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"हिन्दू राष्ट्र संकल्प समिति" के अध्यक्ष हैं शुक्ला जी ।पूरा नाम - देवेश आत्माराम शुक्ला "कट्टर हिन्दू" ।

उम्र - "23-24 तक के होंगे।"

काम - "हिंदू चिंतक, जमीनी नेता"
(इलेक्शन कभी नहीं लड़े, लेकिन जनसेवा के लिए हमेशा तत्पर, मिलनसार व्यक्ति ।)

कट्टर हिंदू बनने का कारण - " बचपन में इनके माई बाबू जी मुस्लिम उन्मादी दंगे में मारे गए थे ।"

आय स्रोत - " अर्थशास्त्र के नोट्स लिखते हैं स्कूली बच्चों के लिए, और उसके राॅयल्टी से खर्चा चलता है ।"

परिवार - "इनके सिवा कोई नहीं ।"

शुक्ला जी ने जबसे होश सम्भाला तबसे इनकी एक ही ख्वाहिश थी, देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना ।पढ़ाई भी की इन्होंने और उसमें होशियार भी रहे लेकिन इन्हें नौकरी वाली पढ़ाई नहीं करनी थी । इसलिए ज्यादा पढ़े नहीं ।

हालांकि किताबे अब भी पढ़ते थे, कई तरह की किताबें, लेकिन अर्थशास्त्र में कुछ ज्यादा ही रूचि थी । इसलिए उसपर लिख भी दिया करते थे । लिखने पढ़ने के लिए कुछ घंटे फिक्स कर दिए उन्होंने, और बाकी समय सिर्फ हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना को साकार करने में लगे रहते ।

उनकी इस हिंदू राष्ट्र की धारणा के लिए उनपर हमले भी हो चुके थे लेकिन उन हमलों से वें और अधिक आक्रोशित और आवेशित हो गये थे ।

आज सुबह सुबह शुक्ला जी उठे, स्नान ध्यान हुआ, चाय बनाया पिया । और फिर दोपहर को खाना बनाने चले तो मन थोड़ा अलसा गया, अब अकेले जीव ,शुक्ला जी ! न कोई आगे न कोई पाछे, इसलिए मूड बना लिया होटल में खाने का ।

घर से जैसे बाहर निकले तो देखा कि कुछ बच्चे ग्राउंड में क्रिकेट खेल रहे थे । शुक्ला जी का खोपड़ी घूमा और उन बच्चों को भी आइस्क्रीम खिलाने के लिए साथ ले लिया ।

बच्चों की टोली के साथ शुक्ला जी बाजार की ओर निकल पड़े । बाजार में आइस्क्रीम की दुकान पर सबको ले जाकर अपने अपने पसंद की आइस्क्रीम लेने के लिए बोल कर शुक्ला जी ने बाजार को आव्जर्व करना शुरू कर दिया ।
(आखिर अर्थशास्त्री जो ठहरे !)

आज इतवार और कल ईद होने के कारण, बाजार में बड़ी भीड़ थी, हर कोई अपनी जरूरत की चीजें खरीद रहा था । बाजार में आज अधिकतर गोल टोपियाँ और बुर्के वाले लोग ही नजर आ रहे थे, और शुक्ला जी मन ही मन इन सबको गरिया रहे थे ।
"ससुरे धीरे-धीरे बढ़ते बढ़ते, देखो कितना बढ़ गए, जहाँ देखो वहीं मुल्ले नजर आ रहे हैं ।"

चारो तरफ नजर घुमाते घुमाते अचानक इनकी नजर थोड़ी दूर पर खड़े एक छोटे से बच्चे पर पड़ी, वो रो रहा था ।

शुक्ला जी ने उसके रोने पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसके माथे पर गोल टोपी थी, जिससे साफ जाहिर होता था कि मुस्लिम बच्चा है । उन्होनें उस बच्चे से अपनी नजर हटा ली और दूसरी तरफ देखने लगे, लेकिन न जाने क्यूँ नजरे घूम घूम कर उस बच्चे की तरफ ही जाती थीं ।

आखिरकार, इन्होनें दुकानवाले से एक आइस्क्रीम लिया और दोनो हाथों को पीछे छुपाकर उस बच्चे के पास गए । उससे रोने की वजह पूछी तो वह और तेज तेज से रोने लगा ।
उसे रोता देख, शुक्ला जी अपना हाथ आगे करते हुए बोले
"बेटा ये देखो आइस्क्रीम, खाओगे आइस्क्रीम ।"

लड़के ने सुसकते हुए आइसक्रीम ले लिया, और फिर रोने लगा ।

शुक्ला जी ने फिर से उसे दुलारते हुए पूछा,
"देखो बेटा, अगर तुमने बता दिया कि तुम क्यूँ रो रहे हो तो जितना दिल करे उतना आइस्क्रीम खिलाउँगा तुम्हें ।"

शुक्ला जी की यह तरकीब थोड़ी काम आई, लड़के ने सुबकते, हकलाते हुए जो कुछ बताया उससे समझ में यही आया कि वह अपने माँ-बाप से बिछड़ गया है । शुक्ला जी ने एकबार तो सोचा कि जाने दो, कौन बिना मतलब के पचड़े में पड़े,इसके माँ-बाप को ढूंढे ?

और वें उस बच्चे के पास से हटकर आइस्क्रीम की दुकान पर चले आए । थोड़ी देर खड़े रहे , लेकिन निगाह घूम कर फिर से उसी बच्चे पर गयी । अब वह बच्चा इनकी तरफ देखकर रो रहा था ।

उस बच्चे को देखकर, शुक्ला जी ने आइस्क्रीम खा रहे बच्चों से दुकान पर तब तक रूकने को कहा जबतक कि वे लौट कर न आएँ । और खुद फिर से उस बच्चे के पास गए, उसको गोद में उठाया और बाजार की भीड़ में घुस गए।

काफी देर तक घूमने के बाद बच्चे को उसके अब्बू दिखाई पड़ गये और वह जोर जोर से चिल्लाने लगा ।

उधर वें लोग भी इस बच्चे को ही ढूंढ रहे थे, इसलिए जब उन्हें अपना बच्चा दिखाई दिया तो खुशी के मारे उछल पड़े और आश्चर्यचकित भी हुए क्योंकि उनका बच्चा उस शख्स के गोद में था जिसके यूट्यूब वीडियोज को देखकर वें खूब गाली देते थे ।
फेसबुक पर तो शुक्ला जी की माँ-बहनों को गाली देना इनका रोज का काम था ।

खैर उस वक्त सब कुछ भूलकर पहले तो वें अपने बच्चे से लिपटकर खूब रोए, और फिर आँख में आँसू भरकर शुक्ला जी की तरफ देखते हुए बोल पड़े,
"शुक्ला जी ! माफ कर दीजिए हमें । आप जानते भी नहीं हैं कि मैनें आपको क्या कुछ नहीं कहा है ?"

उनकी बात सुनकर शुक्ला जी के मुँह पर हल्की सी मुस्कान आयी ।
(मानों वें दिखा रहे हों कि हमने तुम्हारी गालियों को नजरअंदाज कर दिया है ।)

लड़के के अब्बू ने थोड़ा रूककर फिर से सवाल किया,
"अच्छा शुक्ला जी ! हम मुल्लों को यूँ ही बचाएँगे तो हिन्दू राष्ट्र का सपना कैसे पूरा होगा ?"

शुक्ला जी चुपचाप खड़े थे ।इस वक्त उन्हें कोई जवाब नही सूझ रहा था ।

और इस तरह,
एक कट्टर हिंदू ने एक कट्टर मुसलमान को दुनिया की सबसे कीमती और पाक ईदी दे दी थी ।

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