गाय ने दो बछड़ों के बाद इस बार बछिया को जन्म दिया था। घर में खुशियाँ मनाई जा रही थीं। आस-पडौस में मिठाई बांटी गयी। बछिया बड़ी होकर दूध जो देगी। ब्यायी गाय के लिए गुड़ का सीरा बनाया जा रहा था। घर भर के लोग उसकी सेवा में जुटे थे।
अंदर एक गन्दी, तंग अँधेरी कोठरी में एक दिन पहले पैदा हुई अपनी नवजात बच्ची के साथ एक जर्जर खाट पर उपेक्षित सी भूखी-प्यासी पड़ी वह सोच रही थी कि काश वह भी गाय या भैंस होती तो आज उसकी बेटी के पैदा होने पर भी घर में मिठाई बंटती और उसे खाने को गर्म सीरा तो मिलता।
उसकी आँखों से आँसू बह चले और होंठ बुदबुदाये, भगवान अगले जनम में मुझे गाय या भैंस ही बनाना।

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