पार्ट १

नंदिनी लड़कों को बहुत जल्द पहचान लेती थी, इस बात पर तो उसकी सहेलियां भी उसकी कायल थी l किसी भी लड़के के साथ commit करने से पहले वो एक बार नंदिनी को साथ ले जाती थी और फिर उसकी राय लेती थी l आलम ये था कि कॉलेज के बहुत से लड़कों पर N.A. और N.U.A यानी कि Nandini Approved और Nandini Un-Approved के ठप्पे लग गये थे l लड़के भी इस बात को जान चुके थे इसलिए हर कोई नंदिनी के आगे एकदम decent और सीधा-साधा बनने की कोशिश करता था l यहाँ तक की उसके अपने friend circle में जो दो लड़के थे वो भी कुछ अलग ही ढंग से पेश आते थे l नंदिनी लड़कों के इस ढोंग से उकता गयी थी और उसके मन में ये धारणा बन गयी थी कि सभी लड़के fake होते हैं l एक दिन नंदिनी lunchtime में कैंटीन में बैठी थी कि आकाश आकर उसके सामने बैठ गया l आकाश ने सीधे second year में ही अभी-अभी admission लिया था l Second year में कॉलेज बदलने का क्या कारण रहा इसके ऊपर क्लास में कई कहानियाँ बनी हुई थी l हालांकि सच क्या था ये अब तक किसी को नहीं पता था l

“Hii....ऐसे अकेले बैठकर भी कोई कॉफ़ी पीता है?” आकाश ने शर्ट की बाजू फोल्ड करते हुए कहा

“क्यूँ किसी के साथ कॉफ़ी पीने से उसका taste बदल जाता है?” नंदिनी ने कॉफ़ी का कप टेबल पर रखते हुए पूछा

“जब एक दिलकश हमसफ़र मिलने पर ज़िन्दगी का taste बदल जाता है तो कॉफ़ी क्या चीज़ है”

“हाँ लेकिन साथी ठीक न हो तो कभी-कभी taste ख़राब भी हो जाता है” नंदिनी अपना बैग उठाते हुए बोली

“अरे ये क्या मैंने तो अभी कॉफ़ी शुरू की है और तुम चल पड़ी”

“हाँ क्या पता मैं तुम्हारी इस कॉफ़ी का taste ख़राब कर दूं?”

“क्या पता एक ख़राब कॉफ़ी से मेरी ज़िन्दगी का taste सही हो जाए”

“बड़े optimistic लगते हो?”

“क्या करूँ आदत से मजबूर हूँ”

“सपने देखना अच्छी बात है, देखते रहो, मैं चलती हूँ” नंदिनी बैग अपने कंधे पर टांग चलने लगी

आकाश ने फौरन एक बड़ा सा घूँट भरा और बैग उठा कर नंदिनी के पीछे हो लिया l

“अरे इतना भाग क्यूँ रही हो? मुझे भी उसी lecture में जाना है और तुम्हें भी”

“मुझे लेट होना बिल्कुल पसंद नहीं है”

“आर्मी में जाने का इरादा है क्या?”

“मेरे पापा आर्मी में हैं और इसलिए बचपन से ही आदत है हर जगह वक़्त पर पहुँचने की”

“मतलब जिनके पापा आर्मी में होते हैं वो ज्यादा मेक-अप वेक-अप नहीं करती”

“क्या मतलब?” नंदिनी ने आँखें निकालते हुए कहा

“नहीं नहीं कुछ नहीं” आकाश ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा

“तुम लड़के जब देखो बस ये मेक-अप पर जोक्स बनाते रहते हो”

“अब तुम लड़कियों के इस मेक-अप के चक्कर में जो इंतज़ार करना पड़ता है, उसमें खाली बैठे जोक्स ही बना लेते हैं और

क्या करें”

“मतलब अकेले में भी तुम लड़के बस हमारा मजाक बनाते रहते हो?”

“हाँ हाँ हमारी तो ज़िन्दगी का मकसद ही यही है कि तुम पर नए-नए जोक्स बनाएं...कमाल करती हो”

“ये घटिया-घटिया जोक्स तुम बनाते हो और कमाल मैं करती हूँ? तुम लड़के कभी नहीं सुधर सकते कसम से” नंदिनी ये कहकर थोडा तेज़ चलने लगी

“हे राम, तुम्हारी कॉफ़ी कुछ ज्यादा ही strong थी लगता है” आकाश ने अपनी गति तेज कर नंदिनी के साथ आते हुए

कहा

“अपने कर्मों का दोष मेरी कॉफ़ी पर मत डालो”

“अरे पाँच मिनट हुए नहीं मिले हुए, मेरे कर्मों का बही खाता भी खुल गया”

“हे भगवान आनंद Sir आ चुके, मैं तो गयी” नंदिनी ने खिड़की में से झांकते हुए कहा और दरवाज़े की तरफ दौड़ लगायी l

Retired Col. आनंद क्लास शुरू होने के 5 मिनट बाद किसी को entry नहीं देते थे l

“May I come in Sir?” नंदिनी ने डरी-डरी सी आवाज़ में पूछा

“Hmm...10 minutes late...Why? May I know?” Col.आनंदअपनी घड़ी की ओर देखते हुए बोले

“वो..वो Sir” नंदिनी अटक गयी

“Sir वो कैंटीन वाले राजू अंकल के बेटे का कल board exam है, उसे पढ़ा रहे थे, टाइम पर ध्यान नहीं दिया” पीछे से आकाश बोला

“ओह तुम्हें पहले कभी क्लास में नहीं देखा?” Col. आनंद ने चश्मा नीचे करते हुए कहा

“Sir this is my first class actually”

“No Mister this isn't your first class unfortunately, better luck next time. जाओ उस बेचारे का board exam है कल, पढाओ उसे, कहीं fail न हो जाए” Col. आनंद ने टेढ़ी सी मुस्कान देते हुए कहा

“लेकिन Sir” नंदिनी ने कुछ कहने की कोशिश की

“A no is a no Nandini” Col.आनंद क्लास की तरफ देखकर फिर से पढ़ाने लगे l

नंदिनी पलटी तो आकाश पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा था l

“इसमें खुश होने की क्या बात है?” नंदिनी ने खिजाते हुए कहा

“यहाँ से चलो पहले, बताता हूँ” आकाश ने चलने का इशारा किया

“हाँ मैं तो ये देख कर मुस्कुरा रहा था कि आर्मी वालों की बेटी भी लेट हो जाती है” आकाश हँसने लगा

“चुप रहो, पता नहीं मेरी घड़ी का टाइम पीछे कैसे हो गया”

नंदिनी घड़ी का टाइम बदलने लगी

“वाह! आज तक तो मैंने सुना था मुझे देखकर लड़कियों की साँसें थम जाती हैं, तुम्हारी तो घड़ी थम गयी”

“हा हा...बहुत बकवास जोक था” नंदिनी ने मूँह बनाते हुए कहा

“खैर वो सब छोडो....अब तो तुम्हें मेरे साथ एक कॉफ़ी पीनी ही पड़ेगी”

“नहीं मैं library जा रही हूँ, तुम जाओ शौक फरमाओ”

“मुझे अकेले बैठकर कॉफ़ी पीने का कोई शौक नहीं है”

“तो चलो फिर library, 'साथ’ बैठकर पढ़ लेते हैं” नंदिनी ने सीढ़ियों की ओर इशारा किया

“तुम सच में semester के पहले ही महीने में इतना पढना चाहती हो या मुझसे पीछा छुड़ा रही हो?” आकाश ने भौहें उठाते हुए पूछा

नंदिनी सोच में पड़ गयी, पिछले कई दिनों से लड़के या तो नंदिनी से दूर ही रहते थे या कुछ देर के लिए मिलते भी तो कुछ ज्यादा ही व्यवहारिक तरीके से पेश आते थे l आकाश क्यूंकि अभी नया-नया आया था तो शायद उसे इस बारे में पता न हो और इसलिए वो काफी straightforward सा लग रहा था l

“देखो मैडम, 20 मिनट हो गये हैं ये lecture शुरू हुए, जल्दी फैसला करो कहीं ऐसा न हो इस बार कॉफ़ी खत्म होते होते अगला lecture निकल जाए”

“तो खड़े होकर time waste क्यूँ कर रहे हो, चलो” नंदिनी तेजी सी चलते हुए building से बाहर निकल गयी

आकाश एक बार को तो चौंक सा गया और फिर बाहर की तरफ दौड़ पड़ा|

“कमाल है 10 मिनट लेट को भी कोई लेट कहता है?” आकाश ने नंदिनी के पास पहुँचते हुए कहा

“Retired Colonel हैं आखिर”

“ओह ये बुढ्ढा भी आर्मी वाला है...चलो जो भी है अच्छा ही हुआ”

“तुम तो चुप ही रहो...राजू अंकल के बेटे का board exam है वाह!! कसम से”

“हाँ तो कितना अच्छा बहाना बनाया था यार, मेरी creativity के नाम पर ही entry तो देनी चाहिए थी”

“हाँ हाँ क्यूँ नहीं? अब चलो पढ़ा लो चलकर राजू अंकल के बेटे को”

बातों-बातों में दोनों कैंटीन पहुँच गए l आकाश ने नंदिनी को बैठने को कहा और कॉफ़ी लेने चला गया l

“अंकल दो कॉफ़ी देना”

“बस दो मिनट में तैयार है”

“आपका बेटा नज़र नहीं आ रहा आज?” आकाश ने इधर-उधर नज़र घुमाते हुए कहा

“अरे सोहन का कल पेपर है बेटा”

“क्या??” आकाश ने चौंकते हुए कहा

“क्या हुआ बेटा? कैंटीन वाले का बेटा पढ़-लिख नहीं सकता क्या?”

“अरे नहीं ऐसी बात नहीं है मैं तो बस वैसे ही पूछ रहा था किस चीज़ का है”

“कल तो Maths का है बेटा..ये लो आपकी कॉफ़ी”

आकाश कॉफ़ी लेकर आया और एक कप नंदिनी को थमाते हुए उसके साथ बैठ गया l

“क्या हुआ हँस क्यूँ रहे हो?” नंदिनी ने पूछा

“तुम विश्वास नहीं करोगी.....राजू अंकल के बेटे का कल सच में exam है” आकाश जोर-जोर से हँसने लगा

“क्या? ये तो हद हो गयी” नंदिनी भी हँसने लगी

“हाँ लगता है मेरा उपरवाले से कुछ connection है” आकाश ने ऊपर देखते हुए कहा

“बस बस रहने दो......वैसे कॉफ़ी काफी अच्छी है इस बार”

“अब साथ इतना अच्छा होगा तो कॉफ़ी तो अच्छी होगी ही”

“हाँ हाँ राजू अंकल तो इतने साल से झक मार रहे हैं, taste तो कॉफ़ी में तुम ही डालते हो”

“देखो इंसान के mood से भी taste पर बहुत फर्क पड़ता है...मरते आदमी को ज़हर भी अच्छा लगता है और परेशान आदमी को पकवान भी अच्छे नहीं लगते”

“तो मेरा तो lecture miss हो गया, मुझे तो ये बहुत ख़राब लगनी चाहिए”

“अरे तो तुम्हारा mood सिर्फ उस lecture से थोड़े न बदलता है और भी चीजें हैं”

आकाश ने टेबल पर रखे अपने दोनों हाथ के अंगूठे अपनी ओर करते हुए कहा नंदिनी चुप हो गयी l वो सोच में डूब गयी l जहाँ एक तरफ सारे लड़के उससे डर-डर कर रहते थे तो दूसरी तरफ ये आकाश पहली ही मुलाक़ात में उससे flirt कर रहा था l इससे पहले कॉलेज में दो लड़कों ने ही आजतक उससे flirt करने की कोशिश की थी और वो भी उसकी ये critical image बनने से पहले l हालांकि उसे उन दोनों में से किसी का flirt करने का तरीका रास नहीं आया और ऊपर से वो दोनों काफी बेसब्र से लगते थे l अंत में दोनों ही नाकामयाब रहे l नंदिनी ने जिस बखूबी से उन दोनों का चरित्र विवरण किया था तभी उसकी सहेलियों ने नंदिनी की इस खूबी को पहचान लिया था l बस फिर क्या था जैसे ही लड़कों को इस बात का पता लगा वो नंदिनी को देखकर ऐसे पलट जाते थे जैसे बिना हैलमैट बाइक चला रहे लड़के पुलिस को देखकर पलट जाते हैं l आकाश किस्मत से इन सब बातों से अन्जान लगता है l

आकाश लगातार नंदिनी पर नज़र टिकाये हुए था l यही वो लड़की थी जिसपर कॉलेज में आने पर सबसे पहले उसकी नज़र पड़ी थी l ऊपर से 3 दिन पहले क्लास में हुए G.D. में जब उसने नंदिनी को बोलते हुआ सुना था तो वो नंदिनी के बारे में जानने और उससे बात करने के लिए और भी ज्यादा उत्सुक हो गया था l अपने नए-नए दोस्त मयंक से उसके बाद उसने नंदिनी के बारे में काफी जानकारी हासिल की l मयंक ने चेताते हुए कहा था

“देख ले इससे ज्यादा नज़दीक होने पर तेरा पूरा character certificate छप कर क्लास की सारी लड़कियों में बंट जाएगा” l आकाश मन ही मन हँस पड़ा था कि जब उसे पसंद ही नंदिनी है तो क्लास की बाकी लड़कियां उसके बारे में क्या जानेंगी,क्या सोचेंगी इससे क्या फ़र्क पड़ता है l आज जब उसने नंदिनी को यहाँ कैंटीन में अकेले बैठे देखा तो वो समझ गया कि इससे बेहतर मौका नहीं मिलेगा l और अब तो किस्मत ने एक ही दिन में उसे दूसरा मौका भी दे दिया था l

“अरे Cold Coffee पीने का मन था तो पहले बता देती” आकश ने नंदिनी के कप,जो कि अब भी आधे से ज्यादा भरा था, की ओर इशारा करते हुए कहा

“अरे नहीं वो बस ऐसे ही मैं सोचने लग गयी”

“इतनी tension क्यूँ ले रही हो एक attendance ही तो गयी है”

“अरे नहीं वो नहीं”

“ओह तो मेरे बारे में सोच रहीं हैं मोहतरमा”

“हाँ मैं सोच रही थी कि बेचारे को पहले lecture में ही निकाल दिया, तुम्हें पता है अब Col. आनंद पूरा semester तुम्हें ये याद दिलाते रहेंगे”

“इस lecture को भूलने भी कौन वाला है” आकाश ने लम्बी सी साँस छोड़कर मुस्कुराते हुए कहा नंदिनी ने आखिरी घूँट भरकर कप को टेबल पर रखा और फटाक से उठ खड़ी हुई l

“मेरे ख्याल से अब हमें चलना चाहिए”

“हाँ हाँ चलो चलो लगातार तीन कॉफ़ी वैसे भी सेहत के लिए ठीक नहीं होंगी”

“कहीं पिछले कॉलेज से तुम्हें short attendance के चक्कर में तो नहीं निकाल दिया था” नंदिनी ने कैंटीन से निकलते हुए पूछा

“नहीं मैं खुद छोड़ कर आया हूँ, किसी ने निकाला- विकाला नहीं”

“क्यूँ? क्या हुआ था ऐसा?”

“बस क्या बताऊँ?...अच्छा छोड़ो ये बताओ ये lecture तो दीप्ति mam का है न?”

“हाँ दीप्ति mam का है”

“शुकर है.....सुबह से मनहूस चेहरे पढ़ा रहे हैं..इसी lecture का इंतज़ार था”

“तुमने बताया नहीं वो कॉलेज क्यूँ छोड़ दिया”

“लो क्लास आ गयी हमारी, चलो अब बाकी बातें बाद में"


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