वकालत के क्षेत्र में मलिकराजकुमार बिना किसी आधार के आँख बंद करके कूद पड़ा था. जब आँख खोली तो पता चला कि ये बहुत ही मुश्किल कार्य है लगभग नामुमकिन सा. बिना अनुभव शुरू ही नहीं किया जा सकता.सीखना कितना ? दो चार साल... अरे भाई यहाँ इतना समय कहा है घर पर चूल्हे पर हांड़ी चढ़ा आया हुँ हांडी में शाम तक कुछ न चढ़ा तो टूट जायेगी.
चचेरे भाई इसी क्षेत्र में थे . उनसे बात कि तो बड़ी होशियारी से फुसलाया और बताया कि मेरे एक दोस्त के पास बहुत ज़ियादा काम है अच्छा सीख सकोगे. सोचा न मामा से काने मामा अच्छे .. पहुँच गया जहां जाने का हुक्म हुआ था ,भरोसा था एक हज़ार रु महीना भत्ता मिलेगा. यहाँ आकर पता चला शहर में भरोसा नाम का परिंदा दिखता ही नहीं बहुत मांगने पर साढ़े तीन माह बाद मिला चार सौ रुपल्ली.बेटा काला कोट पहन बो लगाकर हीरो बन रहे थे.... सौ रु महीना औकात है तुम्हारी.
नर हो न निराश करो मन को मलिकराजकुमार को खुद को समझाना खूब आता है . एक दिन कोर्ट में ही बड़े ताउजी मिले बेटा दिल्ली में बड़ा मुश्किल है जमना ... जी पिताजी मालूम है. तू अकेला होता तो और बात थी पर तेरे साथ तो बच्चे भाई बहिन भी हैं .
तो ? ताऊजी मैं हिम्मत हार जाऊ ? दिल्ली में रोज़ पटरी लगती है सातों दिन ..गुज़र नहीं होगी तो चार दिन वकालत तीन दिन पटरी.
ताऊ जी ने गले लगा लिया जा.. बेटा तू भूखा नहीं मर सकता.
घर के सामने एक अंकल के दोस्त की लाटरी निकली थी उन्होंने बताया तो मैं बोला क़ि आपके काटे गए टैक्स में से रिफंड दिलवा सकता हूँ.हिसाब लगा कर बताया क़ि २१००० रु.वो हंस पड़े .. कितनी फीस लेते हो ? मैं बोला ३३० रु , उन्होंने ३३० रु निकले और मुझको दिए ले बेटा तेरी पहली फीस.
मलिकराजकुमार ने स्वम को संयत किया .. अंकलजी .. भीख मैं लेता नहीं.. मेह्नत और ईमानदारी से डरता नहीं.
गम्भीर हो कर बोले मैं दस लोगो से सलाह कर चुका हूँ .. कुछ नहीं मिलेगा सरकार सोच समझ कर टैक्स काटती है.
अंकल ३६% टैक्स एडवांस काट लेने का विभाग का प्रावधान है पर आप पूरा सही बयोरा दो तो जितना बनेगा वापस मिलेगा , यदि आपने टिकट पत्नी के नाम कैश कराया होता तो और अधिक रिफंड मिलता ये नियम है.
चल फिर मुझे बता क्या करना है कहाँ दस्तखत करूँ .. पर मैं इनकम टैक्स के चक्कर नहीं लगाऊंगा ये सोच ले,
अपने बॉस से केस की पूरी तैयारी करके बात क़ि तो वो हंस पड़े तेरे को ज़रा ज़ियादा ही जल्दी वकील बनना है? तूने सुना नहीं धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय
गुस्सा तो बहुत आया सीनियर बने फिरते हैं पर केस देखे बिना ही बोलते है. पर खुद को भरसक संयत करे कह दिया बनना नहीं मैं बन चुका हुँ सर.. मैंने जवाब दिया .
लगता था जैसे बॉस को बात चुभ गई थी, नज़र उठा कर मेरी तरफ देख कर बोले सरकार को बेवकूफ समझता है... रिफंड ले कर दिखा ? बॉस ने तल्खी से कहा.
मैंने रिटर्न तैयार की साथ के वकील को दिखाई वो गली दे कर बोला मुत्तर में मच्छिया नहीं मिलतीं .
दो महीने बाद 21000 का चेक अंकल को दिया तो बोले .अपना आफिस कब खोल रहे हो ?मैं बोला १५ फ़रवरी को मेरा जन्मदिन है उसी दिन . जब जीरो से शुरू करना है तो कल क्यों आज क्यों नहीं.

उन्होंने एक नाम और नंबर दिया जो मन हो फर्नीचर यहाँ से ले लेना कोई पैसा देने की ज़रूरत नहीं .. और ये तेरा इनाम है.ये तो ले लेगा न... और गले लगा लिया बस यही आदमी ज़िंदगी में दमदार और अच्छा इंसान लगा

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