हमारी दुनिया के अलावा एक दुनिया और भी है। जिस से हम बिल्कुल अनजान है । ये दुनिया आत्मायो की है। हम चाहे कुछ भी ना जाने उनके बारे में चाहे उन पर भरोसा ना करें । भले ही उनको न देख सकें। लेकिन हमारे आस पास कई बार ऐसी घटनाये घटती है जो उनके अस्तित्व पर यकीन दिलाती है, की वो हमारे आस पास ही हैं।
मेरे साथ भी एक ऐसी ही घटना घटी की उनके अस्तित्व पर भरोसा हो गया। मै अपने जीवन की घटना आप को बता रहा हॅू ।
मैं विकास यहॉ आई एम टी में एक कम्पनी मे जॉब करता हॅू कभी कभार घर पहॅचने मे लेट भी हो जाता हॅॅू मेरी शिफट होती है कभी सुबह दस बजे से श्याम पॉच बजे तक । तो कभी श्याम 5 बजे से रात के दस बजे तक।
ऐसा ही चलता रहता है मै अक्सर घर पर जल्दी पॅहुचने के लिए कच्चे रास्ते से निकल जाता था। जो रस्ता रात के समय बिलकूल सूनसान होता हैं दोनो तरह खेत ही खेत ही । दूर दूर ही कोई एक दो घर होगे जो ढाणियो मे बसते है ।
उस दिन भी मेरी श्फिट श्याम की थी मुझे मेरे दोस्त का इन्तजार था। उसके आने के बाद ही मुझे घर के लिए निकलना था। ल्ेकिन वो है कि आने का नाम ही नही ले रहा था।घर से पत्नी की कॉल आई।
मैंने उठाया
‘‘हेलौ कहॉ रह गये, आज इतनी लेट, घर आयेंगें की नही उसने गुस्से मे कहा ।‘‘
मैने कहाः हॉ बस मेरा दोस्त आने वाला ही है, उसके आते ही मै निकल रहा हू, ये कहकर मैने फोन बन्द किया।
तभी बाईक का हॉर्न सुनाई दिया। मेरा दोस्त आ गया था।
कमीने कहॉ मर गया था, कितना टाईम हो गया वेट करते हूये गुस्से मे मैने कहा
‘‘यार मानेसर के पास जाम लगा हुआ है एक घन्टे से वही फॅसा हूआ था, सफाई देते हुये उसने कहा।‘‘
मैंने कहाः यार पहले से ही लेट हॅू, जाम मंे फसॅ गया तो और लेट । घर पर फिर तेरी भाभी से डॉट पडेगी । पता नही आज खाना भी देगी की नही ।
‘‘भाई मेरे आप कच्चे रस्ते से निकल जाओ जल्दी पहूूॅूच जाओगे।‘‘
सही कहा, यार मैंने मुस्कुराते हुये कहा।
मेरा तो ज्यादातर वही से आना जाना होता था। और ना ही मुझे किसी अंधविश्वास पर भरोसा था। और ना ही किसी चीज का डर था । इसलिए मैं अपनी बाईक लेकर कच्चे रास्ते से निकल लिया।
नवम्बर का महिना था ना तो ज्यादा सर्दी ना ही गर्मी थी। चारो तरफ बस अंधेरा ही अंधेरा था । दूर दूर तक सन्नाटा, रह रह कर र्सिफ भमीरी की आवाज सुनाई दे रही थी । करीब 12 बजे का समय हो चूका था । मुझे सामने एक औरत दिखाई दी जिसने चम्चमाती हुई लहंगा - चोली डाली हुई थी , जैसो कि हमारे यहॉ गॉव की औरते पहनती है।
जो अंधेरे मे और ज्यादा चमक रही थी, और उसने घुंघट डाला हूआ था। उसने हाथ आगे किया बाईक रूकाने के लिए। मुझे लगा की ये किसी शादी या पा्रेग्राम से आई है ।यहॉ ढाणियो मे ही जाना होगा शायद किसी घर मे, यह सोच मैंने उसे बाईक पर बैठा लिया। मैंने उससे कुछ नही पूछा कि, आप कहॉ से आये हो, कहॉ जाना है । मैंने सोचा जहॉ रूकना होगा खूद बोल देंगी ।
उसके बैठते ही बाईक पर वजन बढने लगा और स्पीड कम होती चली गई। और वजन बढता ही जा रहा था। समझ नही आ रहा था की एक पतली सी औरत मे इतना वजन कैसे हो सकता है। मैंने बाईक की 110 फूल स्पीड कर ली । लेकिन वजन इतना बढ गया था कि मानो 40 की स्पीड से चला रहा हॅू। जिस रस्ते को मै बीस मिनट मे पार कर लेता हॅू वो आज कम होने का नाम ही नही ले रहा था । लग रहा था जैसे एक घंटे से बाईक चलाये जा रहा हॅू।
मै बहूत डर गया था, आगे बाईक के मिरर मे देखा तो वो औरत नही बल्कि पीछे सिर्फ एक काला साया सा नजर आ रहा था । मै पसीने से तरबतर हो गया था । सांसे जैसे एक पल के लिए रूक ही गई थी । समझ नही आ रहा था हो क्या रहा है ये , क्या करू क्या ना करू । मै बस सीधे बाईक चलाता रहा। फिर जैसे ही मैंने कासन गॉव की सींहम को पार किया । एकदम से कूदने की आवाज आई, और बाईक पर वजन कम हो गया । मैंने पीछे मूडकर देखा तो दूर दूर तक कोई भी औरत नही थी। सिर्फ आवाज सुनाई दी । जा बक्श दिया तुझे, आज तुम्हारा दिन अच्छा था । और वो भयानक हॅसी जो मेरे कानो मैं गुॅज रही थी ।
घर पहॅुचा तो पत्नी ने कहा खाना लगा दू आपके लिए।
मैने कहाः नही, मुझे नीेंद आ रही है मैं सोने जा रहा हॅू।
ये कहकर मै चदर मे मुंह देकर अपने बिस्तर पर लेट गया । मेरी डर से हालत खराब थी । सोच रहा था कि जो आज मेरे साथ हुआ वो सच था या कोई सपना । यह सब सोचते हुयंे मैं सो गया। स्ुाबह उठा तो मैने ,मॉ को सब कुछ बता दिया ।
मॉ ने समझाते हुये कहाः ‘‘बेटा इस संसार में सब कुछ है । अगर भगवान है तो शैतान भी, अच्छाई है तो बुराई भी, इन्सान है ता आत्माये भी वो अलग बात है की वो हमे दिखाई नही देती । पर होती जरूर है । उनकी कोई समय- घडी ही होती की हमे दिखाई दे या कोई नुकसान पहुचाये। कई आत्मायें उनकी गॉवो की सीमंह से बॅधी हुई होती है उनसे बंाहर वो चाह कर भी नही जा सकती । यही वजह है कि वहॉ की सीमह से निकलते ही वो कूद गई । अच्छा रहा की तूमने उसको कुछ नही बोला, नही तो आज शायद यहॉ नही होते।‘‘उस दिन के बाद से मैने उस रस्ते से आना - जाना छोड दिया, और औरतो को लिफट देना भी ।
आज इस बात को छः महीने हो गये है । बडी मुश्किल से औरतो को फिर से लिफट देने लगा हॅू, लेकिन मुझमे उस रस्ते से आने की हिम्मत आज भी नही है। आज भी सोचता हूॅ वो चाहती क्या थी मुझसे । कौन थी वो कोई आत्मा, डायन,जिंदनी या कोई छलावा मेरे लिए आज भी है वो एक पहेली.....।

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