मृत्यु मुक्त कर देती है, जीवन बांधता है।

फ़िर भी सबको बंधन चाहिए, जीवन चाहिए,

कोई मुक्त होना नहीं चाहता, कोई मृत्यु नहीं चाहता।

इन्हीं चाहने और न चाहने के द्वंद्वों के मध्य,

प्रतिदिन हम सीखते हैं

जी कर भी मर जाना

या कि मरकर भी जी उठना,

हम सीखते हैं,

बंधकर भी मुक्त हो जाना

या कि मुक्त होकर भी अनगिन बंधनों में पड़े रहना...।

hindi@pratilipi.com
+91 8604623871
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.