकू

इतना भी विश्वास नहीं है तुम्हारा मुझपर !!!!

साक्षी ऐसा नही है !! मै इतना टूट चूका था कि मुझे कुछ सुझ ही नही रहा था....प्लीज् मुझे माफ कर

दो !! निशांत घुटनों के बल बैठा !!! तुम्हारे सिवाँ ये दो साल मैने कैसे निकाले यह मुझे ही पता है !!!

एक पल लगता था तुम्हे फोन करूँ...और सब बता के मुक्त हो जाऊ...पर दूसरे ही पल मन में ख्याल

आता कि तुमसे सहा जाएगा क्या??? और अब तुम सच में विश्वास करोगी क्या???? पर अब

नही.....बस हुई ये दूरियाँ !! नही जी सकता मै तुम्हारे बिना....प्लीज् "विल यु मँरी मी" !!!!

साक्षी के आँखों में आँसू थे....दो सालों कि दूरियाँ, गुस्सा बह जा रहा था !!! उसने उसे उठाया और

जोर से गले लगाया...मै नही करूंगी जाओ !! तुम फिर से छोड़कर गए तो !!!

निशांत के चेहरे पर हँसी और आँखों में आँसू थे......नही जाऊंगा, तुम मुझ से पक जाओगी फिर भी

नही...और जाने के लिए बोलोगी तो भी..नहीं जाऊंगा !!!

निशांत के चेहरे पर दुनिया जीतने कि खुशी थी..तो साक्षी कि आँखों में नए जीवन के सपने थे !!!

दोनों का एक नया जीवन शुरू हुआ था...जो दूरियाँ इन दो सालों में आयी थी वो इन दोनों

के प्यार कि वजह से दूर हुई थी....

प्यार ये ऐसा ही होता है !!!

कभी....

होले से सहलाता है !!!

तो कभी...

जुदाई का गम देता है !!!

तो...

इंसानों पर प्यार करना भी सिखाता है !!!

कभी जुदाई...

कभी रूठ जाना....

लेकिन...

सच्चा "प्यार" ये.....

अपनी राह खुद ही ढूंढता है !!

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