एक नज़र का प्यार और पन्द्रह दिन...

कहते हैं, ज़िन्दगी में एक समय ऐसा ज़रूर होता है जब आपको कोई अच्छा लगने लगता है और बस यही चाहत रहती है कि काश वो मेरे साथ हो, और ये तड़प तब और बढ़ जाती है जब किसी से पहली बार नज़रें मिली हो, उस वक़्त न कुछ समझ आता है और न ही क्या सही है क्या गलत इसका भी कोई अंदाजा नही होता है, बस एक ही धुन में चलते जाओ चलते जाओ, इसीलिए कहते हैं यह उम्र ज़रा कच्ची होती है, इसमें जोश जोश में कुछ भी हो सकता है, लोगों को मीलों दूरियाँ कम लगने लगती है मानो बस अभी पहुच जायेंगे, और तो और रातों की नींदें और दिन चैन दोनों ही खोने लगता है, जब इस तरह का व्यवहार घर वाले देखेंगे तो पूछेंगे ज़रूर की आज कल हुआ क्या है तुमको, अब उन से कैसे कह दें कि हमें किसी से प्यार हुआ है, क्यूंकि ये समाज हमें बोलने नही देता, हमारी भावनाओं को रोकता है बोलने से, कुछ इसी तरह के हालात इन दोनों के साथ थे|

यह कहानी है अविनाश(बदला हुआ नाम) की जब वह सन 2009 में ग्रेजुअसन में पढता था, और अपने एन सी सी कैम्प में गया था| हर सत्र की तरह वह अपने एन सी सी की ट्रेनिंग के लिए अपने कालेज जाता था, अचानक एक दिन बटालियन के आफिसर ने कहा कि एक कैम्प जा रहा है भुबनेश्वर, उडीसा, क्या तुम जाओगे, अविनाश ने कहा हाँ ज़रूर मगर एक शर्त थी की पूरी टीम को बनाने में उनकी मदद करना था, अविनाश तैयार हो गया, झटपट उसने फार्म लिया और भर दिया, और घर वालों से भी परमीसन मिल गई फिर क्या था, टीम भी तैयार और सामान भी बंधा हुआ रखा था, अविनाश और उसकी यूनिट ने अपनी ट्रेन पकड़ी और दो दिन के सफ़र के बाद आखिर कैम्प में पहुच गए| कैम्प पहुचते ही बरसात होने लगी और लगातार दो दिन तक बारिश होती रही इसलिए कोई गतिविधि भी नही हुई, इस कैम्प में भारत के सभी राज्यों से लड़के और लड़कियां आये हुए थे, तीसरे दिन जब बरसात रुकी तो शाम को रोल काल के लिए सभी राज्यों की यूनिट खड़ी हुई, अविनाश जहाँ अपनी टीम के साथ खड़ा था ठीक उसी के ठीक सामने उत्तराखंड की लड़कियों की बटालियन खड़ी थी, उसी समय उसकी नज़र सामने खड़ी उस लड़की पर गई, अब क्या जब नज़रें मिलती हैं तो कुछ कुछ तो होता ही है, ठीक उसी तरह दोनों ने एक दुसरे को देखा और फिर रोल काल ख़तम हुआ, सब लोग अपनी अपनी प्लेट लेकर खाना खाने के लिए मेस की ओर गए, अविनाश भी अपनी थाली उठा कर चल दिया, जैसे ही मेस में वो पंहुचा सामने वही लड़की खड़ी थी और वो भी उसे देख रही थी और अविनाश भी उसे देख रहा था, अचानक पीछे से उसके दोस्तों ने आवाज़ लगाईं, “अरे क्या हो गया अविनाश लाइन आगे बढ़ गई अब तेरी बारी है” इतने में दोनों की नज़रें टूट गई, अब तो खाना खाया गया और अपने अपने कमरे पर पहुच गए, अविनाश ने अपना बिस्तर लगाया और अपने फ़ोन से गाने सुनने लगा, उस समय कोई बहुत ज्यादा फंक्सन वाला फ़ोन नही हुआ करता था बस वही नोकिया का फ़ोन लेकर उसमे कुछ प्यार रोमांस वाले गाने भरे हुए लेकर चलता था, बस वही उसके लिए एक छोटी सी दुनिया थी मनोरंजन के लिए, और तो और उसका वो फ़ोन पुराना भी था तो बना बना के चलाता था, हाँ एक कैमरा ज़रूर था जिसमे कुछ छोटी छोटी तस्वीरें ले सकते थे| खैर, अपने गानों में मस्त अविनाश लेटा हुआ था, तभी उसके साथी आये और पूछने लगे, “खाने के वक़्त क्या हो गया था तुझे लाइन कब की आगे बढ़ चुकी थी और तू वहीँ का वही खड़ा था”, अविनाश ने इस बात से इनकार कर दिया की कुछ नही बस ऐसे ही, मगर दोस्तों को तो जानते ही हो, वो तो गड़े मुर्दे तक उखाड़ लाते हैं, ये तो बहुत छोटी सी चीज़ थी उनके लिए, अब रोज़ रोज़ वही होता अविनाश के साथ वो उस लड़की को देखता और वो लड़की उसे, और ये दोस्त हम दोनों को, अब तो यकीन हो हो गया था दोस्तों को कि बात तो कुछ है ही, फिर एक शाम को जब सब लोग थोडा गप शप के लिए बैठे तो फिर उन्होंने पूछ ही लिया और अब तो अविनाश को बताना ही पड़ा|

सारी कहानी जानने के बाद दोस्तों ने उसका नाम पूछा, अब नाम तो पता नही क्यूंकि वो दोनों बस एक दुसरे को देखा करते थे मगर बातें करने की ज़रा भी हिम्मत किसी में भी न थी, अब तो और डर लगने लगा था, अविनाश के दोस्तों को यह सब पता चल गया था, अब सभी ने ठान ही लिया कि कुछ तो करना ही है, किसी तरह वो रात बीती, अब अगले दिन इन दोस्तों ने अविनाश की यूनिट में जो लड़कियां थी उनसे बात बता दी, अब तो मानो अविनाश के पैरों तले ज़मीन ही खिसक गई हो, मगर कुछ देर बाद जब वो साथी लड़कियां आईं और ये बात उससे पूछी तो उनको भी कहानी में मज़ा आने लगा, और अब तो रफ़्तार भी यहीं से पकड़ने लगा इस एक नज़र वाली गाड़ी की| कैम्प के लगभग बारह दिन बीत चुके थे मगर अविनाश को उस लड़की का नाम, पता कुछ भी नही मालुम था, बस वो दोनों हर समय एक दुसरे को देखते रहते थे, मगर अविनाश ने जब अपनी साथी लड़कियों का इस कहानी में दिलचस्पी देखि तो उनसे “उसका नाम पता मालुम करने को कहा” अविनाश दर तो गया था कि कहीं वो लड़की ये न जान जाए कि ये सब अविनाश कर रहा रहा है, और कैम्प के आफिसर लोगों को ये बात पता न चल जाए, मगर कहते हैं न जब नज़रें मिलती हैं और कोई पसंद आ जाता है तो क्या सही है क्या गलत है कुछ भी नही समझ आता है, अब गाडी कुछ पटरी पर आती आती दिख रही थी, आखिरकार उस लड़की का नाम पता मिल ही गया, उसका नाम था “किरन” (बदला हुआ नाम) और वो उत्तराखंड के कौशानी की रहने वाली थी, अब तो अविनाश और फुला न समा रहा था लड़की उत्तराखंड की थी और वो उत्तर प्रदेश का, दोनों एक दुसरे के पडोसी जो थे, और किरण खूबसूरत भी थी|

कैम्प का आखिरी दिन भी आ ही गया था, अब तो बेचैनियाँ और बढ़ रही थी किरन से अलग जो होने वाले थे, लेकिन तभी पता चला की कानपुर तक वो यूनिट भी उसके साथ उसी ट्रेन में आ रहे हैं, अब तो अविनाश का मुरझाया हुआ चेहरा खिल उठा था, मानो बरसों से एक सूखे हुए पेड़ पर पानी पड़ गया और वो हरा भरा हो गया हो, अब तो झटपट सारा सामान बंधा और बस में अविनाश और उसके दोस्त बैठ गए की अचानक देखा कि उसी बस में किरन भी आ रही है, अब तो मानो सारा जहाँ मिल गया हो उसे, बस रवाना हो गई रेलवे स्टेसन के लिए, सभी लोग स्टेसन पर एक साथ अपना सामान रखा, अब यहाँ पर उसके दोस्तों ने अविनाश को परेशान करना शुरू कर दिया, क्यूंकि वो दोनों एक दुसरे के नज़दीक ही खड़े थे, और अब तो सारा खेल भी अविनाश को समझ आ गया, वो इसलिए कि किरन के दोस्त और अविनाश के दोस्त एक दुसरे से मिल गए थे, अब क्या, अब तो ऐसा लग रहा था मानो सारा जहां बस उन दोनों को मिलाने के लिए तड़प रहा है, सोचते सोचते साथ के आफिसर ने कहा कि ट्रेन का पता लगाओ, अविनाश अपने दो दोस्तों के साथ ट्रेन का पता लगाने को चला गया, ट्रेन को पूरी जंक्सन से आना था भुबनेश्वर पहुचने का समय दोपहर के 12:15 मिनट पर था, अभी ट्रेन को आने में तकरीबन आधे घंटे का समय था और वो ट्रेन भुबनेश्वर जंक्सन पर सिर्फ 10 मिनट के लिए रुकना था और पूरी टीम का सामान भी बहुत था इसलिए सभी का रहना वहां ज़रूरी था, अब ज़िम्मेदारी तो अविनाश पर थी की सभी लोगों का सामान ट्रेन में रखवाना और सभी को साथ में रखना, इतने में ट्रेन आ गई सारा सामान चढ़ा लिया गया और जब अविनाश ने गिनती शुरू की सभी की तो एक लड़का नही था उसमे, अब उसके बारे में सभी से पता किया इतने में किसी ने बोला कि वो पैसे निकालने ए टी एम् की तरफ गया है, अविनाश को मालुम था कि ए टी एम् कहाँ पे है स्टेसन पर, अब वो ट्रेन छुटने में सिर्फ दो मिनट थे और अविनाश उसे ढूढने के लिए निकला, आखिर वो लड़का वापस आ गया तब तक उसके पास फ़ोन आया, अविनाश वापस आ ही रहा था कि इतने में ट्रेन चल दी, और अविनाश ट्रेन को पकड़ने के लिए भागने लगा इतने में ट्रेन का स्लीपर कोच के डिब्बे निकल गए आखिर में जनरल कोच का डिब्बा किसी तरह पकड ही लिया, और अपने दोस्तों को फ़ोन किया की वो ट्रेन में चढ़ गया है, और अगले स्टेसन पर वो कोच में आ जाएगा, खैर कटक में ट्रेन रुकी और कोच बदल लिया और साथियों के पास पहुच गया, सबने दोपहर का खाना खाया और आराम किया|

शाम के तकरीबन 6 बज रहे थे अविनाश के कुछ दोस्त ट्रेन में उत्तराखंड की यूनिट को ढूंढने निकले तो पाया कि वो उसके कोच से आठ कोच आगे हैं, अब उनको तो अविनाश के लिए कुछ करना ही था, तो वो पहले सबसे मिल आये, और रात को खाना खाने के बाद, अविनाश को टहलने के बहाने लेकर गए उसके दोस्त आगे आगे और वो पीछे पीछे, आखिर में जब वो रुके तो देखा वो लोग फिर सामने और साथ में उनकी यूनिट के आफिसर भी अब तो अविनाश के हाथ पाव फूलने लगे, लेकिन सभी वहां बैठे अविनाश भी बैठा, सभी लोग बाते कर रहे थे मगर वो चुप था, तभी किरन ने बात शुरू की अविनाश की ओर इशारा करते हुए उसके बारे में जानने की कोशिश की, अब तो अविनाश फिर से खुश की यहाँ तो कोई डर नही है वो तो बेवजह डर रहा था| ट्रेन का सफ़र अब तो और रोमांटिक होने लगा, और दोनों ने एक दुसरे से बातें करना शुरू कर दिया, लगभग एक घंटे बैठने के बाद अविनाश उठ कर जाने लगा सोने के लिए उसे नींद आ रही थी, वो वापस चला आया और अपनी सीट पर सोने की तयारी कर सोने वाला ही था की देखा उसके दोस्त किरन और उसकी सहेलियों के साथ आ रहे हैं, और सभी बैठे फिर अन्ताक्षरी शुरू की, अब तो नींद ही उड़ गई अविनाश की, वो भी बैठा सुन रह था, और इत्तफाक की बात तो ये है कि अविनाश ऊपर वाली बर्थ पर बैठा था, और किरन नीचे वाली बर्थ पर, सभी लोग तो आपस में खेल रहे थे मगर उन दोनों से बिना देखे एक दुसरे को रहा न जा रहा था, जब ये आँख मिचली का खेल चल रहा था तो उसके (अविनाश) दोस्तों ने किरन को सब कुछ बोल देने को कहा, खेलते खेलते तकरीबन रात के बारह बज गए, अब सब को सोना था, तो यूनिट की आफिसर बोलीं कि जाओ किरन और उनकी टीम को उनकी बोगी तक छोड़ आओ, अविनाश और उसका एक दोस्त उनको छोड़ने जा रहा था, किरन सबसे पीछे चल रही थी और उसके पीछे अविनाश, दोनों के बीच कुछ कदम का फासला ही था, तभी अविनाश ने किरन को आवाज़ दी, वो कुछ देर के लिए वहीँ रुक गई और फिर चल पड़ी, और उसकी बोगी तक पहुच गए, जब अविनाश वहां से चलने लगा तो उसने अपनी बात को इशारे में कहा कर गुड नाईट बोल कर वापस आ गया| जब वो फिर से अपनी दिल की बात किरन से न कह पाया तो उसके आँखों में आसू आ गए और दिल में एक बोझ लेकर सो गया कि मैं उसे अपने दिल की बात बता पाऊंगा या नही| खैर, रात बीती, सुबह हो गई, अब कुछ लोगों को अपने फ़ोन चार्ज करने थे तो उन्होंने अविनाश को दिया और वो अपने दोस्तों के साथ थर्ड ए सी में फ़ोन चार्ज करने चला गया, अविनाश के साथ एक लड़की भी थी जिसने सलाह दी कि “उसे यहाँ बुला लो और अपनी बातें कह दो”, अविनाश ने हाँ कर दी और उसकी दोस्त किरन को बुला लाइ, तभी ट्रेन का एक कर्मचारी आया और उसने सभी को बाहर बैठने को कहा सिर्फ एक ही व्यक्ति वहां बैठ सकता था, तो एक को छोड़ कर अविनाश, किरन और किरन की दोस्त और अविनाश के दोस्त बाहर आकर गेट के पास खड़े हो गए, फिर अविनाश ने सभी को वहां से जाने को कहा, और किरन को वहीँ रोक लिया, कुछ देर तक तो किरन से बाते होती रही, लेकिन फिर अविनाश ने जब उससे कहा “कि मेरी तरफ देखो” तो वो सिर्फ मुस्कुराती रही लेकिन अविनाश की ओर नही देख रही थी, कुछ समय तक चुप चाप खड़े रहने के बाद अविनाश ने फिर से एक बार मुड़ने को कहा, अब किरन ने अविनाश की ओर देखा, और अविनाश ने अपना दिल मजबूत करते हुए, उसे “आई लव यू” कह दिया और अपने दिल की बात उससे बता दी, अब बारी किरन की थी अविनाश ने किरन से उसके आई लव यू का जवाब माँगा, मगर किरन बार बार कह रही थी, “नही मुझे जाने दो” और फिर वो चली गई| तब तक अविनाश के दोस्त आ गए और उन्होंने अविनाश से पूछा “क्या हुआ अपने दिल की बात बताई या नही” अविनाश ने कहाँ “मैंने अपने दिल की बात तो बता दी है मगर उसने कोई जवाब नही दिया है, अगर उसे मुझसे प्यार होगा या उसके दिल में कुछ भी होगा मेरे लिए तो वो ज़रूर आएगी एक न एक बार” अविनाश और उसके दोस्त अपने कोच में वापस आ गए थे फ़ोन चार्ज करके, सभी लोग ऐसे ही आराम से बैठे थे, अचानक किरन आई और अविनाश का फ़ोन माँगा कहते हुए “मुझे घर पे फ़ोन करना है” अविनाश का क्या उसने झटपट दे दिया, मगर ये भूल गया था की उसकी तस्वीर उस फ़ोन में है, जैसे ही अविनाश ने अपना फ़ोन किरन को दिया वो लेकर चल पड़ी और तभी उसे याद आया और भागते हुए उसे रोका और उससे फ़ोन ले लिया, तभी किरन की सहेली फ़ोन नंबर लेने चली गई, और हम दोनों फिर से अकेले, अब अविनाश और किरन अनजान बोगी में थे वहां उन्हें कोई नही जानता था, मगर दोनों ही एन सी सी की वर्दी पहने हुए थे, दोनों एक दुसरे को देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे, तब तक दोनों के दोस्त आ गए और अब उन लोगों ने किरन को कहा “जो भी तुम्हारे दिल में है सच सच अब बोल दो” मगर फिर भी वो कुछ नही बोली|

अविनाश को कानपुर उतरना था और किरन को दिल्ली होते हुए अल्मोरा जाना था, अब कानपुर आने में सिर्फ एक घंटा ही बचा था और दो स्टेसन, अविनाश ने एक बार फिर से उससे जवाब मांगा, और साथ यह भी कहा, “दो स्टेसन बाद मैं तुमसे और तुम मुझसे बिछड़ जाओगी”, यह सब बात होते होते एक स्टेशन निकल गया, अब सिर्फ आधा घंटा बचा था कानपुर आने में, जब उसने कोई जवाब नही दिया तो अविनाश ने उसका मोबाईल नंबर माँगा, तो उसने बोला “मैं मोबाईल नही रखती” तो अविनाश ने कहा कोई नंबर हो तो दो, जिससे तुमसे बात हो सके, काफी सोचने के बाद उसने अविनाश को उसका मोबाइल मांगा और अपना नंबर टाइप कर दिया और फिर उसने अविनाश का नंबर भी लिया, इस नंबर लें दें के सिलसिले के बाद अविनाश ने फिर से किरन से कहा कि उसके पास सिर्फ दस मिनट हैं, लेकिन होनी को कौन ताल सकता है, जब नज़रें मिली ही है तो कुछ तो सुरूर चढ़ना ही था, यह सब चल ही रहा था कि अचानक ट्रेन में हल्का सा ब्रेक लगा और दोनों एक दुसरे के करीब आ गए, अब किरन ने अविनाश को “ओके” बोला, ऐसा लग रहा था की वो जानती है की कब ब्रेक लगेगी और उसे बोलना है, लेकिन अविनाश ने अनसुना करते हुए उससे फिर एक बार पूछा, तो अब किरन ने “हाँ आई लव यु”|

आखिरकार अविनाश और किरन ने अपने दिल का बोझ दूर ही कर दिया, अगर उन्होंने ये बात साझा नही की होती तो वो आज भी उस पल के लिए सोच रहे होते कि “काश हमें बोल देना चाहिए था”| अब कानपूर आ गया था और अविनाश को यहीं उतरना था, दोनों ने एक दुसरे का नंबर तो ले लिया था, अब आपस में बातें भी होने लगी थी एक महिना बीता दूसरा महीना बीता, की अचानक से किरन का पाने नंबर बंद आने लगा, अब अविनाश रोज़ फ़ोन करता लेकिन नंबर तो स्विच आफ, तो उसे किरन की दोस्त को फोन लगाया और किरन के बारे में जानने की कोशिश की मगर उसे भी कुछ नही पता था, और वो भी फ़ोन करती तो भी नंबर स्विच आफ़ बताता, और अब बातें बंद हो गई|

इस एक नज़र का खेल जो प्यार में बदल रहा था सिर्फ एक मोबाईल नंबर की वजह से रुक गया, अविनाश ने उस नंबर को खूब ढूंढा और किरन का पता लगाने की कोशिश की मगर कुछ भी नही मिल पाया, अविनाश आज भी उसको याद करता है और उसे ढूंढने की कोशिश करता है|

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