एक अनोखी पाज़ेब

बहुत समय पहले की बात है ,उस समय साहिल की नई २ शादी हुई थी ,शादी के बाद ही साहिल का ट्रांसफर दूसरे गाँव में हो गया था ,साहिल एक सरकारी स्कूल का शिक्षक था ,साहिल और उसकी पत्नी रज़िया दोनों उस गाँव में शिफ्ट हो गए |

साहिल ने एक घर किराये पर लिया जो एक पार्क के बिलकुल सटे था ,उस जगह पर सिर्फ एक ही घर था जिसमे साहिल और रज़िया रहने के लिए आये थे ,लेकिन कुछ दूर पर पूरी बस्ती थी ,गाँव के लोग उन दोनों से हमेशा मिलने आया करते थे ,रज़िया कुछ दिन तो साहिल के साथ ही रही लेकिन उसके अब्बू की तबियत ख़राब होने की वजह से उसे अपने मायके जाना पड़ा,रज़िया के जाने के बाद साहिल की ज़िन्दगी में ऐसा बदलाव आया जिसकी वजह से उसका चैन सुकून सब ख़त्म हो गया |
रज़िया के गए दो तीन-दिन ही हुए होंगे ,अचानक से साहिल की ज़िंदगी में एक भयानक बदलाव आया जो हर किसी के दिल को दहला सकता है |
बात है 12 नवम्बर 1982 की ,हर रोज़ की तरह आज भी साहिल सुबह 5 बजे उठ कर सैर पर जाने के लिए तैयार हो रहा था ,साहिल एक टी-शर्ट और निक्कर पहन कर सैर पर निकल पड़ा ,पार्क में एक दम सन्नाटा था सिर्फ कुछ कीट-पतंगों की आवाज़े आ रही थी ,सर्दी का समय था इसलिए हर जगह अँधेरा छाया हुआ था ,ठण्डी २ हवाएं चल रही थी ,जो बार २ सर्दी बढ़ने का संकेत दे रही थी ,पार्क में हल्की हल्की रौशनी गली में जल रही लाइट की वजह से आ रही थी ,साहिल ने कोई स्वेटर नहीं पहना था उसे बार २ ठण्ड का एहसास हो रहा था ,वह सोच रहा था की जल्दी से टहल कर वापस घर चला जाऊ , साहिल ने अभी पार्क का एक ही चक्कर लगाया ही होगा तब उसे किसी औरत कि पायल के बजने की आवाज़े आयी , वह सोचने लगा शायद गाँव की कोई औरत होगी ,वह उस आवाज़ को अनसुना कर के पार्क की दूसरी चक्कर लगाने लगा और बार २ इधर-उधर भी देख रहा था की आखिर ये आवाज़ कहा से आ रही है,साहिल ने अब अपना दूसरा चक्कर भी पूरा कर लिया था, लेकिन वह ये नहीं समझ पाया की आखिर ये आवाज़ किस छोर से आ रही हैं ,साहिल अब अपना तीसरा चक्कर शुरू कर चूका था ,अचानक से ज़ोर की हवा चली ,हवा इतनी तेज़ थी के साहिल को अपना बचाव करने के लिए पीछे मुड़ना पड़ा ,तभी हवाएं बिलकुल शांत हो गयी ,साहिल दुबारा आगे घूम गया ,जैसे ही उसने अपना दूसरा कदम आगे बढ़ाया उसे ऐसा अहसास हुआ जैसे उसके पैर के निचे कुछ हैं ,वह थोड़ा पीछे होकर देखने लगा ,दरअसल उसके पैर के निचे एक पाज़ेब था जिसकी आवाज़ उसे बार २ अपनी ओर आकर्षित कर रही थी साहिल उस पाज़ेब को उठा कर अच्छे से देखने लगा ,तभी उसे लगा सामने से एक और पाज़ेब की आवाज़े आ रही हैं ,वह उस आवाज़ का पीछा करने लगा ताकि वह उसे उसका एक खोया हुआ पाज़ेब दे सके ,साहिल उस आवाज़ के पीछे लगभग घंटो भागा लेकिन उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया ,वह थक कर एक बेंच पर बैठ गया ,तभी उसे अहसास हुआ कि वह आवाज़ उसकी तरफ बढ़ रही थी ,जैसे २ वह आवाज़ उसके करीब आ रही थी उसके चेहरे से पसीने छूटने लगे थे ,साहिल उस आवाज़ को महसूस करने के लिए बिलकुल शांत बैठ गया ,कुछ देर बाद वह आवाज़ बिलकुल उसके पास आकर बंद हो गयी, दूसरा वाला पाज़ेब अब भी साहिल के हांथो में ही था ,वह उठ कर अपने आस पास देखने लगा ,उसे वहाँ कोई भी नहीं दिखा ,सवेरा हो चूका था सर्दी कि किरणे भी हल्की २ देखी जा सकती थी ,साहिल वापस अपने घर आ गया और उस पाज़ेब को अपने तकिये के निचे रख दिया ताकि अगली सुबह अगर कोई उस पाजेब को ढूंढता हुआ आये तो वह उसे दे दें |
आज का दिन तो जैंसे तैसे कट गया ,जब रात हुई तब साहिल खाना-पीना खाकर सोने ही वाला था कि फिर से उस पाज़ेब कि छनछन की आवाज़े सुनाई लगी ,साहिल उस दूसरे वाले पाज़ेब को लेकर उस आवाज़ के पीछे निकल पड़ा जो इस बार उसी के घर में से आ रही थी ,लगभग आधी रात तक वह उस आवाज़ के पीछे २ दौरता रहा लेकिन अंत तक कुछ भी नहीं ढूंढ पाया ,वह छत्त कि सीढ़ियों पर ही सो गया ,अगली सुबह 8 बजे दूध वाले ने आ आकर उसे जगाया था ,साहिल रात की वजह से इतना थक चूका था कि वह उस दिन स्कूल भी नहीं जाता है पढ़ाने के लिए ,ऐसा लगभग कई दिनों तक चलता रहा ,साहिल उस आवाज़ कि वजह से किसी भी दिन चैन से सो नहीं पाता था ,कुछ दिन बाद उसकी पत्नी रज़िया वापस आ आ गयी ,वह साहिल कि हालत को देख कर दंग रह जाती है, साहिल कि वह सूजी हुई आँखे जो यह संकेत दे रही थी के न जाने कब से वह सोया नहीं है ,रज़िया ने जब साहिल से पूछा तब साहिल ने उसे उस पाजेब वाली बात बताई ही नहीं ,वह उसे कुछ भी बता कर टाल देता था,एक पत्नी होने के नाते रज़िया को उस पर शक होने लगा था ,वह उसका सारा सामान चैक करने लगी थी ताकि उसे कोई ऐसा प्रमाण मिल जाये जिससे ये साबित हो जाये कि वह किसी दूसरी औरत के चक्कर में फ़सा है ,रज़िया को उसके सामान से कुछ भी नहीं मिला ,लेकिन जब वह बेड पर बिस्तर लगा रही होती है तब उसे वह पाज़ेब मिलता है ,वह फ़ौरन उस पाज़ेब को लेकर गाँव के सोने व् चाँदी के दुकान पर पहुंच जाती है, ताकि ये पता लगा सके की ये पाजेब किसने ख़रीदा है,जब वह उस सुनार कि बात सुनती है तो दंग रह जाती है ,सुनार कहता है कि ये चाँदी तो लगभग 1०० साल पुराना है ,और अब इस डिज़ाइन को कोई भी पसंद नहीं करता है ,और ऐसी चाँदी की बनी पायल तो अब कही नहीं मिलती क्यूकि ये बिलकुल शुद्ध चाँदी है ,रज़िया इसके बारे में और जानने के लिए दूसरे सुनार के पास जाती है ,वह भी उसे यही कहता है .................|
अंत में रज़िया घर पर आकर साहिल से पूछती है ,साहिल रज़िया के हाथ से उस पाज़ेब को छीन लेता है ,और उसे डांटने लगता है ,उसी दिन रात को साहिल फिर से वह पाज़ेब लेकर उस आवाज़ का पीछा करने लगता है,ऐसा लगता था मनो साहिल उस छनछन की आवाज़ का दीवाना हो चूका था ,इस बार रज़िया भी उसके पीछे जाती है ,उसे किसी अनजान साये के होने का आभास होता है ,अगली सुबह रज़िया गाँव वालो के पास जाकर सब कुछ बताती है ,गाँव वाले उसे कहते है कि उन्होंने इस पाज़ेब के बारे में पहले भी सुना हुआ है ,और ये पाज़ेब जिसे भी मिलती है उसे अपने साथ लेकर जाती है ,गाँव वाले उसे एक सुझाव देते है कि इस पाज़ेब को किसी सुनसान जगह पर गाड़ दिया जाये ताकि वह दुबारा किसी को परेशान न करे ,रज़िया ठीक वैसा ही करती है वह दिन के समय उस पाज़ेब को लेकर जाती है ,और जंगल में गाड़ देती है ,दरअसल वह दिन में इसलिए लेकर जाती है क्युकि दिन में वो आत्मा कोई नुकसान नहीं पहुँचाती और ना ही उसके पायल के छनछन की आवाज़ें आती है ,उस दिन रात को साहिल चैन से सो पाता है ,कुछ दिन बाद रज़िया उसे उस पायल के बारे में बता देती है ,फिर से वो दोनों ख़ुशी ख़ुशी रहने लगते है|
written by zeba parveen

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