सागर की लहरें साहिलों से टकराकर यूँ ही वापस लौट जाया करती हैं |

बारिश की कुछ बुंदें सागर को छूकर यूँ ही उसमें मिल जाया करती हैं |

सूरज की किरणों से ओस भी यूँ ही झिलमिलाने लगती हैं |

किसी का साथ वक्त को यूँ ही यादगार बना देती है |

हर गुजरते वक्त के साथ एक नयी कहानी बना देती है |

कुछ ख्वाब जिंदगी के अश्कों में बह जाती है |

तो कुछ इतिहास बनकर जिंदगी की पन्नों पर सदा के लिए रह जाती है |

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