जब कोई पूछे मेरा नाम, तब तेरा न बताता हूँ

देखना चाहे कोई मुझे, तो तेरी तस्वीर दिखाता हूँ ।

बेख़ुदी के आलम में, तुझमें ही खोया रहता हूँ
आँखें तो खुली रहती है मेरी, पर मैं खोया रहता हूँ ।
तन्हाई के मौसम में, तेरी यादों को संजोता हूँ

मुस्कुराना तो छोड़ो यार, केवल आहें भरता हूँ ।
अपना मैंने तुझको माना, सब कुछ तेरे नाम किया

फिक्र करेगी तू भी एक दिन, तूने मुझको क्या दिया ।
बस यादों की भीड़ है, तन्हाई का मेला है

दुश्मन भी नहीं करते ऐसा, ज तूने मुझसे खेला है ।
पर चाहता नहीं दिल तुझे रुलाना, तुमसे प्यार किया है

तोड़ न देना वादों को, जो मैंने ऐतवार किया है ।
कैसा नाज़ुक दौर था वो, जब तुमने मुझको छोड़ा था
क्या हालत थी मेरी तब, जब मेरा दिल तोड़ा था ।
न कोई गिला है न कोई शिकवा, जाना तेरे नाम
पहले तो चंचल थी दुनिया, अब लगता है श्मशान ।

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