वो आज नहीं आया,
न जाने कहाँ रह गया?
अब तक तो आ जाता था,
नहीं तो झाँक रहा होता था,
पेड़ों के पीछे से !
पता नहीं आज कहाँ रह गया?
कल तो आया था,
पर उदास था!
मैंने पुछा भी था कि,
कहो क्या हाल है ?
कुछ न बोला बस खामोश खड़ा रहा था !
कुछ उदास सा रहता था,
बहुत दिनों से!
रंगत भी कुछ पीली सी,
पड़ गयी थी उसकी !
चेहरा कुछ मुरझाया सा था,
गहरा गए थे उसके चेहरे के दाग़ !
डार्क सर्किल पड़ गए थे,
उसकी आँखों के नीचे !
बहुत पूछने पर बस,
इतना बोला था कि,
अकेला सा पड़ गया है वो !
और फिर सुबकने लगा था,
बादलों में मुंह छुपा कर !
एक वक़्त था जब,
लोग बैठते थे उसके साथ !
घंटो बिताते थे,
उसे ताकते-निहारते हुए !
प्रेमी कसमें खाते थे,
उसके सामने जीने-मरने की !
बच्चे मामा-मामा कहकर,
बुलाते थे उसे !
ये सब बताते-बताते,
रो पड़ा था वो !
गीला हो गया था,
उसका बादलों का रुमाल,
आंसुओं से उसके !
बड़ी गहरी उदासी थी उसकी,
बहुत गहरी, बहुत गाढ़ी !
लगता है आज नहीं आएगा वो !
मैं भी चलता हूँ घर अपने !
अगले दिन अखबार में खबर थी कि-
चाँद ने अपने घर की छत से कूद कर,
ख़ुदकुशी कर ली !
सर के बल गिरा था वो,
यादें बिखरी पड़ी थीं उसके चारो ओर!
एक टूटा हुआ चरखा भी था उनमें !
अफ़सोस.......
वो अब नहीं आएगा,
चाँद ने ख़ुदकुशी जो कर ली है !

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