सपने का डर , मेरे भविष्य को

आसमान से पड़ रही झमाझम बारिस ने एक तरफ तो मौसम सुहाना कर दिया , लेकिन दूजी तरफ , इंसानो के द्वारा छुपाई सहर की गंदकी ,,, को भी बहार लाके रख दिया ! लोग परेशान हे , पानी से बने तालाब से गुजरने के लिए , नाक पे रुमाल लिए , सरकार को कोसते हुए ! लोगो के चेहरे साफ़ पड़े जा रहे थे , की वो अब बारिस से परेशान हो गए ,, लेकिन वजह कुछ और ही थी ,,, पानी के तालाब से निकलते हुए ,, मुझे कुछ महसूस हुआ कि मेरे पैरो पे कुछ लिपिट सा गया हे , कही साँप न हो ये सोच के तो मेरे पुरे सरीर में कम्पन सी पैदा हो गयी , पैर वहा से हिलाने तक में मुझे डर की अनुभूति हो रही थी की कही काट न ले ,,, लेकिन कुछ और भी तो हो सकता हे , ये सब्द मेरे लिए हिम्मत का काम कर गए , और कापते हुए हाथो से जब मैंने पैरो में फसे उसे निकाला , तो किसी महिला का पेटीकोट सा जान पड़ा ,, निकल बढ़ रहे लोग , के आगे में बेकार में हास्य का कारन बन गया ! पेटीकोट को साइड में फेका और फिर से उस तालाब से निकलने की , कोशिश में न जाने क्या क्या , पैरो से टकराते रहे ,,, कुछ को तो पैरो से हटा लिया गया , और जो पैरो को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे , उन्हें हाथो ने अलविदा किया ! अब सरकार को में भी कोसने में लगा था ! पर कोसने के अलावा कर भी क्या सकते थे , आसमानो के साफ़ होते बादलो ने कुछ ही देर में अपना इलाका खाली कर दिया , और सूरज कि रौशनी से पूरा सहर जगमगा गया ,, दोपहर होते होते पानी का तालाब बन चुकी गलियो और सड़को में अब सूखेपन कि चमक दिखाई देने लगी , पानी अपने रस्ते हो चला था , लेकिन जाते जाते , कूड़े करकट से सनी हुए , जगह जगह बदबू और बीमारी बनाने वाली कयामत दे गया ! अब सरकार कि जगह इंद्रदेव को दोसी माना गया जब तक कि गली , सड़क साफ़ करने mcd के लोग नहीं आ गए ! गली में फिर से रौनक थी , सड़क साफ़ सुधरी , और आने जाने में गर्व महसूस करा रही थी , घर गया तो सफाई में निकले कूड़े के ढेर को मेरी श्री मती जी ने मुझे पन्नी में बाँध कर दूर कूड़ेदान में जा गेर आने को कहा , mcd कूड़ा उठाने आती जरूर थी कूड़े दान में ,, लेकिन उसकी बदबू इतनी होती थी कि कोई भी वहा जाकर कूड़ा न दाल सके ,, और नाले में ही लोग अपना अपना कूड़ा बहा देते ,, हम कोन सा कम थे ,, बेकार में गन्दी बदबू क्यों सहे ,, इसलिए दूर से निसान बना कर कूड़ेदान की तरफ मारा कूड़ा फेककर ,, हत तेरी कि निशाना चूक गया ,,, ? वापिस आते ही नारियल पानी पिया क्योंकि बारिस की वजह से अब गर्माहट धरती से निकल रही थी , और नारियल पानी ठंडा भी होता हे और मेरा पसंद का भी , नारियल पानी पीके घर की तरफ चल दिए ! हो गयी सफाई मैडम जी ? हा हो गयी , और ये चप्पल बाहर ही निकाल के घुसना पोछा लगाया हे अभी , गन्दा हो गया न तो दुबारा तुमसे लगवा लुंगी ! प्रिये पत्नी जी तो डरा धमका के अंदर चली गयी , और हम चप्पल उतार कर हाथ में लिए अंदर घुस गए क्योंकि बाहर चप्पल छौड़ नहीं सकते कुत्ते का डर नहीं पड़ोसियों का डर हे खरीद के ला सकते नहीं बस दिख जाये किसी की भी !

कमरे में घुसे चप्पल को चपलो की सेज पे सजा के , और टीवी ऑन किया ब्रेकिंग न्यूज़ -- इस वक़्त की खबर दिल्ली से आ रही हे की दिल्ली में उमस के कारण हो रहे हे कई लोग बीमार बेमौसम की बरसात जो चंद मिनटो में दिल्ली की सड़को को तालाब बना के चली गयी , मौसम साफ़ होते ही थोड़ा वक़्त जरूर लगा लेकिन तालाब जल्द ही सूखे की स्थिति में आ गए , लेकिन तपती आग में घी डालने वाला काम आज मौसम ने कर दिया , शाम होते होते दिल्ली में उमस से लोग काफी परेशान दिखे तो कही से ये खबर आयी की लोग एक दम से बीमार हो रहे हे ,, देखे आज की ये ताजा खबर ? बस इस टीवी में लग जाओ , और कोई तो काम हे नहीं तुम्हारे पास ? पत्नी की आवाज सुनते ही टीवी बंद कर दिया ! आज पूरा दिन हो गया , काम करते करते , कमर तक दर्द कर रही हे जरा कमर पर मूव लगा दो ,, कुछ तो काम करलो ? बीवी ,,, जबसे जिंदगी में आयी हे ये समझती हे की वही काम करती हे हम नहीं ,,, बस वो कह देती हे हम कह नहीं पाते क्योंकि जानते हे कह भी देंगे तो जवाब यही होगा ,,, हाँ में तो कुछ नहीं करती ,, फिर भेजदो न मुझे अपने घर जाने क्यों नहीं देते ? मन में ! अब सोच क्या रहे हो मूव लगादो फटाफट और सुनो हम थके हारे हे नहीं कह सकते बस कमर पे उसकी मूव लगा रहे हे एक दिन वो था जब यही कमर हमे तड़पाती थी . हाथ अपने आप ही कमर पे आके रख जाते थे और ये सरमा के हाथ हटवा लेती थी , कोनसा ऐसा दिन नहीं गया होगा जब मैंने कमर नहीं पकड़ी होगी ! नयी बीवी जो थी ! कहा खो गए ? ध्यान हटाया तो बीवी चिल्ला रही थी ? कहा खो गए ? मैंने पूछा कहा खो गए ? कही नहीं ( डरते हुए ) कुछ कहा था मैंने सुना तुमने ? जी , पता नहीं ? पता कैसे होगा , ध्यान तो कही और ही हे जरूर किसी लैला के चक्कर में फश गए होंगे , मुझे तो पहले से ही सक था हटो लगा ली मूव जाओ उस लैला के पास ही जाओ वही मूव लगाके आना ? अरे हम कुछ नहीं सोच रहे थे ? और कोई लैला नहीं हे हमारी भला हमे लैला से क्या लेना देना वो अपने घर खुस हम अपने घर खुस ! इतने सरीफ नहीं हो तुम जाओ रसोई में खाना बनाओ आज तुम तुम्हारी यही सजा हे ! लेकिन मैंने किया क्या हे ये भी सिर्फ मन में कह पाया हकीकत में कहता तो खाने के साथ साथ कही बर्तन भी न माजने पड़ जाये ?

अगले दिन फिर सुबह मौसम ने करवट बदली और वही मूसलाधार बरसात , वही कूड़ा करकट , ऑफिस के लिए जाना पानी में और एक थैली का पैरो में आके takrana ,, ये साले लोगो को भी पन्नियों में बांध कर कूड़ा फेकने की बीमारी कभी नहीं जाएगी ,,,,,,,,,,भगवान इन्हें कभी खुसी न दे , घर में रोज क्लेश हो सालो के ,,, ये कहकर मैंने कूड़े की पन्नी को पैरो से हटाया ,,,,,,,,जैसे ही पन्नी कूड़े की मेरे पैरो से हटी उसने एक भयानक रूप ले लिया , बिजली कड़कने लगी , बारिस भी और तेजी के साथ padne लगी , लोग धर धर कापने लगे , मेरी तो दोनों टाँगे हिलने लगी थी जुबान से बचाओ बचाओ तक न निकलती थी ! कूड़े की पन्नी ने कैसा विचित रूप ले लिया , डर भी लग रहा था देखने में और समाज भी नहीं आ रहा था की ये बला आखिर क्या हे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हस्ते हुए कूड़े की पन्नी जो अब एक सेतान जैसा रूप ले चुकी थी -

हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ ,,,,,, नमस्ते लोगो ! में , कूड़े की देवी ,,,कुड़देवी ! हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!

अजीब हे कूड़े की भी देवी होती हे , खिसक लो इससे पहले ये हमारी बलि माग ले ? कहा जा रहे हो ,, जन्मदाता ? अभी मुड़े ही थे भागने के लिए की ऐसा लगा की हमसे ही कुछ कह रही हे , लेकिन उसकी तरफ देखने में भी अब घीन आ रही हे ! में तुमसे ही कह रही हु जन्मदाता ? अब मुड़के देखा तो पता चला की हमे ही जन्मदाता कह रही हे ? हम तुम्हारे जन्मदाता कहा से हुए ?( डरते हुए ) तुम्हारी वजह से ही तो में धरती पर आ पायी वरना मुझे तो ऋषि मुनियो ने इस धरती से विलुप्त ही कर दिया था ? विलुप्त कर दिया था ? कैसे ? गंदकी न फैला कर ! लेकिन तुम लोगो ने मुझे दुबारा जीवित कर लिया और इसमें सबसे बड़ा योगदान तुम्हारा हे , इसलिए आज से तुम्हे मेरे जन्मदाता के नाम से जाना जायेगा ,,,हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,! एक तो वैसे ही हम एक बच्चे के जन्मदाता नहीं बन पाए घर में झगड़ा आधा तो इसका ही हे , इज्जत भी तो नहीं हे , लेकिन अगर बीवी को पता चला की हम यहाँ जन्मदाता बन गए तो घर से भी गए और जिंदगी से भी ,,, गोली मार देगी भाई वैसे ही उसका फ़ौज में हे ! जी - कुड़देवी ,, आपको गलतफैमी हुए हे , में आपका जन्मदाता नहीं हु ,, ध्यान से देखो यहाँ और भी लोग हे ,, कही किसी और ने तो मुह काला नहीं किया ? कुड़देवी जो अब तक हस्ती थी एक दम गुस्से से मुझे देखने लगी ,, और अपने मुह से उसने कीचड़ की ऐशी पिचकारी मेरे मुह पे मारी की पूरा मुह मेरा काला हो गया ,, और फिर से में लोगो के हास्य का कारण बन गया ! कूद देवी - तुम मेरे जन्मदाता बनने के लायक नहीं हो , ये उपाधी किसी और को जब मिलेगी तब तुम्हे पता चलेगा की इसकी कीमत क्या हे ,,, दूर हो जाओ मेरी नजरो से धरती के बोझ , तुमसे कुछ नहीं हो पायेगा ? भला कितनी भी गालिया दो , पर ऐशी तोमत से तो बचा जिससे मुझे इसका जन्मदाता बनना पड़ता ? लोग क्या कहते ,, कूड़े की देवी का जन्मदाता ,,, हस्ते हुए में ऑफिस चला गया ! शाम होते होते कूड़े की देवी पुरे देश में लोकप्रिय हो गयी , उसका असर भी दिखने लगा जगह जगह गंदगी . अब MCD पर भी रोक लगा दी गयी, की , कही से भी कूड़ा हटाया न जाये, बल्कि कूड़े की पूजा की जाये ,उसकी देख भाल की जाये , दूर दूर से लोग कुड़देवी के दर्शन के लिए आ रहे थे , और उसके जन्मदाता से भी मिलने जो मेरे पीछे ही खड़ा था ?

लोग देश बदल लेते हे भेष बदल लेते हे ,,,,ये तो आज तक सुनते क्या देखते आये हे लेकिन जिस कूड़े को लोगो ने बनाया उसके बाबजूद भी देखना पसंद नहीं करते थे उसकी तरफ और आज देखो ,, जरा सी हिम्मत क्या दिखा दी कूड़े ने इंसानो को उनकी औकात दिखने की लगे चमचा गिरी करने ! वा रे इंसान तेरा क्या होगा ,,, कितनी बार गिरेगा कितनी बार उठेगा ?

घर पोहुचे तो बीवी हाथ में झाड़ू लिए गेट पर ही खड़ी थी , कुड़देवी से कम नहीं लग रही थी , लेकिन कह भी तो नहीं सकते थे मजाक में भी नहीं ! अंदर घुसने की चेस्टा क्या की लगी झाड़ू घुमा के ,, दे झाड़ू ,, दे झाड़ू ,,,,,,,,,, ! अरि क्यों मार रही हे ? अहा ,,,,अहा ,,,,! मारू नहीं तो आरती उतारू ,, कुड़देवी ने तुम्हे अपना जन्मदाता माना लेकिन तुमसे ये भी नहीं माना गया , तुम किसी काम के लायक नहीं हो , आज से तुम्हरा और मेरा रिस्ता ख़तम ,, लेकिन हम तो तुम्हारी वजह से ? मेरी वजह से ,, अरे जो बना हे जन्मदाता जेक देखो वो और उसकी बीवी करोड़ो में खेल रही हे ,,, मूरख पति ,,, जाओ कही चुल्लू भर पानी में डूब के मर जाओ ,, ये कहकर वो जाने लगी और हम पैरो में पड़कर --- नहीं हमे छोड़ के मत जाओ , हमसे बड़ी भूल हुई आज के बाद ऐश नहीं होगा ,, हमे छोड़ के मत जाओ ,, तपाक से एक लात कमर पर - छोडो मेरे पाओ जाने दो मुझे मारो तुम यहाँ अकेले ,,,, नहीं नहीं ,,मत जाओ मुझे छोड़के ,, में अकेले क्या करूँगा ,,,मत जाओ ,,,,,,जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर रोते हुए में ?

बीवी - क्या हो गया ,, क्यों रो रहे हो ? क्या आज भी कोई बुरा सपना देख लिया ? आंखे खोली तो हम बिस्तर पर थे में और मेरी बीवी ! सच में हम सपना ही देख रहे थे क्या आज भी? क्या हुआ क्यों सुबह सुबह इतनी तेज तेज रो रहे हो ? अब बीवी को सच बताया की सपने में पैर पकड़के रो रहे थे तो इज्जत का क्या होगा एक तो वैसे ही घास नहीं डालती फिर तो टांग बांधके भी रखेगी और घास तो फिर भी नहीं डालेगी ? अब क्या सोच रहे हो सुबह के ४ बजे हे सो जाओ ? हा हा ,,, सो जाओ ,, वो जैसे ही सोई हम बिस्तर से उठे , और बाहर की तरफ चल दिए सामने कूड़े का ढेर था ,, बगल में पानी का नाला ,, पेट के बल लेटकर भी पन्नी से बंधा कूड़ा नहीं निकल जो मैंने फेका था , पहचान थी उसकी वो नीली सी अलग पन्नी ,, अब एक दण्डी ढूढ के लाये और पन्नी को निकाल कर MCD के कूड़े दान में डाला ,,, तब जाके सास में सास आयी !

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