दर्द का रिश्ता

उनसे मेरा दर्द का रिश्ता है

वे दर्द देते हैं,

हम दर्द लेते हैं।

उनके दिये दर्द को

दिल में छुपा लेते हैं।

करते हैं लाख कोशिशें,

दर्दे दिल छिपाये नही छिपता है............उनसे मेरा............... ।

कुछ तो दिया उन्होंने,

हो लेते हैं खुश यह सोचकर।

बढ़ जाता है जब दर्द बे इन्तहा,

रो लेते हैं बचाकर उनकी नजर।

मेरे दिल का दर्द आँखों से,

आँसुओं संग रिसता है........................उनसे मेरा................... ।

हम चाहत से देखते हैं उनको,

वे बेरूखी दिखाते हैं।

जुनूनी हालत देखकर मेरी,

मुँह फेरकर मुस्कराते हैं।

यह है हकीकत या मेरी दीवानगी,

मुझे उनकी बेरूखी में प्यार दिखता है...........उनसे मेरा...............।

मैं उनकी मस्त आँखों में देखता हूँ अक्स अपना,

उनके लरजते होठों पर देखता हूँ नाम अपना।

दिल से दिल मिलेंगे कभी न कभी,

खुली आँखों से देखता हूँ मैं सपना।

यह बेरूखी है उनकी आँखों की बदमाशियाँ,

वरना दिल तो उनका फरिश्ता है........................उनसे मेरा............।

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