दिन भर आग उगलने के बाद थका - मांदा सूरज पुराने तालाब मे डुबकी लगने को आतुर तेजी से ढ़लता जा रहा था । गोधूली बेला मे सभी अपने नीड़ की तरफ बढ़ चले । घंटो से नूरा को ढ़ूंढ़ती फातिमा भी हलकान हो घर को चल पड़ीं ।

" अम्मी ओ अम्मी , नूरा आ गयी क्या ? " फातिमा ने टेर लगाई ।

" नहीं तो , तुम्हारे साथ ही तो थी । क्यों , क्या हुआ ? " अम्मी चुन्नी से हाथ पोछती बाहर आई ।

" हाँ ! हम उसे नहला कर वहीं पोखर के पास छोड़ कपड़े धोने लग गयीं थीं फिर आते वक्त बहुत ढ़ूंढ़ा पर ..." रजिया रूआंसी हो उठी ।

"ओह ! अब तो अंधेरा हो गया , अब क्या होगा ?" अनजानी आशंका से कांप उठी अम्मी ।

" क्या हो गया ? " रहीम मियां अंदर आते हुए सबसे मुखातिब हुए ।

" अब्बा , वो नूरा नहीं मिल रही शाम से ।" रजिया बोली ।

"क्या ? या खुदा ! कहीं कुछ ...." कहते हुए दौड़ कर रहिम मियां बाहर निकले और अपने पड़ोसी रहमत और लल्लन को आवाज दी । कुल जमा तीन घर हीं थे बस्ती में इनके ।

सब जानकर दोनों डंडा और रस्सी लिए आ गये । रहीम मियां टॉर्च लिए लपकते से निकलने को हुए कि पड़ोस मे रहने वाले मास्टर साहब ने टोका , " क्या हुआ ? ये कहां की तैयारी ? "

" मास्टर जी , वो अपनी नूरा नही मिल रही शाम से । कल्लू चमार की नजर कब से उस पर लगी है ...हमेशा कहता है बूढ़ी गौ रख कर क्या फायदा ...इसे मुझे बेच दे । "

कहते हुए एक खौफ सा छा गया रहीम की आँखों में । रुंधे गले से बोला " आप तो जानते हो की वो हमारे घर की सदस्य जैसी है । उसी को ढ़ूंढने जा रहे हैं ।"

" बाहर बहुत अंधेरा है , कल सुबह ढ़ूंढ़ लेना ।" मास्टर जी ने गंभीरता से कहा ।

" अंधेरा ? आज तो पूरे चांद की रात है मास्टर जी , फिर ये टॉर्च भी तो है ..." उतावला होता रहीम बोला ।

" पूरे चांद से लोगों के दिमाग का अंधेरा नही जाएगा मेरे भाई ! नूरा को कुछ नही होगा , उसे बचाने के नाम पर सौ हाथ खड़े हो जाएंगे , भले उस भीड़ मे कल्लू चमार भी क्यों न हो , पर ..."

एक पल को रूक कर उन्होंने रहीम के कंधे पर हाथ रखते हुए भीगी आवाज मे कहा " अभी रात मे तुम सभी को नूरा के साथ देख कर तुम्हारे सच पर कोई यकीन न करेगा , और न बचा पाएगा ....भले उस भीड़ में मैं भी क्यों न होऊं । "

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.