वो काली स्याह रात

क्या प्रोग्राम था यार मजा आ गया। सोनाल ने अपने दोस्त नन्दलाल के कन्धे पर एक हल्का सा हाथ मारा । नन्दलाल ने भी एक दबी हुई मुस्कान देकर उसकी बातों को जैसे सहमति दी हो। रात के करीब 12 बजे तीनो दोस्त अपने कॉलेज के आनुअल प्रोग्राम देखकर लौट रहे थे ।दिसम्बर की हाड़ कपकपा देने वाली ठंढ को वो बिलकुल बेफिक्र होके अपने घर को लौट रहे थे । अबे! सोनाल बाइक क्या पूजा करने के लिए लिया है क्या? नन्दलाल ने सोनाल पर तंज कसते हुए कहा ।क्या करे भाई किसको पता था इतना रात हो जाएगा सर्द के कारण दाँत किटकिटाते हुए सोनाल ने उसका जवाब दिया। उन लोगो का घर उनके कॉलेज से 8 km की दूरी पर था। आते समय तो वो ऑटो पकड़ के आ गए प्रोग्राम ख़तम होते ही वे जाने के बारे में सोचने लगे। उनका घर बिलकुल शहर से हट क़े एक देहात इलाक़ा में पड़ता था। वो तीनो कुछ नही मिलने के काऱण अनमना ढंग से पैदल ही निकल पड़े ।तीनो अपने प्रोग्राम के बारे में चर्चा करते करते चल रहे थे। अचानक सोनाल ने कहा कि यार मैन रोड से चलेंगे तो बहुत लंबा पड़ जाएगा क्यों ना हम उस लाल कोठी वाले रास्ते से चले कुछ कम पड़ेगा ।नन्दलाल ने भी गर्दन हिलाकर उसकी बातों से सहमति दिलाई ।इन सब के बीच जो अभी तक चुप था वो था उनका एक दोस्त कौशल जिसने उस रात के सन्नाटे को भाँपते हुए कहा ।।। तुम लोग पागल हो गया है क्या बे? इतनी रात को उस रास्ते से में नही जाऊँगा। उस तरफ से आदमी तो छोड़ो एक जानवर भी सुबह को भी नही जाता और तुम लोग इस आधी रात को जाने की बात कर रहे हो।कुछ देर चुप रहने के बाद नन्दलाल ने कौशल पर तंज मारते हुए मजाक से कहा कि भाई हमको घर जाने की जल्दी है। तुम यही सड़क पे रात भर सुबह होने का इन्तजार कर सकते हो ।इतना कहते ही नन्दलाल और सोनाल ने एक जोरदार हँसी हँसी जो कोशल को अंदर ही अंदर नागवार गुजरा पर मरता क्या ना करता वो भी उन दोनों के साथ चल दिया। वो तीनो अपनी बातें करते हुए मैन रोड से हटकर उस हवेली को जाने वाले रास्ते की और चल पड़े।चारो तरफ घने पेड़ ऊपर से गिरता हुआ कुहासा और कुछ ना दिखने वाले उस ओस में वो ठण्ड से ठिठुरते हुए जा रहे थे।यार यही पे वो शर्मा जी का परिवार रहता था ना इसी लाल कोठी में जिन्होंने आतमहत्या कर लिया था पुरे परिवार के साथ सोनाल ने गंभीर होकर नन्दलाल से पूछा।नन्दलाल ने भी गर्दन हिलाकर सहमति जताते हुए उसे जवाब दिया। सुनो । तुम लोग गांव की तरफ जा रहे हो क्या? पीछे से किसी ने कड़क आवाज से पूछा । कौशल की तो डर के मारे हालत खराब हो रही थी पर नन्दलाल और सोनाल ने परिस्तिथी को भांपते हुए पर अंदर से थोड़े डरी हुई आवाज़ में जवाब दिया।।।हाँ जी। पीछे से एक 6 फ़ीट और मोटा आदमी और उसके साथ एक बच्चा दोनों चले आ रहे थे।हम भी तुम लोगो के साथ चले? जी।चलिये। सोनाल ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया । कहा से आ रहे हो इतनी रात को? उन्होंने सवाल पूछा ।नन्दलाल ने उन्हें सब कुछ बताते हुए कहा ।कुछ बदबू आ रही है क्या तुम लोग को कौशल ने नन्दलाल की तरफ देखते हुए पूछा।तब तक बात को बीच में काटते हुए सोनाल ने कहा अबे डरपोक तुम खुद डरते हो और दूसरों को भी डराते हो ।उस आदमी ने सोनाल से पूछा तुम्हे डर नही लगता सोनाल ने एक जोरदार आवाज़ में बोला नही।वो आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा कि कभी कभी डरना भी जरुरी है।और वो सब बिना कुछ बोलते हुए सहलते रहे।अचानक कोशल के हाथ से उसका मोबाइल नीचे गिर गया वो जैसे ही मोबाइल लेने के लिए नीचे झुका उसने कुछ देखा और ठिठर गया उसने पैर की तरफ इशारा करते हुए अपने दोस्तों को कुछ दिखाया ।उस इंसान का पैर का पंजा पीछे की और मुड़ा हुआ था।इतना देखते ही तीनों दोस्त बेहताशा होकर भागने लगे जब तक की तीनों बेहोश नही हो गए।।।सुबह जब नन्दलाल की नींद खुली तो उसके भईया ने उसे एक सवाल के साथ पूछा की बेहोश कैसे हो गए थे।तुम लोग वो तो भला हो उस राहगीर का जिन्होंने तुमको घर पंहुचा दिया।।।नन्दलाल ने डरते हुए पूछा उनके साथ एक बच्चा भी था क्या? हाँ था एक बच्चा ।।।।।।

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