आज साँझ बेटा बाप पर चिल्लाया। पिता गुस्सा होने की बजाय सोच में डूब गया। जब वह अपने बेटे की उम्र का था तो वह भी अपने बाप पर चिल्लाया था। वह चिंतन कर रहा था, यदि उस दिन मैं अपने पिता पर नहीं चिल्लता तो शायद आज मेरा बेटा भी मुझ पर नहीं चिल्लता। उस दिन मैं अपने पिता पर चिल्लाया था, आज मेरा बेटा मुझ पर चिल्लाया है; भविष्य में इसका बेटा भी इस पर चिल्लाएगा। आख़िर कब तक यह ख़ानदानी झल्लाहट जारी रहेगी?

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