दोस्ती थी प्यार था या कुछ और एहसासों का रिश्ता

उम्र में फासला कुछ २० या २२ बरस का रहा होगा हमारे बीच हाँ ... वो ४२ के और में २२ यही उम्र रही होगी मेरी जब उनसे (ऋषभ ) पहली बार मुलाकात हुई थी यु तो कई बार पहले भी कही देखा था पर कभी कोई बात नहीं हुई थी हमारे बीच . मेने हमेशा उनको एक बहुत ही नेक इंसान के रूप में पाया था चेहरा शांति और गंभीरता से भरा हुआ ,आँखे खामोश रहस्यमई सी जेसे बहुत कुछ कहना चाहती हो या छुपाना चाहती हो . खुश मिजाज इंसान हर एक से मिलते हुए सब से हाल चाल पूछते हुए कोई अगर पहली बार मिले तो नहीं जान पाए की ये एक करोड़पति आदमी है बहुत साधारण से रहना और हमेशा व्यस्त रहना यही थे वो . उम्र में फासला अवश्य रहा होगा पर भावनाओ में एहसासों में फासला नहीं महसूस किया कभी भी . जिन्दगी को पूरी तरह केसे जीते है उन्हें वो आता था महफ़िल में हर एक से मिलना मस्त रहना :) पर इन सबके बावजूद मेने उन्हें एक बहुत ही समजदार इंसान के रूप में पाया जो हमेशा सबको साथ लेके चलते है सबकी खुशी का ख्याल रखने वाले छोटे बड़े हर एक से उनके तार बहुत करीने से जुड़े थे .

हम एक दूसरे को जानते ही कहा थे बस हर बार किसी फंक्शन में मिलना ,दूर से ही नमस्ते और फिर थोड़ी देर बाद रवानगी . उन्हें सब से मिलते देखते थे हमेशा पर हमारी आदत में शुमार ही नहीं था किसी से ज्यादा बोलना रिश्तेदारी से तो मन भर सा गया था . हर बार प्रोग्राम अटेंड जरुर करते पर बस एक फोर्मेलिटी होती थी . कही पर भी जाते थे उन्हें देखते थे और बस एक मुस्कान सी आ जाती थी लबो पर इसका सबसे पहला कारण तो ये रहा की हमें उनका नाम बहुत पसंद था ऋषभ ... उनको देख कर कुछ अलग सा लगता था कुछ तो था जो हमें उनकी तरफ खींचता था उनसे जोड़ता था पर वो कुछ क्या था अभी तक समज नहीं आया है . यूँ लगता था ये शक्श जरुर इस भीड़ में शामिल है पर इस भीड़ से ये बिलकुल ही अलग है .

हमने कभी ऋषभ से बात नहीं करी थी बस देखते भर थे उनको ... एक बार यु ही मन किया की नंबर लिया जाए और बस चले गए थे .. एक्सक्यूज मी ..आपका नंबर मिल सकता है ? ऋषभ -आश्चर्य से मेरा नंबर ? और हम अचानक से कुछ याद आता है की क्या कहे ... जी वो पापा ने मंगवाया है . उन्होंने नंबर दिया है नंबर सेव कर लिया गया था .

हाँ यही से तो हुई थी शुरुआत उस एहसास की जिसका कोई नाम ही नहीं था . दोस्तों को सुबह रात मोबाइल से सन्देश भेजना आदत में था हमारे और इसी सिलसिले में ऋषभ जी को भी मेसेज करने लगे और सुबह शाम उनका रिप्लाई आना संक्षिप्त सा ... उस संक्षिप्त से जवाब में कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ होता था जो हमारे चेहरे पर एक मुस्कान ले आता था . उस समय वाट्सएप या फेसबुक जेसी चीजे थी ही कहा जिस से बात करना आसान हो जाए . और इसी सिलसिले ने दूर के रिश्तेदारों को या यूँ कहे अजनबियों को दोस्त बना दिया . ऐसे दोस्त जिनकी उम्र एक दूसरे से बहुत ही अलग थी और जो एक दूसरे के बारे में कुछ जानते नहीं थे बस नाम और परिवार के अलावा . दोस्ती भी ऐसे की किसी ने कुछ जानने या पूछने की जरुरत ही नहीं समजी बस दोनों एक दूसरे को देख लेते थे और खुश . मेसेज के सिलसिले ही रहे कुछ महीनो तक कही कोई बात चित नहीं .. ऋषभ को शायद कही से पता चला था श्रुति की कोशिशो का उसके सपने का . बस उनको शायरी भेजते रहते थे कभी कभार एक बार उन्होंने फोन किया था की शायरी अच्छा लिख लेती हो .. इतनी गंभीर बाते सोचती केसे हो वो भी इतनी छोटी उम्र में ..? हा बस यही पहली बार फोन पर बात हुई थी और हमने कहा था की यूँ ही कभी कभार मन करता है तो लिख देते है . फिर से कभी बात ही नहीं ... एक दिन अचानक से फोन आया .. श्रुति-हेलो ऋषभ-हेलो श्रुति .... श्रुति -जी केसे है आप ? ऋषभ-में ठीक हू तुम केसे हो ? श्रुति -जी हम भी मस्त :) ऋषभ -अरे श्रुति वो फंक्शन में जाओगी तुम ? श्रुति -नहीं जायेंगे और आप ? ऋषभ -मुझे तो जाना होगा ..सोच रहा था तुम आती तो मिल लेते . श्रुति-(सामने से अजनबी दोस्त का बुलावा और फिर पता नहीं मना क्यों नहीं किया गया ) देखते है आ पाए तो आयेंगे . ऋषभ -चलो ठीक है जेसे तुम्हे सुविधा हो :) रखता हू बाय . अचानक से जाने की तैयारी कर लि है बस जाना तो है ही माँ से कहा है हम भी चलेंगे साथ..माँ थोड़े आश्चर्य में अरे अभी तो तुम आ नहीं रही थी फिर अचानक से ...हमने कहा हा तो अब आ रहे है आप तो चलिए .

२ घंटे का रास्ता भी बड़ा ही लग रहा था गाने सुनते हुए गंतव्य पर पहुंचे है. जेसे ही गाडी से उतरे है देखते है चारों तरफ भीड़ ही भीड़ बहुत शोर और सब एक दूसरे से मिलने मिलाने में व्यस्त है . और जिन्होंने हमें बुलाया है वो तो महफ़िल की जान हुआ करते है हमेशा से ही ये तो हम देखते आये है . हम सोच में है की इतनी भीड़ में कहा उन्हें खोज पाएंगे और वो तो व्यस्त ही होंगे कहा हमसे मिलेंगे .. इसी सोच में डूबे है की दूर से एक आवाज सुनाई पड़ती है जानी पहचानी सी ..मुड के देखा तो ऋषभ है पीछे . हम हँसे है नमस्ते हुआ है तभी कोई बुलाने आ जाता है और ऋषभ चले गए है . माँ अपने सब से मिलने में व्यस्त हो गई है . और हम हमेशा की तरह सब से खुद को दूर रखने के लिए ऊपर जा कर बेठ जाते है अपने अकेलेपन के साथ एक कोने में . ऋषभ का मेसेज कहा हो तुम ? श्रुति -ऊपर बेठे है . आधे घंटे तक कोई जवाब नहीं उधर से . हम अपनी धुन में व्यस्त बेठे है खिडकी से आते जाते लोगो को देखने में लगे हुए है गाने चल रहे है फोन पर और एक शांति सी है . तभी कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ है मुड कर देखते है तो ऋषभ सामने खड़े है . हमेशा की तरह नमस्ते होता है और बैठने को कहते है . ऋषभ-यहाँ क्यों बेठी हो अकेले ? श्रुति - बस मुस्कुरा देती है . ख़ामोशी है दोनों तरफ ...वो शुरुआत करते है तुम तो आने वाली ही नहीं थी? हम कहते है आपने बुलाया था ,ना आने का फिर कुछ बचता ही नहीं . फिर से एक सवाल -क्यों मेरे कहने पर केसे चले आये हो ? जवाब में फिर से एक मुस्कुराहट हमने दि है . और फिर से चुप................................... पढाई केसी चल रही है एक और सवाल ..? और हमारा जवाब की अच्छी है . तभी अचानक से हाथ पकड़ कर बोलते है यार में चाहता हू की तुम कुछ बनो अपने जीवन में और तुम प्रयास भी कर रही हो प्रशाशनिक सेवा के लिए . हम जवाब में सर हिलाते है और उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर विश्वाश करे स्वीकृति देते है . फिर से दोनों चुप है...काफी देर हो गई इतनी सिबात में ही कुछ आधा घंटा उन्हें फोन पर फोन आये जा रहे नीचे सब राह देख रहे थे ... जाने के लिए उठते है की चलो अब जाता हू सब इंतज़ार कर रहे है . और हम फिर से जाने की स्वीकृति में हम्म कहते है . तभी गले लगा कर बोलते है सबसे मिला करो यार . अचानक से अजनबी दोस्त का यु गले लगना और वो भी इतनी शालीन तरीके से हम कुछ कह पाते सोच पाते इस से पहले ही वो जा चुके बाय बोल कर .

दोनों फिर से अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त हो चले है sms का सिलसिला जारी है . कुछ महीनो बाद फोन आता है एक दोपहर .. ऋषभ -तुम्हारे शहर में आया हुआ हूँ मिल सकता हूँ तुमसे ? हमारी तरफ से सीधा सा एक सवाल कब और कहा आना है ? ऋषभ -तुम्हारे घर आ जाए तो कोई दिकात तो नहीं तुम्हे एक चाय भी हो जायेगी साथ में ? श्रुति - जी आ जाइए आपको पूछने की जरुरत नहीं ..पूल से उतर कर फोन कर दीजियेगा लेने आ जायेंगे . रूम ठीक करने में लग जाते है बड़ा बिखरा हुआ सा पड़ा था किसी के आने पर आज तक कभी रूम ठीक नहीं किया जिसको भी आना होगा आ जाएगा पर आज क्यों किया जा रहा है साफ ..खुद को भी नहीं पता .

फोन आया है लेने पंहुचे है .. वाईट कुरता और चूडीदार पहने है प्योर कोटन का . हमेशा की तरह डेशिंग लग रहे है :) नमस्ते किया जाता है और साथ लेकर घर पंहुचे है . घर आये है कहते है कमरा तो बहुत करीने से जमा रखा है हमारे पास कोई जवाब नहीं है इस बात का . ऋषभ -तुमने एक बार कहा था की मेरे शहर में आओ तो मुझसे मिले बिना जाना मत ...बस वो ही याद रहा और चला आया . हम सोच में डूबे है इतना बड़ा आदमी इतने व्यस्त बिजनेसमेन ..खुद के लिए जिन्हें वक्त नहीं मिलता हमारे लिए केसे चले आये है वक्त निकाल कर ... हम इसी उधेड़बुन में है की कहा जाता है चाय पानी पूछोगे या नहीं ? अचानक से लोटते है हम अपनी सोच में से और पानी पीला कर पूछते है ..केसे आना हुआ है? बताते है बिजनेस मीटिंग्स के सिलसिले में आये है दो दिन से सफर में है सो भी नहीं पाए है शाम को फिर से ट्रेन है ...शक्ल से बिलकुल नहीं लगने दे रहे है की तीन दिन से सोये नहीं है कहा तब पता चलता है . हम उनसे कहे है आप आराम से बैठिये हम चाय चढा देते है . चाय बनाने जाते है और आकार देखते है तो वो सो चुके है बहुत गहरी नींद में है . घड़ी देखी जाती है एक बज रही है और शाम सात की ट्रेन है . कितने शांत और गंभीर से लग रहे है सोते हुए . चाय बंद कर के आ जाते है की सोने दिया जाए उठाया नहीं जायेगा . और हम भी वही बगल में चेयर डाल कर बेठ गए है . सोचने पर मजबूर है की कोई इंसान अपनी व्यस्त जिन्दगी में भी केसे हमारी एक बात याद रख पाया है . हम तो खुद भी नहीं समज पा रहे थे अपने एहसास की हम चाहते क्या है ? क्या हमें अजनबी दोस्त से प्यार हो गया है ? या कुछ और था जो ना कभी उन्होंने कहा ना कभी हमने बस दोनों के बीच एक ख़ामोशी थी जब भी साथ होता था तो लगता है समन्दर किनारे बेठे है. तभी फिर एक ख्याल .. नहीं नहीं उनकी उम्र और हम में बहुत फासला है वो शादीशुदा है खुश है अपने परिवार के साथ ... हा तो क्या हुआ उम्र से क्या फरक पड़ता है और शादी से भी कहा कुछ फरक पड़ता है हमें उनसे कोई रिश्ते नहीं बनाने .. हम कहा इनको कुछ कहने वाले है प्यार तो किया ही जा सकता है बिना कुछ कहे भी. खुद से ही बातो में उलझे हुए है ...

इसी बीच फोन की घंटी से उठ गए है और हमें देख कर बोलते है ... अरे में सो गया था और घडी देख के बोलते है दो घंटे हो गए तुमने उठाया भी नहीं यार . हम-आप बहुत थके हुए थे और इतने सुकून से सोते हुए को उठाने का दिल नहीं किया (मन में सोचते हुए की शायद ऐसा कभी मोका ही न मिले की जिनसे आप प्यार करते है वो आपके सामने सोये है और आप बेठे है उनके पास उनको देखते हुए ).

फिर हँसते है चलो आज तो तुमने कुछ कहा ..तुम कुछ कहती क्यों नहीं हो ? मेने बहुत सी बाते देखी है तुम्हारी आँखों में . हम कहते है की आपको देख कर कुछ याद ही नहीं रहता सब भूल जाते है तो बताए क्या :) हँसते है जोर से फिर दोनों चुप ..... हम कहते है क्या हम दोस्त बन सकते है अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो ? वो बहुत देर तक हमें देखते है...फिर कहते है यार चाय तो पीला दो नींद ही नहीं खुल रही . चाय बनाने जाते है ...तब तक उठे है मुंह धोया है बाल बनाये है करीने से फिर से हीरो लग रहे है इस उम्र में भी कमाल का जादू है उनके व्यक्तित्व में . चाय नाश्ता और हम दोनों ख़ामोशी है . कुछ देर बाद बोलते है हम तो पहले से ही दोस्त है ...दोस्त ना होते तो यु तुम्हारे रूम पर नही आते और इतनी बेफिक्री से भला चाय केसे पीते . हमने राहत की सांस लि है ..पता नहीं क्या क्या सोच बेठे थे की कही मना कर दिए तो .

थोड़ी देर बाद फिरसे वो ही बात कहते है में तुमको कुछ बनते हुए देखना चाहता हूँऔर उम्मीद से हमारे हाथ को पकड़ कर .. हम बोलते है एक शर्त पर की आप जब भी हमारे शहर आयेंगे बिना मिले नहीं जायेंगे चाहे एक मिनट ही सही मुलाकात हो . हँसते है और कहते है मंजूर है . चाय खतम हो गई है और चले गए है उठ कर बाय कहा है छोड़ने गए है .

फिर सात आठ महीनो से कोई बात नहीं बस रोज की तरह मेसेज का ही सिलसिला है ... एक दिन फिर अचानक से फोन आता है कहा हो ? हम बोलते है कहा आये ? जवाब मिलता है पूल के यहाँ ... लेने गए है ... नमस्ते किया है घर आये है पानी पिया है और चाय रखी है ... आज सीधे ही एक सवाल किया जाता है ? की तुम्हारी मेहनत में कहा कमी आ रही है ये बताओ हमें? इतनी पढाई कर रही और सेलेक्शन नहीं हो रहा इसका यही मतलब है की कमी हमारे ही प्रयासों में है कही न कही . और वो कमी किस बात की लेकर है बताओ मुझे में हर तरह से तुम्हारी मदद के लिए बैठा हू पर मेहनत तो तुम्हे करनी होगी ना . दूसरा एक और सवाल की या फिर तुम किन्ही और ख्यालो में हो अगर ऐसे कोई बात हो तो तुम हमें बता सकती हो हमें बेझिझक हम दोस्त है ... कभी ये मत सोचना की हम तुमसे बहुत बड़े हैं या दूर के रिश्ते में तुम्हारे कुछ लगते है ..सबसे पहला और आखिरी सच यही है की हम दोस्त है और दोस्त से आप कुछ भी बता सकते हो .

हम चुप है हमेशा की तरह अपनी नाकामी पर ... और शायद सही ही फरमा रहे है अगर दूसरों का सेलेक्शन होता है और आपका नहीं तो कही ना कही तो कमी हमारे प्रयासों में ही है हम ही उतनी मेहनत नहीं कर रहे है . कह रहे है इतनी मेहनत करो की सेलेक्शन हो केसे नहीं . सफलता सामने से मिलनी चाहए तुमको ...

फिर पूछते है में तुम्हारे लिए कितना मायने रखता हू दोस्त माना है ना तुमने मुझे ? हमने हाथ आगे किया है कुछ बताने को ..उनका नाम अपने हाथ पर लिखवाया है दोस्त ऋषभ . बहुत ही हैरान है ये देख कर एकदम से चुप हो जाते है .. कुछ नहीं बोला जाता ख़ामोशी है ... फिर सवाल मेरा नाम तुमने हाथ पर लिखवा दिया और कभी कुछ बताया क्यों नही .. इतनी ख़ामोशी भला किस बात की बताओ ..?

हम बोलते है की क्या बताते आपको की आपसे प्यार करने लगे है ... सब कुछ जानते हुए भी की हमारे बीच उम्र का कितना फासला है आप शादीशुदा है अपने परिवार में बहुत ही खुश है अपने जीवन से . और हम ये भी तो जानते थे की ये सब आपको कभी पसंद नहीं आएगा .

क्या बताते और किस हक से..एक दोस्त के रूप में आपका प्यार मिला साथ मिला खुशी मिली ...वो नहीं खोना चाहते है हम किसी और चीज की उम्मीद कर के आपसे . आपने अपना साथ दिया दोस्त के रूप में जितना हो सके प्यार दिया क्या यही काफी नहीं है...आपके साथ ने हमें बदल दिया जिन्दगी को एक नए सीरे से देखने की सोच दि हिम्मत दि ये क्या कम है .

हम आपकी दोस्ती नहीं खो सकते किसी भी कीमत पर .

वो हमें सुन रहे थे आज बहुत ही शांत हो कर के जेसे वो अक्सर हुआ करते थे पर अक्सर हंसी दिखाई देती थी आज वो हंसी नहीं है बस एक ख़ामोशी है. हम बता रहे थे उनको की वो और उनकी हंसी हमारे लिए कितना मायने रखती है ...उनकी आँखों में कुछ नमी सी है दिख रहा था हमें . महसूस कर पा रहे थे उनको भी और वो हमें और हमारे प्यार को . फिर उठे है हमारे पास आये है हमेशा की तरह हाथ पकड़ के बोलते है ... में क्या चाहता हू तुम जानती हो न ? हम हाँ में सर हिलाते है .. फिर कहते है वो सुनो श्रुति सिर्फ प्यार करने से कुछ नहीं होगा जिन्दगी नहीं चलेगी . में चाहता हू की तुम मुझे प्यार करती हो तो अपने लक्ष्य को प्राप्त करो. में जानता हू की तुम्हारे जिन्दगी में बहुत सी दिक्कते है बहुत से दर्द है पर सिर्फ तुम अपने लक्ष्य पर ध्यान रखो चिड़िया की आँख ही नजर आनी चाहए ..कुछ दुःख नहीं कुछ दर्द नहीं बस एक लक्ष्य बनाओ. इस से बड़ी खुशी मुझे कोई नहीं होगी की मेरी दोस्त ने अपनी जिन्दगी संवार लि . हम स्वीकृति में सर हिलाते है . चाय बन गई है ...एक तरफ गाना चलाया हुआ है फोन में -- खता तो जब हो की हम हाल ए दिल किसी से कहे किसी को चाहते रहना कोई खता तो नहीं . माहोल को थोडा हल्का करने की कोशिस में कहते है की यार गाने भी तुमने बिलकुल सही अपने हिसाब के लगा रखे है . चाय का अंतिम सीप है उठे है जाने के लिए ...पास आये है कहते है एक वादा करोगी ? हमने कहा आपको पूछने की जरुरत है ? कभी मना किया है आपको ? कहते है जब तक अब तुम कुछ बन नहीं जाती अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेती मुझे फोन मेसेज या मिलोगी नहीं . हम फिर से चुप है हाँ कहने को सर हिलाया है . आँखों में नमी है उन्होंने महसूस करी है फिर गले से लगाया है इस बार पहली बार हमने भी उनको पकड़ा है की जाने न दे अपने दोस्त को . ऋषभ कहते है की में नहीं चाहता की में अपनी दोस्त की कमोजोरी बनू में अपने दोस्त की ताकत बनना चाहता हू . तुम्हारे सपने को पूरा करने की इच्छा है की तुम जीतो और अपना सपना जीयो हाँ एक वादा और की तुम्हारी सफलता के नाम हम एक दिन देंगे पूरा तुमको ...हमारे चेहरे पर हंसी लाने की उनकी कोशिस :) एक वादे के साथ जुदा हो गए दो दोस्त ऐसे दोस्त जिन में निशब्द प्रेम था . आज कितने महीने हो गए उनसे बात किये हुए दोनों अपने वादों पर बने हुए है . और हमारे जीवन में एक लंबा इंतज़ार खालीपन लिए हुए बना हुआ है इसी उम्मीद के साथ की एक दिन हम उन्हें वो खुशी जरुर देंगे . उम्र का फासला दिलो के लिए दोस्ती के लिए कही कोई मायने नहीं रखता . कुछ लोग जिन्दगी में दुआ के जेसे आते है बिना किसी स्वार्थ के रिश्ते निभाते है :)

अजनबी दोस्त जिन्दगी भर तुम्हारे इंतज़ार में :) वो कहते है न जब दिल एक है तो दिल में रहने वाला भी तो एक ही होगा ...:)

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