कैसे भूल सकते हैं हम वो रात जब जंगल में हमारी कार खराब हो गई थी आज भी जब वो वाकया याद आता है लगता है मानो बुरा व डरावना सपना हो,कितनी काली व डारावनी रात थी वो ।
बात आज से चार साल पहले की हैं पर आज जब भी वो रात याद आती है हमारी रूह काँप जाती है बात ही कुछ ऐसी की किसी अनहोनी का डर कपकँपा जाता।हम दोनों पति पत्नी और हमारे दोनों बेटे सलकनपूर "माँ अम्बे" के दर्शन के लिए सुबह से निकले पर निकलते निकलते हमको 10 बज गये ,पतिदेव बहुत गुस्सा कर रहे थे कि देर कर दी ,रास्ते में गाड़ी का टायर पंचर हो गया अब और गुस्सा कब पहुचेगें । पंचर बन वाया गाड़ी चेक करवाई सब ठीक था बच्चे खुश थे मस्ती करते रास्ते में बंदरो को खाने का समान देते उन्हें चने,संतरे खिलाते खुशी खुशी सलकनपूर पहुँच गये।
हम सीडियो से न जाकर पीछे कार वाले रास्ते से ऊपर चढ़े मैं कार में न जा पैदल ही ऊपर चढ़ी थोड़ी दूर जा कर ही हमारी कार बंद हो गई ।पतिदेव गाड़ी वहीं साइड से लगा बच्चों को ले मेरे साथ आ गये। दर्शन कर खाना खा हम लोग वापसी के लिए निकले पर ये क्या कार ने चलने से मानो मना कर दिया वो स्टार्ट ही नही हो रही थी काफी देर बाद हुई और हम नीचे आए अधेंरा हो गया था ।कार थोड़ी दूर चली और फिर गड़बड़ करने लगीं सामने ही मेकेनिक था उसे दिखाया ,एक घण्टा बीत गया रात होने लगी मेरी परेशानी बढने लगी बच्चे भी मस्ती कर थक चूके थे परेशान हो रहे थे चलो ठीक तो हुई हम आगे बढे लेकिन ये क्या 10मिनिट चली और फिर गाड़ी गरम हो गई पानी डाल आगे बढे अब यह बार बार होने लगा गाड़ी गरम होती हम पानी डालते और आगे बढते पास का पानी भी खत्म हो चूका था अब पानी ढूंढना पड़ रहा था।मन में परेशानी के साथ डर भी बढने लगा ,मन ही मन माँ से प्रार्थना करने लगी हमें जल्दी घर पहुंचा दे ,गाड़ी ठीक हो जाए ।ऐसा कभी नही हुआ था जो आज हो रहा था ।जैसे कोई गाड़ी खराब कर हमें सता रहा हो ,ये बार बार पानी खोज कर लाते और उसमे डालते और पानी मिल भी जाता दूर दूर तक कोई नही दिख रहा था साथ चले लोग जैसे गाऐव हो गये हो ।दुकाने भी बहुत आगे थी ।रास्ता इतना सकरा की एक गाड़ी जब पास से गुजरती तो दूसरी को अपनी रफ्तार कम करनी पडती एक जगह टाट की झोपड़ी में टूटे ड्रम में पानी मिला हमने अपनी पीने की वाटल में भी पानी भरकर रख लिया छोटे बेटे का डर कर बुरा हाल था ,दोनों ने दोस्तों से अपने सुन रखा था कि इस रास्ते शेर घूमता है और कभी कभी बाहर भी आ जाता है उनकी बुआ ने भी भूतो की इंग्लिश फिल्में भी दिखाई थी उन्हें ।दोनों बच्चे बहुत डर रहे थे साथ ही मैं भी डर रही थी किसी अंजानी अनहोनी से, कोई लुटेंरे आ गये तो सोचते ही इनका हाथ मैंने कस कर पकड़ लिया ये भी हमें समझा रहे थे कि न शेर आएगा और न डाकू। थोड़ा आगे बढने पर हमें दो वेन और मिली उन्हें देख थोड़ी राहत मिली वो भी खराब हो गई थी एक पंचर थी दूसरी बन्द हो गई थी हम अपने पास का पानी दूसरी वेन वालों को दे आगे बढे मैंने इनको बोला भी पानी क्यों दिया हम खुद बहुत परेशान है ये बोले चुप बैठो उनके साथ भी तो महिलाएं थी यहाँ से बाहर निकलना सभी के लिए जरूरी है मुझे भी अपनी गलती का अहसास हुआ पर थोड़ा आगे बढते ही हमारी गाड़ी पूरी तरह गरम हो गई वोनट खोलते ही धुआ ही धुआं पानी भी पास न था इनका मोवाईल भी बन्द ,मेरे मोवाईल पर बडी मुश्किल से नेटवर्क मिला मैंने अपने भाई को फोन किया उसने कहा आप लोग घवराएँ नही मैं अभी दूसरी गाड़ी ले कर आता हूँ तब तक आप देखें कोई मदद मिल जाए। रात ज्यादा न थी 11:30ही बजे थे पर अंधेरा बहुत गेहरा था रास्ते पर लाईट भी नही जल रही थी बड़ा बेटा जो अभी बस 13साल का था,बोला डेडी चलो हम पानी और मदद ढूँढ कर लाते हैं ये बोले तुम मम्मा के पास रूको मैं जाता हूँ पर हम ने उन्हें अकेले नही जाने दिया छोटा बेटा(8)जो बहुत डरा हुआ था बोला मैं हूँ न मम्मा के पास ,मैंने भी कहा आप दोनों जाए हम कार लाक कर अन्दर बैठे रहेंगे ।आज मेरे दोनों बेटे जैसे समझदार हो गये उन दोनों के चले जाने पर हमने कार लाक कर ली हम दोनों का डरके मारे बुरा हाल था ।दूर से कोई आता दिखाई दिया जो साफ नही दिख रहा था थोड़ा पास आने पर लगा कोई चादर लपेटे हुये धीरे धीरे बढ़ा चला आ रहा था हाथ में उसके एक डंडा था वो हमारी तरफ ही आ रहा था बेटा चिल्ला पढ़ा मम्मा भूत और मुझ से लिपट गया मैं क्या करती मेरी तो आवाज ही नही निकल रही थी गला सूख रहा था वो हमारी तरफ बढ़ रहा था तभी मैंने उसके पीछे इनको तेजी से आता देखा ,वो कार के पास रूक गया उसका मुँह चादर से ढका था ये तेजी से उसके पास आ कर बोले क्या है वो बोला काहे कछू ना ही ,तुम लोग जहाँ काहे रूको हो भागों जहाँ से। ये कुछ बोलते वो चल दिया बड़ा बेटा सामने से आता दिखाई दिया उसके पीछे दो वाइक सवार आ रहे थे इन्होंने कार नही खोली और बाहर ही खड़े रहे बेटे से इन्होंने पूछा क्या हुआ वह कुछ न बोला वो दोनों युवक पास आ बोले क्या हुआ गाड़ी खराब हो गई, थोड़ी दूरी पर ही गांव है आप जल्दी निकल जाओ जहाँ से और चले गये मेरी जान में जान आई ।गाड़ी बड़ी मुश्किल से स्टार्ट हुई हम जल्द से जल्द वहाँ से निकलना चाहते थे पर ऐसा लग रहा था जैसे कोई हमें परेशान कर रहा हैऔर एक अदृश्य शक्ति हमारी मदद कर रही हैं हम जैसे तेसे वहाँ से निकल चूके थे किसी तरह जब हम न्यूर्माकेट पहुंचे गाड़ी भयंकर गरम थी पर चिंता कम थी र्कावोरेटर का पानी उबल रहा था धुआं उठ रहा था हम सब गाड़ी से उतर बाहर खड़े थे लोग देख देख कर जा रहे थे चार पाँच लड़के आ कर बोले अबे अंडे आलू उबाल लो अंकल क्या लद्दाख से गाड़ी चला कर ला रहे हो पर हम कुछ न बोले ।।

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