हैलो?
हैलो.......? आप कौन?
मैं........ सोनू, आप कौन?
तूने चैटिंग शुरू की है और पूछ रहो है हम कौन हैं?
हाँ हाँ चैटिंग तो मैंने ही शुरू की है फिर भी?
फिर भी......... क्या? तू नाम क्यों पूछ रहो है?
वो......वो मैं यह जानना चाह रहा था कि मेरा अनुमान गलत तो नहीं है। तेरी प्रोफाइल पर कुछ भी जानकारी नहीं है इसलिए।
अच्छा! हम रानी बोल रहे हैं गुना से। तू वो ही सोनू है जो हमाए पड़ोस में रहत थो, सूखड़ सो, नाक बहात भओ?
हाँ हाँ रानी...... वो ही तेरा सोनू। तू भी तो नाक सुड़कती रहती थी।
अच्छा सोनू तू, फोन पर बात कर, मोय फेसबुक ज्यादा नाय आत है।
अरे मेरी हीरोइन, मोबाइल नंबर तो लिख तब फोन लगाऊँगा।
ले लिख रई हूँ भैराय काय रहो है। इत्ते साल तक नाय भैराओ अब दो मिनट में परेषान हो रहो है। नंबर है 6655443322।

ठीक है मैं आप को मोबाइल लगाता हूँ।

फेसबुक से हुई बिछड़ी मुलाकात में फिर से रंग भरने लगे।

ट्रिंग..... ट्रिंग.....?
हैलो.... कौन?
कौन क्या? तेरा सोनू।
ओ हो...... सोनू तेरी आवाज तो बिल्कुल शहरी बाबू जैसी हो गई है।
आपके हालचाल बताओ रानी। कैसी हो? मम्मी अभी भी काम पर जाती हैं। आप क्या करतीं हैं आजकल।
ओए सोनू, अब जादा अंग्रेजी में मत बतरा। आप क्या करती हैं क्या खाती हैं गिटर पिटर अंग्रेजी में अपनी इन्दौर की दोस्तन से बात करिओ। मोसे तो सीधी-सादी हिन्दी में बात कर।
हाँ, हाँ, मैं कोषिष करूँगा।
अच्छा चल अब फोन रख। मेरी काम वाली बाई नाराज हो रही हैं। मोय अबे झाड़ू पोंछा लगानो है। मैं मिस्ड कॉल दूँ तबई फोन लगइयो उते से।

एक प्रेम में चोट खाई रानी के मन में, सोनू के साथ हुई बातचीत से फिर से उमंगे खिलना शुरू हो गईं। ओठों पर छाई उदासी फिर से मुस्कराने लगी। हृदय में मुरझाया हुआ प्रेम बिरबा सोनू की फुहारों से हरियाने लगा।

इस बदलाव को गृह मालकिन ने महसूस किया, ‘‘क्या बात है रानी? किसका फोन था। क्या बात हुई तुम एकदम गुनगुनाने क्यों लगी हो?’
‘‘कुछ नाय आंटी जी, वो रांग नंबर था।’’
‘‘ठीक है, पर संभलकर रहना, आजकल फोन पर लोग तुम्हारी जैसी भोली-भाली लड़कियों को फुसला लेते हैं और फिर जिंदगी नर्क बना देते हैं। तुम तो कपिल से चोट खाए बैठी हो।’’

समझाने के बाद भी मोबाइल पर बातों का सिलसिला चलता रहा। कभी काम करने वाले घरों में फोन आ जाता तो रानी झट से कह उठती ‘‘आंटीजी, वो सोनू बहुत ही अच्छा लड़का है। अच्छी नौकरी करता है। उसकी सौतेली माँ है। एक लड़की ने उसे धोखा दे दिया था। उसे उसने खूब पढ़ाया-लिखाया और नौकरी लगते ही वह छोड़कर चली गई। सोनू किसी गरीब लड़की से षादी करने के लिए तैयार है। मुझे भी पढ़ाने या मषीन सिखवाने की कह रहा है।’’

‘‘अच्छा चल तू उसका मोबाइल नंबर बता, अभी ट्रूकॉलर से पता करते हैं उसके बारे में।’’
‘‘लो, आंटी जी लिखो नंबर 5462472614।’’
‘‘क्या नाम बताया तुमने उसका सोनू, पर ये सिम तो पंडित 420 के नाम से है।’’
‘‘उसका पता बता, इन्दौर में पता करा लेते हैं उसके बारे में।’’
‘‘फेसबुक पर देखकर बता, कौन सा सोनू है।
‘‘पता याद नहीं है। फेसबुक पर फोटो भी नहीं पड़ी है।’’
‘‘आंटी जी पहले मम्मी और नाना पता करेंगे। तब शादी करेंगे।’’
‘‘ओ रानी, पहले ही तू कपिल से धोखा खाए बैठी है मैंने पहले भी तुम्हें कहा था कि कपिल टाइम पास कर रहा है। अब तू इस नए जाल में जानबूझकर क्यों फँस रही है। अभी तेरी उमर थोड़े ही हुई है शादी की।’’ अंकल ने भी रानी को समझाया।
‘‘वो कपिल की शादी हो गई है। वो मुझे चिढ़ा रहा था। मैं भी जल्दी से शादी कर उसे चिढ़ाऊँगी।’’

फोन पर हो रही बातों का असर था कि रानी ठेठ गुना की भाषा छोड़कर खड़ी बोली में वार्तालाप करने लगी थी।

अपने भोलेपन के कारण रानी ने अपने पहले प्यार और फिर उसमें मिले धोखे की बात, अपने घर के हालात, पापा, मामा, नानी, नाना के साथ तनावपूर्ण संबंधों आदि के बारे में पूरी जानकारी सोनू को दे दी।
सोनू ने भी रानी के भोलेपन और गरीबी का फायदा उठाते हुए अपने साथ हुए धोखे की कहानियाँ सुनाकर रानी के मन को जीत लिया।

लेकिन चिड़िया फंसने वाली है कि नहीं, के बारे में अपना संषय मिटाने सोनू ने भी रानी के घर आकर देखने का प्रोग्राम बना लिया और रानी को सख्त हिदायत दे दी कि वह किसी भी काम वाली अंकल-आंटी को इसकी भनक न लगने दे।

सोनू आया और घरवालों को सामान आदि के लिए पैसे देकर अपना प्रभाव जमाकर चला गया।
अपना विष्वास जमाने के लिए अपने ऊपर माता आने की बात से और कोर्ट मैरिज के नाम पर एक साधारण शपथपत्र, जिसमें पहले से ही लिवइन रहने का लिखा था, बनवाकर दे गया।
इन सब के बाद भी रानी को अंकल आंटी ने समझाने का प्रयास किया। क्योंकि उनका रानी की ईमानदारी और बचपन से काम करने के कारण लगाव था।
रानी के कहने पर सोनू घर से शादी करने के लिए तैयार हो गया। रानी के भोले-भाले गरीब माता-पिता कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे। वे भी रानी की जिद से हारकर सोनू से उसकी षादी कर रहे थे। शादी हुई पर सोनू की तरफ से उसके एक दोस्त को छोड़कर कोई घरवाला शामिल नहीं हुआ।

एक हफ्ते बाद रानी लौटकर घर आई। नई शादी की कोई उमंग नहीं दिखी। कुरेद कर पूछने पर भी कुछ नहीं बताया। बस कहा मैंने उसकी जिद के कारण शादी की है।
फिर कई सालों रानी की कोई खबर नहीं मिली। उसकी माँ एवं बहन से भी कोई जानकारी नहीं मिली।
और फिर एक दिन अखबार में छपी खबर और फोटो देखकर दिल दहल गया।
किसी औरत की अपनी नर्क सी कॉलगर्ल की जिंदगी से तंग आकर, छठवीं मंजिल से गिरकर मौत की खबर, नववधू के श्रंगार में रानी के फोटो के साथ छपी थी। फेसबुकिया और मोबाइल के इष्क का घातक परिणाम बनकर।

मधुर कुलश्रेष्ठ
गुना

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